अफीम कांड में सस्पेंड कृषि अधिकारी एकता साहू – संघ ने खोला मोर्चा, हड़ताल की दी चेतावनी

Durg News — छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद सामने आया है। समोदा गांव में एक BJP नेता के खेत में अफीम की अवैध खेती पकड़ाने के बाद जिला प्रशासन ने ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी एकता साहू को लापरवाही के आरोप में 14 मार्च को निलंबित कर दिया।

अब इस निलंबन के विरोध में छत्तीसगढ़ कृषि स्नातक शासकीय कृषि अधिकारी संघ ने मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को दुर्ग में संघ के बैनर तले कृषि अधिकारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया और एकता साहू के निलंबन को पूरी तरह गलत और अन्यायपूर्ण बताया।

संघ ने साफ चेतावनी दी है कि यदि एकता साहू की बहाली नहीं हुई तो अनिश्चितकालीन काम बंद हड़ताल की जाएगी, जिससे जिले का कृषि विभाग पूरी तरह ठप हो सकता है।

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🔴 14 मार्च को क्यों हुआ था निलंबन? – पूरा घटनाक्रम

इस पूरे मामले की शुरुआत 7 मार्च 2026 को हुई, जब जिला कृषि विभाग के अधिकारियों ने समोदा गांव में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत लगाए गए मक्का फसल प्रदर्शन प्लॉट का निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान तीन चौंकाने वाली बातें सामने आईं:

पहली: जिस खेत को मक्का प्रदर्शन प्लॉट बताया गया था, वहाँ मक्का की जगह धान की फसल लगी हुई थी।

दूसरी: कृषि मैप पोर्टल पर असली किसान की फोटो की जगह किसी अन्य व्यक्ति की फोटो अपलोड की गई थी — यह एक गंभीर दस्तावेज़ी गड़बड़ी थी।

तीसरी: प्रदर्शन प्लॉट पर कोई सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया था और सबसे अहम बात — प्लॉट के पास अफीम की अवैध फसल होने के बावजूद इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों को नहीं दी गई थी।

इन सभी बातों को गंभीर लापरवाही मानते हुए प्रशासन ने 14 मार्च को एकता साहू को निलंबित कर दिया। साथ ही पटवारी अनिता साहू और फसल सर्वेयर शशिकांत साहू को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।


🔴 Durg News: कृषि संघ ने क्यों कहा – निलंबन गलत है?

Durg News में यह मामला इसलिए और पेचीदा हो गया है क्योंकि कृषि अधिकारी संघ ने प्रशासन के निर्णय को सिरे से खारिज कर दिया है।

संघ के जिला अध्यक्ष अमित कुमार वर्मा ने कहा कि एकता साहू को जिस लापरवाही के आधार पर सस्पेंड किया गया है, वह पूरी तरह से एकतरफा और अनुचित है।

उनका तर्क है कि महकमे ने कभी भी मादक फसलों की पहचान या रिपोर्टिंग के संबंध में कृषि विस्तार अधिकारियों को कोई प्रशिक्षण या लिखित निर्देश नहीं दिया। बिना प्रशिक्षण और बिना निर्देश के किसी अधिकारी को दोषी ठहराना कहाँ तक उचित है — यह संघ का केंद्रीय सवाल है।


🔴 बिना अनुमति खेत में जाना अधिकारी का काम नहीं – संघ का तर्क

संघ के अनुसार, जहाँ अफीम की खेती हो रही थी, वह जमीन फेंसिंग और सुरक्षा घेरे के भीतर थी। उस स्थान तक बिना अनुमति पहुँचना न केवल व्यावहारिक रूप से असंभव था, बल्कि गेट पर बाउंसर भी तैनात थे।

अमित कुमार वर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा — “किसी भी निजी खेत में बिना अनुमति प्रवेश करना ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के कार्यक्षेत्र में शामिल नहीं है। एकता साहू से यह अपेक्षा करना कि वे बाउंसर-संरक्षित, फेंस-घिरे खेत में जाकर अफीम की खेती की जानकारी लें — यह पूरी तरह अव्यावहारिक है।”

यह तर्क प्रशासन की कार्रवाई पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) – कृषि मंत्रालय, भारत सरकार — RKVY योजना के दिशानिर्देश और प्रावधान।

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🔴 विभाग की ओर से कोई स्पष्ट निर्देश नहीं था – बड़ा खुलासा

Durg News में संघ ने एक और अहम खुलासा किया है — फसल प्रदर्शन के लिए बीज विभाग के पास उपलब्ध नहीं था।

दिसंबर की बैठक में किसानों को बीज खुद खरीदकर बिल देने का निर्देश दिया गया था। इसका मतलब यह है कि विभागीय व्यवस्था पहले से ही कमजोर थी और एकता साहू को स्पष्ट दिशानिर्देश दिए बिना काम करने के लिए कहा गया।

इसके अलावा संघ ने यह भी कहा कि:

  • ग्रीष्मकालीन धान की फसल को बदलने के लिए फसल प्रदर्शन देने का अधिकार कलेक्टर स्तर का नहीं होता।
  • सिंचाई की सुविधा होने पर ही किसान धान की फसल लेते हैं — यह एक स्थानीय कृषि वास्तविकता है।
  • विभाग की ओर से न कोई सामग्री दी गई, न स्पष्ट निर्देश — फिर भी एकता साहू को अकेले दोषी बनाया जा रहा है।

    छत्तीसगढ़ कृषि विभाग – आधिकारिक वेबसाइट — छत्तीसगढ़ में कृषि विभाग की नीतियाँ और अधिकारी दायित्व।

🔴 Durg News Alert: 22 मार्च की डेडलाइन और हड़ताल की चेतावनी

संघ ने प्रशासन को 22 मार्च 2026 तक का अल्टीमेटम दिया था। संघ ने चेतावनी दी थी कि यदि इस तिथि तक एकता साहू का निलंबन वापस नहीं लिया गया तो 23 मार्च से कृषि विभाग के मैदानी और कार्यालयीन अधिकारी एकसाथ काम बंद और कलम बंद हड़ताल पर चले जाएंगे।

यह Durg News इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रबी फसल कटाई और खरीफ की तैयारी के इस नाजुक दौर में कृषि अधिकारियों की हड़ताल जिले के हजारों किसानों को सीधे प्रभावित कर सकती है।

प्रश्न यह है कि प्रशासन ने 22 मार्च की डेडलाइन पर क्या कदम उठाया — यह अब भी स्पष्ट नहीं है और जांच का विषय बना हुआ है।


🔴 पटवारी और सर्वेयर को भी नोटिस – मामला कितना गहरा?

इस पूरे प्रकरण में केवल एकता साहू ही नहीं, बल्कि पटवारी अनिता साहू और फसल सर्वेयर शशिकांत साहू को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

इससे यह संकेत मिलता है कि यह मामला सिर्फ एक अधिकारी की लापरवाही तक सीमित नहीं है। जिस खेत में अफीम की खेती हो रही थी, वह BJP नेता का खेत बताया जा रहा है — ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या सरकारी अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव में कार्रवाई की जा रही है?

संघ ने इसी संदर्भ में कहा है कि एकता साहू को बलि का बकरा बनाया जा रहा है, जबकि असली जिम्मेदारी तय करने से प्रशासन बच रहा है।


🔴 निष्कर्ष

Durg News — दुर्ग जिले का यह मामला कई परतों वाला है। एक तरफ जिला प्रशासन का आरोप है कि एकता साहू ने अपनी ड्यूटी में लापरवाही बरती, वहीं दूसरी तरफ कृषि अधिकारी संघ का स्पष्ट कहना है कि बिना उचित प्रशिक्षण, संसाधन और निर्देश के किसी अधिकारी को दोषी ठहराना घोर अन्याय है।

इस Durg News ने यह भी उजागर किया है कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत जमीनी स्तर पर किस तरह की खामियां और अव्यवस्था है। एकता साहू की बहाली और इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच अब वक्त की माँग है — ताकि असली दोषियों को सजा मिले और बेकसूर अधिकारी को न्याय।

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