Durg News: रुआबांधा कृषि संस्थान में RTI और जैव उर्वरक पर बड़ा प्रशिक्षण — 100 अधिकारियों को मिले अहम निर्देश, जानें 5 बड़ी बातें

Durg News — दुर्ग जिले के रुआबांधा स्थित क्षेत्रीय कृषि प्रसार एवं प्रशिक्षण संस्थान में एक महत्वपूर्ण संभाग स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस एकदिवसीय कार्यक्रम में दो अत्यंत प्रासंगिक विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया — सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 तथा हरी खाद, नील-हरी शैवाल एवं जैव उर्वरक

संभाग के सभी जिलों से आए लगभग 100 अधिकारी एवं कर्मचारी इस प्रशिक्षण में सम्मिलित हुए। यह कार्यक्रम शासन में पारदर्शिता और टिकाऊ कृषि — दोनों दिशाओं में एक साथ काम करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।


🏛️ Durg News: रुआबांधा में हुआ संभाग स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम

Durg News के अनुसार इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ के राज्य सूचना आयुक्त श्री शिरिष चंद्र मिश्रा रहे।

कार्यक्रम दो सत्रों में आयोजित किया गया। प्रथम सत्र में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया, जबकि द्वितीय सत्र में कृषि वैज्ञानिकों ने जैव उर्वरकों पर जागरूकता फैलाई।

यह आयोजन न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने की दृष्टि से बल्कि कृषि क्षेत्र में क्रांति लाने की दिशा में भी अत्यंत महत्वपूर्ण रहा।

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📋 राज्य सूचना आयुक्त ने क्या कहा — RTI पर 5 अहम निर्देश

Durg News में राज्य सूचना आयुक्त श्री शिरिष चंद्र मिश्रा के संबोधन की 5 सबसे महत्वपूर्ण बातें:

क्र.निर्देशविवरण
1पारदर्शिताRTI शासन में जवाबदेही का सशक्त माध्यम
2समय-सीमानिर्धारित समय में जानकारी देना अनिवार्य
3सजगताजनसूचना अधिकारी हमेशा सतर्क रहें
4जवाबदेहीप्रथम अपीलीय अधिकारी भी जिम्मेदार
5आवेदक हितनागरिकों को उनका अधिकार दिलाना सर्वोच्च प्राथमिकता

श्री मिश्रा ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने जनसूचना अधिकारियों और प्रथम अपीलीय अधिकारियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर जानकारी उपलब्ध कराने के लिए सदैव सजग रहने के स्पष्ट निर्देश दिए।

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💻 Durg News: ऑनलाइन RTI प्रक्रिया और संशोधित प्रावधानों की दी विस्तृत जानकारी

Durg News में प्रशिक्षण का एक अत्यंत उपयोगी हिस्सा रहा — ऑनलाइन RTI प्रक्रिया की जानकारी।

छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग की अवर सचिव श्रीमती गीता दीवान और मास्टर ट्रेनर श्री अतुल वर्मा ने पावर पॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से अधिकारियों को निम्नलिखित विषयों पर प्रशिक्षित किया:

  • सूचना प्रदाय की ऑनलाइन प्रक्रिया — कैसे करें आवेदन का निराकरण
  • शुल्क भुगतान की प्रक्रिया — ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके
  • अधिनियम के संशोधित प्रावधान — क्या बदला है और क्यों
  • समय-सीमा का पालन — 30 दिन की अनिवार्य बाध्यता

यह सत्र विशेष रूप से उन अधिकारियों के लिए उपयोगी रहा जो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर RTI आवेदनों का निराकरण करते हैं।


📁 रिकॉर्ड संधारण और आवेदन निराकरण पर जोर

संयुक्त संचालक कृषि श्रीमती गोपिका गबेल ने अधिकारियों को दो महत्वपूर्ण विषयों पर स्पष्ट निर्देश दिए।

पहला — रिकॉर्ड्स का व्यवस्थित संधारण करना अनिवार्य है। अव्यवस्थित रिकॉर्ड RTI आवेदनों के सही और समयबद्ध जवाब में बाधा बनते हैं।

दूसरा — आवेदनों का त्वरित निराकरण प्रत्येक अधिकारी की प्राथमिक जिम्मेदारी है। श्रीमती गबेल ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण अधिकारियों को अपनी जानकारी अपडेट करने और शंकाओं का समाधान पाने का बेहतर अवसर प्रदान करते हैं।

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🌿 Durg News: रासायनिक उर्वरकों का विकल्प — हरी खाद, नील-हरी शैवाल और जैव उर्वरक

प्रशिक्षण के द्वितीय सत्र में कृषि विज्ञान केंद्र पाहंदा के वैज्ञानिकों ने किसानों को रासायनिक उर्वरकों के हानिकारक प्रभावों और उनके प्राकृतिक विकल्पों के बारे में विस्तृत जानकारी दी।

Durg News के पाठकों के लिए यहां तीन प्रमुख जैव विकल्पों की जानकारी:

1. हरी खाद (Green Manure) हरी खाद मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने का सबसे सस्ता और प्रभावी तरीका है। ढैंचा, सनई जैसी फसलों को खेत में पलटकर मिट्टी में मिलाने से नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है।

2. नील-हरी शैवाल (Blue Green Algae) यह एक जैविक नाइट्रोजन स्थिरीकरण का बेहतरीन स्रोत है। धान के खेतों में इसका उपयोग रासायनिक खाद की आवश्यकता को काफी हद तक कम करता है।

3. जैव उर्वरक (Bio Fertilizers) राइजोबियम, एज़ोस्पिरिलम, फॉस्फेट घोलक बैक्टीरिया जैसे जैव उर्वरक फसलों को प्राकृतिक तरीके से पोषण देते हैं और मिट्टी की दीर्घकालिक उत्पादकता बनाए रखते हैं।


🌱 जीवामृत, बीजामृत और नैनो यूरिया — किसानों के लिए वरदान

Durg News में कृषि वैज्ञानिकों ने तीन और अत्यंत उपयोगी प्राकृतिक कृषि इनपुट की जानकारी दी:

उत्पादउपयोगलाभ
जीवामृतमिट्टी में डालेंमिट्टी के सूक्ष्म जीव सक्रिय होते हैं
बीजामृतबीज उपचारअंकुरण बेहतर, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है
नैनो यूरियापत्तियों पर छिड़कावरासायनिक यूरिया का 50% विकल्प

वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि जीवामृत, बीजामृत और नैनो यूरिया जैसे विकल्प फसलों की पोषक आवश्यकताओं को काफी हद तक पूरा कर सकते हैं और साथ ही उत्पादन लागत भी घटाते हैं।

यह जानकारी उन किसानों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो महंगे रासायनिक उर्वरकों के बोझ तले दबे हैं।

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🚜 विकसित कृषि संकल्प अभियान — गांव-गांव पहुंचेगी जैविक खेती की जानकारी

Durg News में सबसे महत्वपूर्ण निर्देश यह रहा कि संयुक्त संचालक कृषि श्रीमती गोपिका गबेल ने अधिकारियों को स्पष्ट आदेश दिए।

उन्होंने कहा कि आगामी “विकसित कृषि संकल्प अभियान” के दौरान इन वैकल्पिक खादों की उत्पादन तकनीक को गांव-गांव तक पहुंचाया जाए।

यह अभियान छत्तीसगढ़ के हर किसान तक जैविक और प्राकृतिक खेती का संदेश पहुंचाने का एक बड़ा प्रयास है। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी बल्कि मिट्टी की सेहत भी सुधरेगी और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा।


👥 कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख अधिकारी

इस संभाग स्तरीय प्रशिक्षण में निम्नलिखित प्रमुख अधिकारी उपस्थित रहे:

  • राज्य सूचना आयुक्त श्री शिरिष चंद्र मिश्रा (मुख्य अतिथि)
  • अवर सचिव, छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग श्रीमती गीता दीवान
  • मास्टर ट्रेनर श्री अतुल वर्मा
  • संयुक्त संचालक कृषि श्रीमती गोपिका गबेल
  • कृषि विज्ञान केंद्र पाहंदा के वैज्ञानिक
  • संभाग के सभी जिलों के लगभग 100 अधिकारी एवं कर्मचारी

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✅ निष्कर्ष

Durg News की यह रिपोर्ट बताती है कि दुर्ग के रुआबांधा में आयोजित यह संभाग स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम दो महत्वपूर्ण मोर्चों पर एक साथ काम करने का बेहतरीन उदाहरण है। एक ओर RTI अधिनियम के माध्यम से प्रशासनिक पारदर्शिता को मजबूत किया जा रहा है, तो दूसरी ओर जैव उर्वरकों के प्रचार-प्रसार से किसानों को रासायनिक खेती की निर्भरता से मुक्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है।

विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत यह जानकारी जब गांव-गांव तक पहुंचेगी, तो निश्चित रूप से दुर्ग संभाग के किसानों की आर्थिक स्थिति और खेतों की उत्पादकता दोनों में सुधार आएगा। Durg News पर नजर रखें — क्योंकि यहां हर खबर किसान, अधिकारी और आम नागरिक के हित से जुड़ी है।

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