Durg News — जिला न्यायालय परिसर, दुर्ग में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत ने एक ऐतिहासिक मिसाल कायम की। इस एक दिवसीय आयोजन में 10 लाख से अधिक मामले निपटाए गए और ₹49.60 करोड़ से अधिक की राशि का समझौता हुआ।
इस आयोजन का उद्घाटन छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (SLSA) के संरक्षक-प्रमुख न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने किया। उनके साथ जिला दुर्ग के पोर्टफोलियो न्यायाधीश नरेश कुमार चंद्रवंशी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
यह आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA), दुर्ग के तत्वावधान में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार संपन्न हुआ।
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CJ रमेश सिन्हा ने किया उद्घाटन – लोक अदालत का महत्व बताया
मुख्य न्यायाधीश का प्रेरणादायक उद्बोधन
अपने उद्घाटन भाषण में न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने लोक अदालतों को त्वरित, सस्ती और सौहार्दपूर्ण विवाद निपटान की एक अत्यंत प्रभावशाली व्यवस्था बताया।
उन्होंने कहा कि लोक अदालत न केवल न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या घटाने में सहायक है, बल्कि यह सहभागी न्याय और सामाजिक सद्भाव की भावना को भी मूर्त रूप देती है।
मुख्य न्यायाधीश ने स्वैच्छिक समझौते की संस्कृति को प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री के. विनोद कुजूर ने मुख्य न्यायाधीश के आगमन पर आभार व्यक्त किया।
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Durg News: पंडवानी शैली में लोक अदालत जागरूकता गीत लॉन्च
छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति से जुड़ी अनोखी पहल
Durg News: एक अत्यंत रोचक और अनूठी पहल सामने आई। कार्यक्रम में पंडवानी शैली में रचित एक लोक अदालत जागरूकता थीम सॉन्ग का लोकार्पण किया गया।
पंडवानी छत्तीसगढ़ की एक प्राचीन एवं समृद्ध लोक कला परंपरा है, जिसे देश-विदेश में ख्याति प्राप्त है। इस थीम सॉन्ग का उद्देश्य ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में लोगों तक कानूनी जागरूकता सरल और प्रभावी तरीके से पहुंचाना है।
जिला बार एसोसिएशन के सदस्यों ने इस अवसर पर स्थानीय विषयों पर आधारित एक सजीव सांस्कृतिक प्रस्तुति दी, जिसे उपस्थित जन ने खूब सराहा। यह प्रयास कला और कहानी के माध्यम से न्याय के उद्देश्यों को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में एक सराहनीय कदम है।
चौंकाने वाला आंकड़ा – 10,13,730 मामले एक ही दिन में निपटाए
राष्ट्रीय लोक अदालत के रिकॉर्ड आंकड़े
यह आंकड़ा वाकई चौंकाने वाला है। इस राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 39 बेंचों का गठन किया गया, जिनके समक्ष 10,13,826 मामले रखे गए।
इनमें से 10,13,730 मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया गया। इसके अलावा 1,13,439 पूर्व-मुकदमेबाजी (Pre-Litigation) मामले भी आपसी सहमति से सुलझाए गए।
इन मामलों में कम्पाउंडेबल आपराधिक मामले, दीवानी विवाद, चेक अनादरण के मामले, वैवाहिक विवाद, मोटर दुर्घटना दावे और अन्य पूर्व-मुकदमेबाजी विवाद शामिल थे।
Durg News: ₹49.60 करोड़ का हुआ समझौता
मोटर दुर्घटना पीड़ितों को मिला तत्काल मुआवजा
Durg News के इस अध्याय में एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि इस लोक अदालत में निपटाए गए मामलों में ₹49,60,31,667 (लगभग ₹49.60 करोड़) की समझौता राशि प्रदान की गई।
59 मोटर दुर्घटना दावा मामलों का विशेष रूप से निपटारा किया गया, जिससे पीड़ित परिवारों को समय पर न्याय और मुआवजा मिल सका। वैवाहिक विवादों में काउंसलिंग के माध्यम से सुलह कराई गई, जो सामाजिक स्तर पर एक सकारात्मक कदम है।
यह राशि सिद्ध करती है कि लोक अदालत न केवल त्वरित न्याय का माध्यम है, बल्कि यह आर्थिक न्याय की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
39 बेंचें – भिलाई, पाटन, धमधा तक फैला न्याय का जाल
जिले के हर कोने तक पहुंची लोक अदालत
इस आयोजन की एक विशेषता यह रही कि यह केवल जिला न्यायालय तक सीमित नहीं रहा। परिवार न्यायालय, भिलाई-3, पाटन और धमधा के न्यायालयों में भी लोक अदालत की बेंचें गठित की गईं।
39 बेंचों के माध्यम से दुर्ग जिले के दूरदराज के क्षेत्रों तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित की गई। यह व्यापक भौगोलिक कवरेज DLSA दुर्ग की कुशल योजना और प्रशासनिक कौशल को दर्शाता है।
इससे छोटे कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों के वादकारियों को दूर शहर जाए बिना ही न्याय मिल सका, जो सुलभ न्याय की अवधारणा को साकार करता है।
Hybrid Proceedings – बुजुर्गों और दिव्यांगों को मिला न्याय घर बैठे
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई समावेशी सुनवाई
इस बार की Durg News में एक तकनीकी नवाचार भी सामने आया। लोक अदालत की कार्यवाही भौतिक और वर्चुअल दोनों माध्यमों से संचालित की गई।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए वे वादकारी जो व्यक्तिगत रूप से न्यायालय नहीं पहुंच सकते थे, उन्हें भी सुनवाई में भाग लेने का अवसर मिला।
मोबाइल आउटरीच पहल के अंतर्गत बुजुर्ग और शारीरिक रूप से अक्षम वादकारियों तक विशेष सुविधाएं पहुंचाई गईं। यह कदम न्याय प्रदायगी की प्रक्रिया में समावेशिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है।
सामाजिक पहल – स्वास्थ्य शिविर, जेल उत्पाद प्रदर्शनी और सामुदायिक रसोई
न्याय के साथ-साथ समाज सेवा भी
इस लोक अदालत का दायरा केवल कानूनी मामलों तक सीमित नहीं रहा। कार्यक्रम में सामुदायिक रसोई (Community Kitchen), जेल उत्पाद प्रदर्शनी और निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर जैसी सामाजिक पहलों का भी आयोजन किया गया।
जेल उत्पाद प्रदर्शनी ने कैदियों के पुनर्वास और उनके कौशल विकास को जनसमक्ष लाने का काम किया। यह पहल विधिक सेवा संस्थाओं की व्यापक सामाजिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर से आम नागरिकों को मुफ्त चिकित्सा परामर्श और जांच का लाभ मिला, जो समग्र न्याय की भावना को मूर्त रूप देता है।
विधि छात्रों को मिला व्यावहारिक अनुभव
भविष्य के वकीलों ने देखा न्याय का जीवंत रूप
विभिन्न विधि महाविद्यालयों के छात्रों ने इस लोक अदालत में भाग लिया और कार्यवाही का अवलोकन किया। उन्हें लोक अदालत की कार्यप्रणाली और न्यायपालिका की न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने की भूमिका के बारे में व्यावहारिक जानकारी मिली।
यह अनुभव छात्रों के लिए किसी पाठ्यपुस्तक से कहीं अधिक मूल्यवान है। जीवंत न्यायिक प्रक्रिया को देखकर वे वैकल्पिक विवाद निपटान (ADR) की व्यावहारिकता को बेहतर ढंग से समझ सके।
Durg News में यह राष्ट्रीय लोक अदालत एक मील का पत्थर साबित हुई है। 10 लाख से अधिक मामलों का निपटारा, ₹49.60 करोड़ का समझौता, पंडवानी थीम सॉन्ग, हाइब्रिड सुनवाई और सामाजिक पहलें — ये सब मिलकर इस आयोजन को केवल एक न्यायिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक जन आंदोलन का रूप देते हैं। DLSA दुर्ग और मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा के नेतृत्व में यह आयोजन Durg News के इतिहास में दर्ज हो गया है। यह सिद्ध करता है कि जब न्यायपालिका, प्रशासन और समाज एक साथ काम करें, तो त्वरित और सुलभ न्याय की परिकल्पना सच हो सकती है।
