छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित बैराज से सूख सकती है ओडिशा की उदंती नदी, किसानों और जल सुरक्षा पर संकट

Udanti River barrage dispute: भवानीपटना से सामने आ रही जानकारी ने ओडिशा के पश्चिमी जिलों में चिंता बढ़ा दी है। छत्तीसगढ़ में उदंती नदी पर प्रस्तावित बैराज के चलते नदी का जल प्रवाह गंभीर रूप से प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। यदि यह परियोजना आगे बढ़ती है, तो ओडिशा में लगभग 80 किलोमीटर लंबा नदी क्षेत्र सूख सकता है, जिससे हजारों लोगों की आजीविका पर असर पड़ेगा।

किसानों और पर्यावरणविदों की बढ़ती चिंता

स्थानीय किसानों, पर्यावरणविदों और जल संसाधन विशेषज्ञों का कहना है कि उदंती नदी पर ऊपर की ओर जल रोके जाने से—

  • सिंचाई पर निर्भर खेती प्रभावित होगी
  • पीने के पानी की उपलब्धता घटेगी
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ेगा

महत्वपूर्ण बात यह है कि ओडिशा सरकार को अब तक इस बैराज को लेकर कोई औपचारिक सूचना नहीं मिली है, जबकि छत्तीसगढ़ में इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी बताई जा रही है।

क्यों अहम है उदंती नदी

उदंती नदी का उद्गम छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के दंडकारण्य आरक्षित वन से होता है।
यह नदी—

  • ओडिशा के नुआपाड़ा जिले में 31.24 किमी
  • कालाहांडी जिले में लगभग 50 किमी
    तक बहती है और अंततः तेल नदी में मिलती है।

यही नदी हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि के लिए जीवनरेखा मानी जाती है।

लटकी हुई ओडिशा की सिंचाई परियोजनाएं

ओडिशा सरकार लंबे समय से अपर और लोअर उदंती सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी दिलाने की कोशिश कर रही है।
➡️ अपर उदंती परियोजना से नुआपाड़ा में 8,500 हेक्टेयर
➡️ लोअर उदंती परियोजना से कालाहांडी में 9,300 हेक्टेयर
सिंचित होने की योजना थी।

हालांकि महानदी जल विवाद के चलते केंद्र से अब तक अनुमति नहीं मिल सकी है।

वन्यजीव संरक्षण बनाम जल अधिकार

छत्तीसगढ़ ने वर्ष 2003 में उदंती–सीतानदी क्षेत्र को टाइगर रिजर्व घोषित किया था। राज्य के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग का तर्क है कि प्रस्तावित बैराज—

  • पक्षियों
  • जंगली भैंस
  • अन्य वन्यजीवों
    के संरक्षण के लिए जरूरी है।

लेकिन जल विशेषज्ञों का कहना है कि वन्यजीव संरक्षण की आड़ में डाउनस्ट्रीम राज्यों के जल अधिकार प्रभावित नहीं किए जा सकते

राज्य और केंद्र से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

बुद्धिजीवी वर्ग और अधिकारी मानते हैं कि यदि समय रहते अंतरराज्यीय और केंद्रीय स्तर पर हस्तक्षेप नहीं हुआ, तो ओडिशा को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है—

“ऊपरी हिस्से में जल रोका गया, तो निचले इलाकों में खेती और जीवन दोनों सूख जाएंगे।”

क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा

  • यह मामला अंतरराज्यीय नदी जल विवाद से जुड़ा है
  • हजारों किसानों की आजीविका दांव पर है
  • भविष्य में बड़े सामाजिक-आर्थिक टकराव की आशंका है