Wildlife Deaths को लेकर छत्तीसगढ़ विधानसभा में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। वन मंत्री केदार कश्यप ने मंगलवार को सदन में जानकारी दी कि पिछले 26 महीनों में राज्य में 38 हाथियों और 9 बाघों की मौत हो चुकी है।
इन मौतों के पीछे कई वजहें सामने आई हैं। कुछ मामलों में करंट लगना जिम्मेदार रहा, जबकि कुछ घटनाएं शिकारियों द्वारा लगाए गए अवैध बिजली तारों के कारण हुईं। इसके अलावा, कई बाघ और अन्य वन्यजीव आपसी लड़ाई या प्राकृतिक कारणों से भी मारे गए। इन आंकड़ों ने राज्य में वन्यजीव संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Wildlife Deaths पर विधानसभा में चौंकाने वाला खुलासा
छत्तीसगढ़ विधानसभा में Wildlife Deaths के आंकड़े सामने आने के बाद वन्यजीव संरक्षण को लेकर बहस तेज हो गई है। यह जानकारी वन मंत्री केदार कश्यप ने कांग्रेस विधायक शेषराज हरबंश के सवाल के जवाब में दी।
मंत्री ने बताया कि दिसंबर 2023 से जनवरी 2026 के बीच राज्य में 9 बाघों और 38 हाथियों की मौत दर्ज की गई। वन विभाग के अनुसार, दो बाघों की मौत अवैध बिजली बाड़ के कारण करंट लगने से हुई। यह बाड़ अक्सर शिकारियों द्वारा जानवरों को पकड़ने के लिए लगाई जाती है।
इसके अलावा दो बाघों की मौत आपसी संघर्ष यानी infighting के कारण हुई। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, कई बार क्षेत्रीय विवाद के कारण बाघों के बीच घातक लड़ाई हो जाती है।
मंत्री ने यह भी बताया कि रायपुर के नंदन वन जू और सफारी का एक आठ वर्षीय बाघ पिछले साल 10 अक्टूबर को गुजरात के जामनगर स्थित वन्यजीव पुनर्वास केंद्र वंतारा में मर गया। डॉक्टरों ने उसकी मौत का कारण multiple organ failure बताया।
हाथियों की मौत के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं। 38 हाथियों में से 14 की मौत करंट लगने से हुई। वहीं 10 हाथी पानी में डूबने से मारे गए।
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वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी जानकारी यहां पढ़ी जा सकती है:
https://wildlifeindia.co.in
छत्तीसगढ़ में बढ़ रही Wildlife Deaths की चिंता
छत्तीसगढ़ घने जंगलों और समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है। राज्य के कई जिलों में हाथी और बाघ बड़ी संख्या में पाए जाते हैं।
लेकिन पिछले कुछ वर्षों में Wildlife Deaths के मामले बढ़ते नजर आ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों में मानव गतिविधि बढ़ने से जानवरों का प्राकृतिक आवास प्रभावित हो रहा है।
कई ग्रामीण इलाकों में किसान फसलों को बचाने के लिए अवैध बिजली तार लगा देते हैं। इससे कई बार जंगली जानवर करंट की चपेट में आ जाते हैं।
इसके अलावा, जंगलों में पानी की कमी और भोजन की तलाश भी जानवरों को मानव बस्तियों के करीब ले आती है। ऐसे में दुर्घटनाओं और संघर्ष की संभावना बढ़ जाती है।
भारत में वन्यजीव संरक्षण से जुड़े नियमों के बारे में यहां जानकारी मिल सकती है:
https://wii.gov.in
Key Facts: Wildlife Deaths के अहम आंकड़े
- दिसंबर 2023 से जनवरी 2026 के बीच 9 बाघों की मौत दर्ज हुई।
- इसी अवधि में 38 हाथियों की मौत हुई।
- 14 हाथियों की मौत करंट लगने से हुई।
- दो बाघों की मौत शिकारियों की अवैध बिजली बाड़ के कारण हुई।
- कुल 562 अन्य वन्यजीवों की भी अलग-अलग कारणों से मौत हुई।
प्रतिक्रियाएं
Wildlife Deaths के इन आंकड़ों ने पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों को चिंतित कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो कई प्रजातियों पर खतरा बढ़ सकता है।
रायपुर के नंदन वन जू और सफारी में भी 145 वन्यजीवों की मौत दर्ज की गई। इनमें दिसंबर 2023 में पांच, वर्ष 2024 में 61, वर्ष 2025 में 76 और जनवरी 2026 में तीन मौतें हुईं।
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि इन मौतों के पीछे कई कारण रहे। इनमें आपसी संघर्ष, दम घुटना, हीट स्ट्रोक, निमोनिया और संक्रमण शामिल हैं।
विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा के बाद विपक्ष ने वन्यजीव संरक्षण के लिए बेहतर निगरानी और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
छत्तीसगढ़ में सामने आए Wildlife Deaths के आंकड़े स्पष्ट संकेत देते हैं कि वन्यजीव संरक्षण को लेकर अभी बहुत काम करने की जरूरत है। करंट, शिकार और प्राकृतिक कारणों से जानवरों की मौत लगातार चिंता बढ़ा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर निगरानी, जागरूकता और सख्त कानून लागू करने से ही Wildlife Deaths को कम किया जा सकता है। साथ ही जंगल और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा भी बेहद जरूरी है।
