Green Cave Kanger Valley: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में स्थित कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान ने एक बार फिर अपनी प्राकृतिक समृद्धि से सबका ध्यान खींचा है। यहां एक अनोखी प्राकृतिक गुफा की खोज हुई है, जिसे “ग्रीन केव” नाम दिया गया है। यह खोज न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यटन के लिहाज से भी राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
पर्यटन मानचित्र में शामिल होगी ग्रीन केव
प्रदेश के वन मंत्री केदार कश्यप ने बताया कि ग्रीन केव को जल्द ही छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र में शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे क्षेत्र में स्थानीय रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।
उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि पर्यटक आने वाले समय में इस अद्भुत गुफा की प्राकृतिक सुंदरता को करीब से देख सकेंगे।
क्यों खास है ग्रीन केव
यह गुफा कोटुमसर क्षेत्र में स्थित है और इसका नाम इसकी दीवारों व छत पर मौजूद हरे रंग की सूक्ष्मजीवी परतों (Green Microbial Layers) के कारण पड़ा है।
चूना पत्थर (लाइमस्टोन) से बनी इस गुफा में लटकती हुई स्टैलेक्टाइट्स और दीवारों पर जमी हरी परतें इसे कांगेर घाटी की दुर्लभ और विशिष्ट गुफाओं में शामिल करती हैं।
गुफा के भीतर का दृश्य मंत्रमुग्ध करने वाला
ग्रीन केव तक पहुंचने का रास्ता बड़े-बड़े चट्टानी हिस्सों से होकर गुजरता है। जैसे ही पर्यटक अंदर प्रवेश करते हैं, हरी परतों से ढकी दीवारें उनका स्वागत करती हैं।
अंदर आगे बढ़ने पर एक विशाल कक्ष दिखाई देता है, जहां चमकदार स्टैलेक्टाइट्स और फ्लोस्टोन—पानी के प्रवाह से बनी पत्थर की परतें—गुफा की भव्यता को और बढ़ा देती हैं।
वन विभाग कर रहा संरक्षण
छत्तीसगढ़ वन विभाग ग्रीन केव की नियमित निगरानी और सुरक्षा कर रहा है। इस परियोजना का नेतृत्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख वी. श्रीनिवासन कर रहे हैं। वहीं प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) अरुण पांडेय ने इस खोज और संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इको-टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा
ग्रीन केव की खोज से कांगेर घाटी में इको-टूरिज्म को नया आयाम मिलने की उम्मीद है। यह पहल न केवल प्रकृति संरक्षण को बढ़ावा देगी, बल्कि स्थानीय समुदायों को आत्मनिर्भर बनाने में भी मददगार साबित होगी।
