Jagdalpur News – छत्तीसगढ़ के Jagdalpur शहर से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) की नागपुर क्षेत्रीय इकाई (NaRU), मुंबई जोनल यूनिट ने 12 अप्रैल 2026 को जगदलपुर में एक अवैध वन्यजीव तस्करी सिंडिकेट का पर्दाफाश किया।
इस ऑपरेशन में अधिकारियों ने भारतीय पैंगोलिन के स्केल्स की अवैध खरीद-फरोख्त में शामिल तीन व्यक्तियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
यह कार्रवाई न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश में वन्यजीव सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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DRI NaRU ऑपरेशन की पूरी कहानी
Jagdalpur news: DRI की नागपुर क्षेत्रीय इकाई (NaRU) को खुफिया सूत्रों से जानकारी मिली थी कि Jagdalpur में भारतीय पैंगोलिन के स्केल्स की अवैध तस्करी हो रही है।
इस सूचना पर तत्काल कार्रवाई करते हुए DRI अधिकारियों ने एक सुनियोजित ऑपरेशन चलाया और तीन संदिग्धों को मौके पर ही दबोच लिया।
आरोपियों के पास से कुल 16.528 किलोग्राम भारतीय पैंगोलिन के स्केल्स बरामद किए गए।
जब्ती की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद DRI ने पकड़े गए तीनों व्यक्तियों और जब्त स्केल्स को Jagdalpur रेंज के वन रेंज अधिकारी को सौंप दिया, ताकि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत आगे की कार्रवाई की जा सके।
क्या है इंडियन पैंगोलिन और क्यों है यह खतरे में?
भारतीय पैंगोलिन (Manis crassicaudata) एक दुर्लभ और संकटग्रस्त स्तनधारी प्रजाति है, जो भारत के विभिन्न वन क्षेत्रों में पाई जाती है।
यह प्रजाति वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची I के अंतर्गत आती है, जो इसे कानूनी सुरक्षा का सर्वोच्च दर्जा प्रदान करती है।
पैंगोलिन के स्केल्स केराटिन से बने होते हैं – वही पदार्थ जो मानव नाखूनों में पाया जाता है।
बावजूद इसके, कुछ पारंपरिक दवाई बाजारों और लग्जरी फैशन उद्योग में इनकी मांग बेतहाशा है। तस्कर झूठे दावे करते हैं कि इन स्केल्स में औषधीय गुण होते हैं।
पैंगोलिन को दुनिया का सबसे ज़्यादा तस्करी होने वाला स्तनधारी जीव माना जाता है।
16.528 किलो स्केल्स की जब्ती – कितना बड़ा है यह मामला?
Jagdalpur News की इस कार्रवाई में बरामद 16.528 किलोग्राम पैंगोलिन स्केल्स अंतरराष्ट्रीय काले बाजार में लाखों रुपये की कीमत रखते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, एक पैंगोलिन का वजन औसतन 2 से 7 किलोग्राम के बीच होता है। इतनी बड़ी मात्रा में स्केल्स का मतलब है कि कई पैंगोलिनों का शिकार किया गया होगा।
यह मात्रा इस बात का संकेत है कि यह कोई छोटा-मोटा अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित और सुनियोजित तस्करी नेटवर्क का हिस्सा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में पैंगोलिन स्केल्स की कीमत प्रति किलोग्राम ₹50,000 से लेकर ₹1,00,000 से भी अधिक हो सकती है, जिससे इस जब्ती की कुल बाजार कीमत करोड़ों में आंकी जा सकती है।
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वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत कार्रवाई
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 भारत का प्रमुख कानून है जो जंगली जानवरों, पक्षियों और पौधों के संरक्षण का प्रावधान करता है।
इस अधिनियम की अनुसूची I में शामिल प्रजातियों का शिकार, व्यापार या किसी भी प्रकार का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है।
उल्लंघन पर कठोर दंड का प्रावधान है, जिसमें न्यूनतम 3 वर्ष से लेकर 7 वर्ष तक का कारावास और भारी जुर्माना शामिल है।
DRI द्वारा जब्ती के बाद मामले को वन रेंज अधिकारी को सौंपना यह दर्शाता है कि अब राज्य वन विभाग इस मामले में कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाएगा।
DRI NaRU की अब तक की बड़ी कार्रवाइयाँ – 2025 से अब तक
Jagdalpur News की यह कार्रवाई DRI NaRU की एक लंबी श्रृंखला की कड़ी है। वर्ष 2025 से अब तक DRI NaRU ने कई बड़े तस्करी नेटवर्क को ध्वस्त किया है:
| क्र. | स्थान | मामला |
|---|---|---|
| 1 | उज्जैन, मध्यप्रदेश | तेंदुए की खाल तस्करी सिंडिकेट |
| 2 | सिवनी, मध्यप्रदेश | बाघ शावक की हत्या और अंगों की तस्करी |
| 3 | भोपाल, मध्यप्रदेश | तेंदुए की खाल तस्करी |
| 4 | पिलेरू, आंध्रप्रदेश | पैंगोलिन स्केल तस्करी |
| 5 | जगदलपुर, छत्तीसगढ़ | पैंगोलिन स्केल तस्करी (वर्तमान) |
इन सभी कार्रवाइयों से स्पष्ट है कि DRI NaRU मध्य और दक्षिण भारत में वन्यजीव तस्करी के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा खोल चुकी है।
तस्करी के पीछे की अंतरराष्ट्रीय माँग
पैंगोलिन की तस्करी के पीछे मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय काला बाजार है।
दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों, विशेषकर चीन और वियतनाम में, पैंगोलिन के स्केल्स की भारी माँग रहती है। वहाँ इन्हें पारंपरिक चीनी दवाओं (Traditional Chinese Medicine – TCM) में उपयोग का झूठा दावा किया जाता है।
इसके अलावा, कुछ देशों में पैंगोलिन का मांस एक लग्जरी फूड आइटम माना जाता है, जो तस्करी को और बढ़ावा देता है।
वैज्ञानिक तथ्य यह है कि पैंगोलिन स्केल्स में कोई सिद्ध औषधीय गुण नहीं होता, फिर भी अंधविश्वास और परंपरा के नाम पर यह अवैध व्यापार जारी है।
छत्तीसगढ़ में वन्यजीव सुरक्षा की स्थिति
छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध जैव-विविधता के लिए जाना जाता है। राज्य में बस्तर और अन्य वन क्षेत्रों में दुर्लभ प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
Jagdalpur, जो बस्तर जिले का मुख्यालय है, वन क्षेत्रों से घिरा हुआ है। यही कारण है कि यह क्षेत्र तस्करों के लिए एक संभावित केंद्र बन सकता है।
राज्य के वन विभाग और केंद्रीय एजेंसियों का आपसी समन्वय इस प्रकार की कार्रवाइयों को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
Jagdalpur News की यह घटना यह भी दर्शाती है कि राज्य में वन्यजीव अपराध पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं और निरंतर निगरानी की जरूरत है।
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Jagdalpur News का यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि वन्यजीव तस्करी एक गंभीर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समस्या है, जिसके खिलाफ निरंतर और कठोर कार्रवाई जरूरी है।
DRI NaRU की इस सफल कार्रवाई ने छत्तीसगढ़ के Jagdalpur में एक सक्रिय तस्करी नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया है। 16.528 किलोग्राम पैंगोलिन स्केल्स की जब्ती और तीन आरोपियों की गिरफ्तारी यह संदेश देती है कि कानून की नजर से बचना संभव नहीं है।
यह कार्रवाई वन विभाग, DRI और अन्य प्रवर्तन एजेंसियों के आपसी समन्वय की मिसाल है।
आम नागरिकों से भी अपील है कि यदि उन्हें किसी वन्यजीव तस्करी की सूचना मिले, तो तत्काल वन विभाग या DRI को सूचित करें।
वन्यजीवों की रक्षा करना सिर्फ कानून की जिम्मेदारी नहीं, यह हम सभी का नैतिक कर्तव्य है।
