मंदिर हसौद के ग्राम नकटा में अवैध प्लाटिंग फिर शुरू, 200 से अधिक प्लॉट की रजिस्ट्री का आरोप; उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज

रायपुर से सटे नगर पालिका क्षेत्र मंदिर हसौद के ग्राम नकटा में Nakta illegal plotting का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासनिक कार्रवाई के बावजूद भू-माफियाओं ने दोबारा अवैध प्लाटिंग शुरू कर दी है। इतना ही नहीं, करीब 200 से अधिक प्लॉट की रजिस्ट्री तक कराई जा चुकी है।

गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि कुछ माह पहले भी इसी जमीन पर कार्रवाई की गई थी। उस समय प्रशासन ने सख्ती दिखाई, लेकिन अब हालात फिर पहले जैसे होते नजर आ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है।


बिना अनुमति विकसित हो रही कॉलोनी

शिकायत के अनुसार खसरा नंबर 894/1, 894/4, 894/5, 896 सहित अन्य जमीनों पर बिना वैधानिक अनुमति सड़क बनाकर कॉलोनी विकसित की जा रही है। Nakta illegal plotting के तहत जमीन पर कैनोपी लगाकर खुलेआम प्लॉट बिक्री की जा रही है।

ग्रामीणों का दावा है कि:

  • ग्राम एवं नगर निवेश विभाग से लेआउट स्वीकृत नहीं कराया गया।
  • रेरा (RERA) में पंजीयन नहीं कराया गया।
  • न ही कॉलोनी का नक्शा पास कराया गया।

इसके बावजूद जमीन की खरीद-फरोख्त जारी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते रोक नहीं लगी तो भविष्य में यहां रहने वाले परिवार बुनियादी सुविधाओं से वंचित रह सकते हैं।


प्रशासनिक कार्रवाई पर उठे सवाल

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पहले भी शिकायत की गई थी। उस दौरान प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर कुछ कार्रवाई की, लेकिन अब दोबारा वही गतिविधियां शुरू हो गई हैं।

यही कारण है कि Nakta illegal plotting को लेकर अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कुछ लोगों ने इसे “संरक्षण” का मामला बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

गांव की एक महिला ने बताया,
“हमने सोचा था कार्रवाई के बाद यह सब बंद हो जाएगा। लेकिन अब फिर से प्लॉट काटे जा रहे हैं। हमें डर है कि आने वाले समय में यहां विवाद और बढ़ेगा।”


200 से अधिक प्लॉट की रजिस्ट्री का दावा

स्थानीय सूत्रों के अनुसार अब तक 200 से अधिक प्लॉट की रजिस्ट्री कराई जा चुकी है। यदि यह सही है, तो यह मामला और गंभीर हो सकता है। बिना अनुमति विकसित कॉलोनियों में भविष्य में सड़क, नाली, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं को लेकर अक्सर विवाद उत्पन्न होते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि बिना स्वीकृति प्लॉट खरीदने वाले खरीदारों को भी सावधान रहना चाहिए। क्योंकि बाद में ऐसे मामलों में कानूनी उलझनें सामने आ सकती हैं।


उच्च स्तरीय जांच की मांग

ग्रामीणों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि Nakta illegal plotting पर समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो इससे अन्य क्षेत्रों में भी अवैध प्लाटिंग को बढ़ावा मिल सकता है।

अब देखना यह है कि संबंधित विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है। फिलहाल ग्राम नकटा में यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है और लोगों की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।


मंदिर हसौद के ग्राम नकटा में Nakta illegal plotting का मामला केवल एक जमीन विवाद नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का प्रश्न बन गया है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो सख्त कार्रवाई आवश्यक होगी। वहीं आम नागरिकों के लिए भी यह एक चेतावनी है कि किसी भी प्लॉट को खरीदने से पहले वैधानिक स्वीकृतियों की पूरी जांच अवश्य करें।