Kosala Flagship Store: नई दिल्ली में ऐतिहासिक शुरुआत

Kosala Flagship Store ने देश की राजधानी नई दिल्ली में एक नई और प्रेरणादायक कहानी लिख दी है। ग्रेटर कैलाश (एन ब्लॉक) में खुले इस भव्य स्टोर के साथ छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कोसा सिल्क कला को राष्ट्रीय मंच मिल गया है।

यह पहल Hindalco Industries Limited की सामाजिक पहल ‘कोसाला’ के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य छत्तीसगढ़ के देवानगन समुदाय की प्राचीन कोसा बुनाई कला को पुनर्जीवित करना और कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाना है।


गरिमामय उद्घाटन, मजबूत संदेश

Kosala Flagship Store का उद्घाटन Rajashree Birla ने किया। इस अवसर पर Satish Pai, Saurabh Khedekar और अभिनेत्री Yami Gautam Dhar भी उपस्थित रहीं।

राजश्री बिरला ने कहा कि कोसाला केवल एक ब्रांड नहीं, बल्कि “ट्रस्टीशिप” की भावना का प्रतीक है। यह पहल ग्रामीण कारीगरों को सम्मानजनक आजीविका और नई पहचान दे रही है।


जड़ों से जुड़ी, भविष्य से प्रेरित पहल

Kosala Flagship Store की कहानी केवल एक रिटेल विस्तार नहीं है। यह 5,000 वर्ष पुरानी कोसा सिल्क परंपरा को आधुनिक फैशन से जोड़ने का प्रयास है।

वर्ष 2021 में शुरू हुई इस पहल ने आज एक मजबूत सामाजिक मॉडल का रूप ले लिया है। वित्तीय वर्ष 2025 में:

  • 31 बुनकर परिवारों को सालभर का स्थायी काम मिला
  • 130 कारीगर प्री-लूम और पोस्ट-लूम प्रक्रिया से जुड़े
  • पूर्णकालिक बुनकरों की आय में 63% की वृद्धि हुई
  • कुल 379 कारीगरों को रोजगार मिला
  • 100 नए कारीगरों को प्रशिक्षण दिया गया

अब तक 700 से अधिक कारीगर इस पहल से सशक्त हो चुके हैं।


महिलाओं और युवाओं को विशेष अवसर

Kosala Flagship Store केवल उत्पाद बेचने का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का माध्यम है।

  • 25 ग्रामीण युवाओं को प्राकृतिक रंगाई में प्रशिक्षित किया गया
  • 100 महिलाओं को सिलाई और कढ़ाई का कौशल दिया गया
  • 50 देवानगन महिलाओं को कोसा रीलिंग में प्रमाणन मिला
  • 25 कारीगरों को उन्नत बुनाई प्रशिक्षण प्रदान किया गया

साथ ही, “कोसाला शिल्प उन्नति योजना” के तहत उत्कृष्ट बुनकरों को वार्षिक प्रोत्साहन भी दिया जा रहा है।


परंपरा और आधुनिकता का संगम

Kosala Flagship Store में प्रदर्शित साड़ियाँ, दुपट्टे और परिधान पारंपरिक तकनीकों से बने हैं, लेकिन डिज़ाइन आधुनिक उपभोक्ता की पसंद को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं।

यह पहल छत्तीसगढ़ की ग्रामीण प्रतिभा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का सेतु बन रही है।


सामाजिक जिम्मेदारी से बाजार तक

कोसाला की स्थापना छत्तीसगढ़ में हिंदाल्को की सतत खनन पहल के हिस्से के रूप में की गई थी। आज यह एक स्केलेबल ग्रामीण उद्यम मॉडल बन चुका है, जो बाजार पहुंच, कौशल विकास और बुनियादी ढांचे को जोड़ता है।

इस तरह Kosala Flagship Store केवल एक दुकान नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में उठाया गया मजबूत कदम है।

नई दिल्ली में खुला Kosala Flagship Store छत्तीसगढ़ की मिट्टी से जुड़ी कला को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की ऐतिहासिक और सकारात्मक शुरुआत है। यह पहल दिखाती है कि जब उद्योग और समाज साथ चलते हैं, तो विकास केवल आर्थिक नहीं, बल्कि मानवीय भी होता है।

यह स्टोर ग्रामीण कौशल और वैश्विक प्रशंसा के बीच एक सशक्त पुल बन चुका है।

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