Raipur News — छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। नवा रायपुर स्थित ट्राइबल रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, सेक्टर-24 में दो दिवसीय “छत्तीसगढ़ कॉमन्स कंवीनिंग” का शुभारंभ हुआ है। यह सम्मेलन साझा प्राकृतिक संसाधनों (कॉमन्स) के सुशासन और सामुदायिक संरक्षण पर केंद्रित है।
आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने इस कार्यशाला का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदायों का कॉमन्स पर अटूट विश्वास उनके सशक्तिकरण की नींव है।
यह भी पढ़ें: लुंड्रा में CM साय ने किया 281 करोड़ के 5 विकास कार्यों का लोकार्पण
📲 Raipur और Chhattisgarh की हर बड़ी खबर सबसे पहले पाने के लिए अभी जुड़ें हमारे WhatsApp चैनल से: 👉 https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j
क्या है “छत्तीसगढ़ कॉमन्स कंवीनिंग”?
यह आयोजन छत्तीसगढ़ शासन के जनजातीय विकास विभाग के सहयोग से “प्रॉमिस ऑफ कॉमन्स” पहल के अंतर्गत विभिन्न साझेदार संस्थाओं द्वारा आयोजित किया जा रहा है।
इस दो दिवसीय सम्मेलन में जल, जंगल, जमीन, संस्कृति और पर्यावरण से जुड़े साझा संसाधनों के संरक्षण और सुशासन पर गहन चर्चा हो रही है।
सम्मेलन में सांस्कृतिक और पारंपरिक दृष्टिकोणों को भी केंद्र में रखा गया है, जो इसे एक नीतिगत मंच के साथ-साथ एक सांस्कृतिक संवाद का मंच भी बनाता है।

Raipur News: 70 लाख एकड़ जमीन पर क्यों हो रही है चर्चा?
Raipur News के इस सम्मेलन का केंद्रबिंदु छत्तीसगढ़ में कॉमन्स के रूप में वर्गीकृत 70 लाख एकड़ भूमि है।
इस विशाल भूखंड में जंगल, घास के मैदान और जल निकाय शामिल हैं, जो राज्य की ग्रामीण और जनजातीय आबादी के लिए जीवनरेखा का काम करते हैं।
विशेषज्ञों ने सम्मेलन के पहले दिन इस बात पर जोर दिया कि इन विशाल प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए सामूहिक देखरेख की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
वैश्वीकरण और आधुनिक जीवनशैली की चुनौतियों के बीच साझा ज्ञान का विकास कैसे हो और अपनी विरासत, आकांक्षाओं तथा भविष्य को कैसे बेहतर बनाया जाए — यही इस सम्मेलन का मूल प्रश्न है।
📲 छत्तीसगढ़ की जनजातीय और सरकारी नीतियों की खबरें सबसे पहले पाएं: 👉 https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j
PESA और FRA के बीच समन्वय के लिए बनेगी टास्क फोर्स
प्रमुख सचिव श्री बोरा ने Raipur News में एक महत्वपूर्ण नीतिगत घोषणा की। उन्होंने बताया कि सरकार नीतिगत बदलाव के लिए एक समर्पित टास्क फोर्स बनाने की प्रक्रिया में है।
इस टास्क फोर्स का मुख्य उद्देश्य होगा:
- पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम – PESA
- वन अधिकार अधिनियम – FRA
इन दोनों कानूनों के बीच संतुलित समन्वय सुनिश्चित करना, ताकि पूरे राज्य में इनका अधिक प्रभावी कार्यान्वयन हो सके।
श्री बोरा ने “न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन” की अवधारणा पर जोर देते हुए कहा कि स्थानीय लोग नीति-कार्यान्वयन में सबसे आगे हैं और उन्हें ही केंद्र में रखकर नीतियां बननी चाहिए।
जनजातीय लोक संगीत के लिए बनेगा विशेष स्टूडियो
सम्मेलन में एक और बड़ी घोषणा सामने आई। प्रमुख सचिव श्री बोरा ने बताया कि प्राकृतिक संसाधनों और जनजातीय विरासत के गहरे जुड़ाव को पहचानते हुए एक विशेष स्टूडियो स्थापित करने की योजना पर काम चल रहा है।
यह स्टूडियो विशेष रूप से इन कार्यों के लिए समर्पित होगा:
- पारंपरिक लोक गीतों का दस्तावेज़ीकरण
- स्वदेशी वाद्य यंत्रों की धुनों की पहचान और संरक्षण
- कॉपीराइट सुरक्षा ताकि जनजातीय कला का व्यावसायिक दोहन न हो
यह एक ऐतिहासिक पहल है जो छत्तीसगढ़ की अमूल्य जनजातीय सांस्कृतिक धरोहर को भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित करेगी।
Raipur News: सम्मेलन में कौन-कौन हुए शामिल?
Raipur News के इस सम्मेलन में 300 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जो छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के विभिन्न हिस्सों से आए।
इनमें शामिल रहे:
- नीति विशेषज्ञ – विभिन्न संगठनों से
- पंचायतों के प्रतिनिधि – जमीनी स्तर के जनप्रतिनिधि
- शोधकर्ता – प्राकृतिक संसाधन और जनजातीय अध्ययन क्षेत्र से
- सामुदायिक सदस्य – जो इन संसाधनों पर प्रत्यक्ष रूप से निर्भर हैं
सम्मेलन की शुरुआत पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित श्री जागेश्वर यादव और श्री पांडी राम मंडावी के उद्बोधनों से हुई। इसके अलावा गौर मारिया नृत्य कलाकार सुश्री लक्ष्मी सोरी ने भी सांस्कृतिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।
इन प्रतिष्ठित अतिथियों की उपस्थिति ने सम्मेलन को एक सांस्कृतिक गरिमा और विशेष महत्व दिया।
आगे क्या होगा – मुख्य सचिव और मंत्री का संबोधन
सम्मेलन के दूसरे दिन 10 अप्रैल को मुख्य सचिव श्री विकास शील जनजातीय नीति पर संवाद में शामिल होंगे। यह संवाद नीति-निर्माण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
समापन सत्र में आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम शामिल होंगे और अपना संबोधन देंगे। उनकी उपस्थिति इस सम्मेलन के निष्कर्षों को नीतिगत दिशा देने में सहायक होगी।
PESA और FRA से संबंधित जानकारी पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार – panchayat.gov.in पर उपलब्ध है। वन अधिकार और जनजातीय नीतियों की जानकारी जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार – tribal.nic.in पर भी देखी जा सकती है।
📲 रायपुर और छत्तीसगढ़ की हर सरकारी नीति और जनजातीय खबर सीधे आपके फोन पर: 👉 https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j
Raipur News की यह खबर छत्तीसगढ़ में जनजातीय समुदायों के अधिकारों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। नवा रायपुर में आयोजित छत्तीसगढ़ कॉमन्स कंवीनिंग सम्मेलन में 70 लाख एकड़ साझा भूमि के सुशासन, PESA-FRA टास्क फोर्स और जनजातीय लोक संगीत स्टूडियो जैसी महत्वपूर्ण पहलों ने यह स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ सरकार जनजातीय विरासत और पर्यावरण संरक्षण के प्रति गंभीरता से प्रतिबद्ध है।
300 से अधिक विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और सामुदायिक प्रतिनिधियों की उपस्थिति इस सम्मेलन की व्यापकता और महत्व को और अधिक रेखांकित करती है।
