Chhattisgarh High Court: 3 बड़ी टिप्पणियां, याचिका खारिज

Chhattisgarh High Court ने मुंगेली के बलानी चौक में देवी मां परमेश्वरी की मूर्ति स्थापना को लेकर दायर याचिका खारिज कर दी है। दुकानदारों के एक समूह ने नगर पालिका परिषद के निर्णय को चुनौती दी थी। उनका दावा था कि सार्वजनिक चौक में मूर्ति स्थापना से यातायात बाधित होगा और उनकी दुकानों तक पहुंच प्रभावित होगी। लेकिन अदालत ने कहा कि याचिका ठोस तकनीकी साक्ष्यों से रहित है। यह फैसला प्रशासनिक निर्णयों की न्यायिक समीक्षा की सीमाओं को भी स्पष्ट करता है।


Chhattisgarh High Court की सख्त टिप्पणी और फैसला

Chhattisgarh High Court की खंडपीठ, जिसमें न्यायमूर्ति Ramesh Sinha और न्यायमूर्ति Ravindra Kumar Aggarwal शामिल थे, ने 24 फरवरी को यह आदेश पारित किया।

अदालत ने स्पष्ट कहा कि जब किसी परिणामी आदेश को चुनौती दी जाती है, लेकिन उसके मूल आधार को नहीं, तो याचिका स्वतः ही असफल हो जाती है। इस मामले में दुकानदारों ने केवल 4 अप्रैल 2025 के कार्य आदेश को चुनौती दी थी। जबकि तकनीकी स्वीकृति, निविदा सूचना और नगर परिषद के प्रस्ताव को चुनौती नहीं दी गई।

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अदालत ने यह भी कहा कि यातायात अवरोध के आरोप केवल अनुमान आधारित हैं। याचिकाकर्ताओं ने कोई ट्रैफिक रिपोर्ट या साइट प्लान प्रस्तुत नहीं किया। इसलिए यह दावा साबित नहीं हुआ कि मूर्ति स्थापना किसी वैधानिक प्रावधान का उल्लंघन करती है।

अदालत ने दोहराया कि अनुच्छेद 226 के तहत न्यायिक समीक्षा निर्णय प्रक्रिया तक सीमित है, न कि प्रशासनिक निर्णय के गुण-दोष तक।


बलानी चौक विवाद की कहानी

बलानी चौक, राजेंद्र वार्ड, मुंगेली शहर का व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्र है। वर्ष 2023 में नगर पालिका परिषद ने यहां देवी मां परमेश्वरी की मूर्ति स्थापना का प्रस्ताव रखा। दुकानदारों ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि सड़क के बीच स्थायी ढांचा बनने से ट्रैफिक जाम बढ़ेगा।

उन्होंने वैकल्पिक स्थान पर मंदिर बनाने का सुझाव भी दिया। उस समय प्रस्ताव रोक दिया गया। लेकिन 2025 में फिर से प्रक्रिया शुरू हुई। 4 अप्रैल 2025 को नगर परिषद ने कार्य आदेश जारी किया। इसके बाद दुकानदारों ने दो बार याचिका दायर की। दोनों बार उन्होंने याचिका वापस ली।

अंततः तीसरी बार दायर याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया।


Key Facts: Chhattisgarh High Court मामले के अहम बिंदु

  • 24 फरवरी को याचिका खारिज की गई।
  • तकनीकी स्वीकृति और निविदा को चुनौती नहीं दी गई।
  • यातायात अवरोध के आरोप प्रमाणित नहीं हुए।
  • यह तीसरी बार दायर याचिका थी।
  • अदालत ने अनुच्छेद 226 की सीमाएं स्पष्ट कीं।

प्रतिक्रियाएं

Chhattisgarh High Court के फैसले के बाद नगर पालिका परिषद ने इसे वैधानिक अधिकारों की पुष्टि बताया। परिषद के अधिवक्ता ने कहा कि सौंदर्यीकरण योजना के तहत निर्णय लिया गया।

राज्य की ओर से अधिवक्ता प्रियंक राठी ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट के जिन फैसलों का हवाला दिया गया, वे अवैध निर्माण पर लागू होते हैं। यहां कार्रवाई स्वयं नगर परिषद कर रही है।

दूसरी ओर दुकानदारों का कहना है कि वे धार्मिक भावना के खिलाफ नहीं हैं। उनका विरोध केवल स्थान को लेकर था।

सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों की जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट https://www.sci.gov.in देखी जा सकती है। वहीं छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की जानकारी https://highcourt.cg.gov.in पर उपलब्ध है।


Chhattisgarh High Court के इस फैसले ने साफ कर दिया कि बिना ठोस साक्ष्य के प्रशासनिक निर्णयों को चुनौती देना कठिन है। अदालत ने प्रक्रिया की वैधता पर जोर दिया। अब बलानी चौक में मूर्ति स्थापना का मार्ग साफ हो गया है। यह मामला दिखाता है कि कानून तथ्यों पर चलता है, केवल आशंकाओं पर नहीं। आने वाले समय में भी Chhattisgarh High Court ऐसे मामलों में प्रक्रिया की शुचिता को प्राथमिकता देगा।

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