Durg National Lok Adalat ने दुर्ग जिले में न्याय व्यवस्था को नई गति दी है। जिला न्यायालय दुर्ग में 14 मार्च 2026 को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत का भव्य और सफल समापन हुआ। इस महत्वपूर्ण आयोजन का शुभारंभ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत एनसीसी कैडेट्स की अनुशासित टुकड़ी द्वारा स्वागत से हुई, जिसने पूरे समारोह को गरिमामय बना दिया। इस लोक अदालत में लाखों मामलों को आपसी सहमति से सुलझाया गया। इससे कई वर्षों से लंबित विवादों का समाधान हुआ और पक्षकारों को त्वरित राहत मिली।
National Lok Adalat: लाखों मामलों का हुआ समाधान
National Lok Adalat के इस आयोजन में न्यायिक व्यवस्था की प्रभावशीलता का अनोखा उदाहरण देखने को मिला। जिला न्यायालय दुर्ग, परिवार न्यायालय और भिलाई-3, पाटन तथा धमधा स्थित न्यायालयों में कुल 39 पीठों का गठन किया गया था।
इन पीठों में कुल 10,13,826 मामलों को आपसी समझौते के लिए रखा गया। इनमें से 10,13,730 मामलों का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया। इन मामलों के समाधान के माध्यम से कुल 49,60,31,667 रुपये की समझौता राशि पारित की गई।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने कहा कि लोक अदालत केवल मामलों की संख्या कम करने का माध्यम नहीं है। यह समाज में सुलह से न्याय की भावना को मजबूत करने का मंच है।
इस अवसर पर लोक अदालत के महत्व पर आधारित एक विशेष पंडवानी गीत का विमोचन भी किया गया। न्यायालय परिसर में बार के सदस्यों की सांस्कृतिक टीम ने पंडवानी गायन और नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम ने कानूनी जागरूकता को रोचक तरीके से लोगों तक पहुंचाया।
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लोक अदालत से जुड़ी जानकारी के लिए
https://nalsa.gov.in
और
https://www.india.gov.in
पर भी विवरण उपलब्ध है।
सुलह से न्याय की परंपरा
भारत में लोक अदालत की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। इसका उद्देश्य लोगों को तेज, सस्ता और सरल न्याय उपलब्ध कराना है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन में देशभर में समय-समय पर राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाता है।
छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशन में दुर्ग जिले में भी इस आयोजन की तैयारी कई सप्ताह पहले से शुरू हो गई थी।
इस बार लोक अदालत में तकनीक का भी प्रभावी उपयोग किया गया। दूरस्थ क्षेत्रों के पक्षकार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।
इसके अलावा मोबाइल जागरूकता वैन के माध्यम से वृद्ध और बीमार पक्षकारों को घर से ही लोक अदालत की प्रक्रिया से जोड़ा गया। इससे न्याय प्रक्रिया और अधिक सुलभ बनी।
Key Facts: National Lok Adalat
- कुल 39 पीठों का गठन किया गया
- 10,13,826 मामलों को समझौते के लिए रखा गया
- 10,13,730 मामलों का सफल समाधान
- लगभग 49.60 करोड़ रुपये की समझौता राशि
- परिवार न्यायालय में काउंसलिंग से कई जोड़े फिर साथ आए
National Lok Adalat का प्रभाव समाज के कई स्तरों पर देखने को मिला। कई वर्षों से लंबित मामलों का समाधान होने से पक्षकारों को राहत मिली।
परिवार न्यायालय में काउंसलिंग के माध्यम से कई बिछड़े हुए जोड़ों ने फिर साथ रहने का फैसला किया। यह सामाजिक सौहार्द की दिशा में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
मोटर दुर्घटना दावा मामलों में भी पीड़ितों को राहत मिली। वहीं बैंक, बिजली और दूरसंचार से जुड़े कई मामलों को प्री-लिटिगेशन स्तर पर ही सुलझा लिया गया।
कार्यक्रम के दौरान समाजसेवी संस्था द्वारा निःशुल्क लंगर की व्यवस्था भी की गई। इसके साथ ही केंद्रीय जेल दुर्ग के बंदियों द्वारा बनाए गए उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई।
कुल मिलाकर National Lok Adalat ने दुर्ग जिले में न्याय व्यवस्था के प्रति लोगों का विश्वास और मजबूत किया है। लाखों मामलों का समाधान होने से न केवल न्यायालयों का बोझ कम हुआ बल्कि लोगों को त्वरित न्याय भी मिला। तकनीक, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामाजिक भागीदारी ने इस आयोजन को और प्रभावी बनाया। भविष्य में भी National Lok Adalat न्याय प्रणाली को अधिक सुलभ और जनहितकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
