दुर्ग पुलिस बनी हाई-टेक: दो आधुनिक ड्रोन यूनिट से निगरानी और अपराध नियंत्रण में नया अध्याय

दुर्ग, 12 नवंबर 2025:
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले ने पुलिसिंग को स्मार्ट और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ी छलांग लगाई है। दुर्ग पुलिस लाइन में दो अत्याधुनिक ड्रोन का सफल परीक्षण किया गया, जिसके साथ जिले ने प्रदेश में अपनी पहली समर्पित ड्रोन यूनिट (Durg Police Drone Unit) शुरू करने का गौरव हासिल किया है।


📸 ड्रोन की खासियतें और क्षमताएं

ये दोनों ड्रोन छोटे और मध्यम श्रेणी के हैं, जिन्हें भीड़ नियंत्रण, निगरानी, यातायात मॉनिटरिंग, तलाशी अभियान और आपदा प्रबंधन जैसी परिस्थितियों में इस्तेमाल किया जाएगा।
इनमें लगे 4K रेजोल्यूशन कैमरे से ऊंचाई से भीड़ और गतिविधियों की स्पष्ट तस्वीर मिल सकेगी।
इनकी उड़ान क्षमता 25 से 55 मिनट तक है, जबकि लाइव वीडियो निगरानी सीमा 5 से 15 किलोमीटर तक जा सकती है।


🧠 आईजी रामगोपाल गर्ग बोले — “ड्रोन यूनिट अपराध नियंत्रण में गेम चेंजर”

दुर्ग रेंज के आईजी रामगोपाल गर्ग ने कहा कि ड्रोन यूनिट का उद्देश्य पुलिस को जमीनी स्तर पर और अधिक सक्षम बनाना है।

“इन ड्रोन की मदद से टीम भेजने से पहले ही हालात का आकलन किया जा सकेगा। इससे अपराध नियंत्रण, भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा निगरानी में बड़ा सुधार होगा।”

एसपी विजय अग्रवाल ने बताया कि यह कदम पुलिसिंग को आधुनिक रूप देने की दिशा में ऐतिहासिक साबित होगा। उन्होंने कहा कि अब दुर्ग पुलिस के पास ऐसी तकनीक है, जो हर मोर्चे पर तुरंत प्रतिक्रिया दे सकती है।

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🛰️ एंटी-ड्रोन तकनीक की भी ट्रेनिंग ली अफसरों ने

ड्रोन यूनिट के साथ-साथ दुर्ग पुलिस अफसरों ने एंटी-ड्रोन तकनीक की भी ट्रेनिंग ली है।
आईआईटी रोपड़ और बीपीआरडी द्वारा पंजाब में आयोजित इस प्रशिक्षण में आईजी रामगोपाल गर्ग, एसपी (दंतेवाड़ा) गौरव राय, कमांडेंट उदय किरण और एएसपी रोहित झा शामिल हुए।

इस ट्रेनिंग में संदिग्ध ड्रोन की पहचान, उसकी फ्रीक्वेंसी ट्रैक करना, नियंत्रण लिंक काटना और आवश्यकता पड़ने पर ड्रोन को निष्क्रिय करने की तकनीक सिखाई गई।
अधिकारियों का कहना है कि यह तकनीक नक्सल प्रभावित इलाकों में बेहद कारगर साबित होगी।

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🔍 आधुनिक तकनीक से बढ़ेगी जनता की सुरक्षा

ड्रोन यूनिट के जुड़ने से दुर्ग पुलिस अब शहर की निगरानी में नई ऊंचाइयां छूने को तैयार है। यह कदम न सिर्फ अपराध रोकथाम में मदद करेगा बल्कि आपदा और भीड़ नियंत्रण जैसे अभियानों में भी राहत देगा।
इससे दुर्ग पुलिस को स्मार्ट और हाई-टेक पुलिसिंग के मॉडल के रूप में पहचाना जाएगा।