STF Dantewada Rescue: 1 साहसी मिशन, भावुक मानवता

STF Dantewada Rescue की यह कहानी घने जंगलों और दुर्गम रास्तों के बीच से निकलकर सामने आई है। दंतेवाड़ा जिले के अंदरूनी इलाके में सर्चिंग पर निकली स्पेशल टास्क फोर्स की टीम ने एक गंभीर रूप से झुलसी ग्रामीण महिला की जान बचाई। आग से 40 से 50 प्रतिशत तक झुलसी यह महिला कई दिनों से बिना इलाज के तड़प रही थी। हालांकि एसटीएफ जवानों ने हालात देख तुरंत मानवीय कदम उठाया। वर्दी के भीतर छिपा संवेदनशील दिल इस रेस्क्यू में साफ दिखा।

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STF Dantewada Rescue में जवानों ने दिखाई संवेदना

STF Dantewada Rescue के दौरान एसटीएफ कमांडर ओम प्रकाश सेन के नेतृत्व में टीम ग्राम पुरंगेल पहुंची। वहां एक महिला दर्द से कराहती मिली। जानकारी मिली कि 10 से 15 दिन पहले वह आग तापते समय दुर्घटनावश आग में गिर गई थी।

उसकी कमर से ऊपर का हिस्सा बुरी तरह झुलस चुका था। इलाज के अभाव में घाव सड़ने लगे थे। संक्रमण फैल चुका था। स्थिति बेहद नाजुक थी।

जवानों ने पल भर की देरी नहीं की। पहले परिवार को राशन और आर्थिक मदद दी गई। फिर महिला को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने का निर्णय लिया गया।

जंगल में वाहन संभव नहीं था। इसलिए जवानों ने चारपाई को कांवड़ बनाया। महिला को कंधों पर उठाया। कई किलोमीटर पैदल चलकर उसे हिरोली गांव तक लाए।

वहां पहले से एंबुलेंस मंगाई गई थी। महिला को किरंदुल अस्पताल पहुंचाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उसे जिला अस्पताल दंतेवाड़ा रेफर किया गया।

छत्तीसगढ़ पुलिस से जुड़ी जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल देखा जा सकता है:
https://cgpolice.gov.in


पृष्ठभूमि: माओवादी अभियान और दुर्गम हालात

दंतेवाड़ा जिला लंबे समय से माओवादी गतिविधियों के लिए जाना जाता है। यहां सुरक्षा बल नियमित सर्चिंग अभियान चलाते हैं।

एसटीएफ की टीम भी ऐसे ही अभियान पर निकली थी। इलाके में घने जंगल और पगडंडियां हैं। कई गांव सड़क सुविधा से दूर हैं।

ऐसे हालात में किसी घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाना आसान नहीं होता। खासकर तब, जब वाहन पहुंच ही न सके।

फिर भी जवानों ने जोखिम उठाया। उन्होंने पहले महिला की स्थिति समझी। फिर तत्काल मदद का निर्णय लिया।

इस रेस्क्यू ने साबित किया कि सुरक्षा बल केवल अभियान नहीं चलाते। वे जरूरतमंदों के लिए सहारा भी बनते हैं।


Key Facts: STF Dantewada Rescue

  • ग्राम पुरंगेल में झुलसी महिला मिली।
  • 40–50 प्रतिशत तक महिला झुलसी हुई थी।
  • चारपाई को कांवड़ बनाकर कई किलोमीटर पैदल लाया गया।
  • किरंदुल अस्पताल से जिला अस्पताल दंतेवाड़ा रेफर।
  • तीन माह के शिशु के इलाज की भी व्यवस्था सुनिश्चित।

प्रभाव और मानवीय संदेश

STF Dantewada Rescue ने स्थानीय लोगों का भरोसा मजबूत किया है। ग्रामीणों ने जवानों के इस कदम की सराहना की।

चिकित्सकों के अनुसार देर से इलाज मिलने के कारण संक्रमण फैल गया था। हालांकि समय पर रेस्क्यू होने से महिला की जान बच सकी।

खास बात यह है कि महिला का तीन माह का बेटा भी है। एसटीएफ ने अस्पताल प्रशासन से समन्वय किया। मां और बच्चे दोनों के इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित की गई।

इस घटना ने यह संदेश दिया कि कठिन परिस्थितियों में भी मानवता जिंदा है।


दंतेवाड़ा के जंगलों में हुआ STF Dantewada Rescue केवल एक बचाव अभियान नहीं था। यह संवेदना और साहस की मिसाल है। माओवादी विरोधी अभियान के बीच जवानों ने मानवता को प्राथमिकता दी। चारपाई को कंधों पर उठाकर महिला की जान बचाना असाधारण कार्य है। STF Dantewada Rescue ने साबित किया कि वर्दी के भीतर भी धड़कता दिल होता है।

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