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ग्रामिण शिक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न: मास्टरजी की लापरवाही का शर्मनाक उदाहरण

छत्तीसगढ़ के मस्तूरी विकासखंड के बरेली प्राथमिक विद्यालय से शिक्षा व्यवस्था की लचर स्थिति का एक और शर्मनाक मामला सामने आया है। यहां कक्षा में पढ़ाई करवाने के बजाय शिक्षक को सोते हुए पाया गया, और बच्चे बिना किसी निगरानी के इधर-उधर घूमते रहे।

जब एक निरीक्षण टीम स्कूल पहुंची, तो उन्होंने देखा कि न तो कक्षा में कोई अनुशासन था और न ही पढ़ाई हो रही थी। हैरानी की बात यह रही कि जब शिक्षक से सोने का कारण पूछा गया, तो उन्होंने बेपरवाही से कहा, “लंच टाइम है।”

यह घटना न केवल शिक्षकों की गैर-जिम्मेदारी को उजागर करती है, बल्कि सरकारी अधिकारियों द्वारा निगरानी की कमी को भी रेखांकित करती है। ऐसे मामलों से साफ होता है कि सरकार की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने की कोशिशें ग्रामीण इलाकों में विफल हो रही हैं।

आवश्यकता:
इस तरह की घटनाओं से निपटने के लिए शिक्षकों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए और स्कूलों में नियमित निरीक्षण किए जाने चाहिए। बच्चों के भविष्य के साथ हो रहे इस खिलवाड़ को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है।