Naxal Surrender: 8 लाख इनामी महिला का बड़ा आत्मसमर्पण

Naxal Surrender ने बस्तर संभाग में चल रहे उन्मूलन अभियान को नई मजबूती दी है। कांकेर जिले में बीते 48 घंटों के भीतर तीसरे बड़े नक्सली ने आत्मसमर्पण किया। इस बार 8 लाख रुपये की इनामी महिला डीवीसीएम मासे बारासा ने पुलिस के सामने सरेंडर कर सबको चौंका दिया। वह अपने साथ AK-47 रायफल और जिंदा कारतूस लेकर पुलिस दफ्तर पहुंची। यह घटना बताती है कि पुनर्वास नीति असर दिखा रही है।

Naxal Surrender: 8 लाख इनामी महिला

कांकेर में Naxal Surrender, AK-47 के साथ पहुंची महिला डीवीसीएम

Naxal Surrender की यह ताजा घटना कांकेर जिले में हुई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मासे बारासा वर्ष 2003 से माओवादी संगठन से जुड़ी थी। पिछले 22 वर्षों में वह संगठन में सक्रिय रही। लंबे अनुभव के कारण उसे डिवीजनल कमेटी मेंबर की जिम्मेदारी मिली थी।

आत्मसमर्पण के समय वह एक AK-47 रायफल और भारी मात्रा में जिंदा कारतूस लेकर आई। पुलिस ने हथियार जब्त कर लिए हैं। अधिकारियों ने बताया कि वह कई बड़ी नक्सली वारदातों में शामिल रही है।

कांकेर में दो दिनों के भीतर यह तीसरा बड़ा आत्मसमर्पण है। इससे पहले भी दो सक्रिय नक्सलियों ने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।

छत्तीसगढ़ पुलिस का कहना है कि पुनर्वास नीति के तहत नक्सलियों को समाज में वापस लाने का प्रयास लगातार जारी है।


उन्मूलन अभियान और पुनर्वास नीति

बस्तर संभाग लंबे समय से नक्सल गतिविधियों से प्रभावित रहा है। हालांकि हाल के वर्षों में सुरक्षा बलों ने लगातार अभियान चलाए हैं। इसके साथ ही राज्य सरकार ने पुनर्वास नीति लागू की है।

इस नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को आर्थिक सहायता और पुनर्वास का अवसर दिया जाता है। पुलिस का मानना है कि सख्ती और संवेदनशीलता दोनों जरूरी हैं।

लगातार आत्मसमर्पण की घटनाएं दिखाती हैं कि संगठन के भीतर असंतोष बढ़ रहा है। साथ ही विकास कार्यों की रफ्तार भी क्षेत्र में बढ़ी है।

राज्य पुलिस की आधिकारिक जानकारी के लिए देखें:
https://cgpolice.gov.in

नक्सल उन्मूलन से जुड़ी राष्ट्रीय जानकारी के लिए देखें:
https://mha.gov.in


Naxal Surrender

  • 8 लाख रुपये की इनामी महिला नक्सली
  • वर्ष 2003 से संगठन में सक्रिय
  • AK-47 और कारतूस के साथ आत्मसमर्पण
  • कांकेर में 48 घंटों में तीसरा बड़ा सरेंडर
  • कई बड़ी वारदातों में रही शामिल

सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ा

Naxal Surrender की इस घटना से सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ा है। पुलिस अधिकारियों ने इसे बड़ी सफलता बताया। उनका कहना है कि यह अभियान की दिशा सही होने का संकेत है।

स्थानीय लोगों में भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दिखी। लोगों को उम्मीद है कि ऐसे आत्मसमर्पण से क्षेत्र में शांति और विकास तेज होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब वरिष्ठ पदों पर रहे नक्सली आत्मसमर्पण करते हैं, तो संगठन कमजोर होता है।


Naxal Surrender से शांति की उम्मीद

Naxal Surrender की यह घटना बस्तर में बदलते हालात की गवाही देती है। 22 साल से सक्रिय महिला डीवीसीएम का मुख्यधारा में लौटना बड़ी बात है।

लगातार आत्मसमर्पण से साफ है कि पुनर्वास नीति असर दिखा रही है। यदि यह सिलसिला जारी रहा, तो Naxal Surrender राज्य में स्थायी शांति की राह मजबूत करेगा।

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