रायपुर के तातिबंध में कागजों की योजनाएं, हकीकत में डर और बदहाली

housing scheme reality: सरकारें अक्सर यह दावा करती हैं कि हर जरूरतमंद को मुफ्त आवास उपलब्ध कराया जा रहा है,
लेकिन छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के तातिबंध इलाके में इन योजनाओं की हकीकत कुछ और ही कहानी कहती है।

जमीनी स्तर पर किए गए निरीक्षण और सामने आए दृश्य यह सवाल खड़ा करते हैं कि
क्या वाकई free housing scheme reality उतनी उजली है, जितनी सरकारी दस्तावेजों में दिखाई जाती है?

तातिबंध की तस्वीर: अधूरा सपना बनता आशियाना

तातिबंध क्षेत्र में जिन लोगों को मुफ्त आवास का लाभ मिलना था,
वे आज भी असुरक्षा, अव्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझते नजर आते हैं।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि—

  • मकान तो आवंटित हुए, लेकिन रहने लायक नहीं
  • कई जगह पानी, बिजली और सीवर की व्यवस्था अधूरी
  • जर्जर निर्माण के कारण हर समय हादसे का डर

एक महिला ने भावुक होकर कहा,

“छत तो मिली है, लेकिन चैन की नींद अब भी सपना है।”

लाभ सीमित, परेशानियां असीमित

मुफ्त आवास योजना का उद्देश्य गरीब और बेघर लोगों को सम्मानजनक जीवन देना था,
लेकिन तातिबंध में यह योजना लाभ से ज्यादा बोझ बनती दिखाई दे रही है।

Screenshot 2025 12 25 180323

यह भी सामने आया है कि—

  • कई पात्र लोग आज भी लाभ से वंचित हैं
  • कुछ को मकान मिले, लेकिन कानूनी और प्रशासनिक उलझनें खत्म नहीं हुईं
  • शिकायतों के बावजूद सुनवाई धीमी है

यही वजह है कि जनता के बीच असंतोष और निराशा बढ़ती जा रही है।

नीतियों की प्रभावशीलता पर सवाल

इस पूरे मामले ने एक अहम सवाल खड़ा कर दिया है—
क्या सिर्फ योजना बनाना और आंकड़े जारी करना ही काफी है?

विशेषज्ञों का मानना है कि
जब तक जमीनी निगरानी, गुणवत्ता नियंत्रण और जवाबदेही तय नहीं होगी,
तब तक ऐसी योजनाएं अपने मूल उद्देश्य से भटकती रहेंगी।

जागरूकता और जवाबदेही की जरूरत

इस जमीनी रिपोर्ट का उद्देश्य किसी पर आरोप लगाना नहीं,
बल्कि वास्तविक स्थिति को सामने लाना है, ताकि—

  • प्रशासन हालात की गंभीरता समझे
  • योजनाओं में सुधार हो
  • और जरूरतमंदों को सच में सम्मानजनक आवास मिल सके

क्योंकि घर सिर्फ चार दीवारें नहीं, बल्कि सुरक्षा और सम्मान का प्रतीक होता है