Durg जिला न्यायालय में 11 अप्रैल 2026 को एक ऐतिहासिक न्यायिक आयोजन हुआ। छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी द्वारा दुर्ग संभाग के न्यायिक अधिकारियों के लिए एक दिवसीय संभागीय न्यायिक सेमीनार का आयोजन किया गया।
इस सेमीनार में दुर्ग संभाग के पाँच सिविल जिलों — दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, कवर्धा और राजनांदगांव — से कुल 120 न्यायिक अधिकारियों ने सहभागिता की।
दुर्ग में आयोजित यह सेमीनार नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और मध्यस्थता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित रहा। यह आयोजन छत्तीसगढ़ की न्यायपालिका के आधुनिकीकरण की दिशा में एक मजबूत कदम है।
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मुख्य न्यायाधिपति रमेश सिन्हा का उद्घाटन — न्याय के प्रकाश का प्रतीक
दुर्ग जिला न्यायालय में आयोजित इस सेमीनार के मुख्य अतिथि माननीय न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा, मुख्य न्यायाधिपति, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय एवं मुख्य संरक्षक, छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी थे।
उन्होंने न्याय एवं विधिक ज्ञान के प्रकाश का प्रतीक दीप प्रज्वलित कर सेमीनार का शुभारंभ किया। यह प्रतीकात्मक क्षण दुर्ग की न्यायिक यात्रा में एक नई रोशनी का संदेश लेकर आया।
सेमीनार में माननीय न्यायमूर्ति रजनी दुबे और माननीय न्यायमूर्ति रवीन्द्र कुमार अग्रवाल, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की भी गरिमामयी उपस्थिति रही, जिसने इस आयोजन को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया।
दुर्ग सेमीनार: नए आपराधिक कानूनों पर विशेष जोर
Durg सेमीनार में मुख्य न्यायाधिपति रमेश सिन्हा ने नव अधिनियमित आपराधिक कानूनों के महत्व पर विशेष बल दिया।
उन्होंने कहा कि ये नए कानून आपराधिक न्याय प्रणाली के आधुनिकीकरण की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम हैं। इनमें तकनीकी प्रगति का समावेश किया गया है और पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी गई है।
न्यायिक अधिकारियों को इन अधिनियमों का स्पष्ट और व्यावहारिक ज्ञान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया, ताकि Durg सहित पूरे संभाग में इनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।
धारा 138 — चेक बाउंस मामलों के त्वरित निराकरण पर जोर
Durg सेमीनार में परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के अंतर्गत प्रकरणों पर विशेष चर्चा हुई।
मुख्य न्यायाधिपति ने इन मामलों के शीघ्र निराकरण के लिए नवाचारी प्रकरण प्रबंधन तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उनका स्पष्ट संदेश था कि प्रक्रियात्मक निष्पक्षता बनाए रखते हुए लंबित प्रकरणों का प्रभावी निपटारा किया जाए।
यह निर्देश विशेष रूप से Durg जैसे व्यावसायिक जिले के लिए अत्यंत प्रासंगिक है जहां चेक बाउंस के मामले अधिक संख्या में होते हैं।
इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य (e-Evidence) — बदलते न्यायिक परिदृश्य पर चर्चा
Durg सेमीनार में मुख्य न्यायाधिपति ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य (e-Evidence) के बढ़ते महत्व पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने भारतीय साक्ष्य अधिनियम के अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों की ग्राह्यता पर प्रकाश डाला। डिजिटल युग में जब अपराध और विवाद तेजी से डिजिटल साक्ष्यों पर निर्भर हो रहे हैं, न्यायिक अधिकारियों का इस विषय में दक्ष होना अनिवार्य है।
सभी न्यायिक अधिकारियों को डिजिटल साक्ष्य से संबंधित वैधानिक प्रावधानों से पूरी तरह परिचित रहने की सलाह दी गई। Durg जिले में यह प्रशिक्षण न्यायिक गुणवत्ता को एक नई ऊंचाई देगा।
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मध्यस्थता 2.0 — Durg के लिए विशेष रणनीति मॉडल का विमोचन
Durg सेमीनार का सबसे ऐतिहासिक और निर्णायक क्षण था — “मध्यस्थता 2.0 — IAISAGR: दुर्ग के लिए मध्यस्थता रणनीति मॉडल” नामक विशेष प्रकाशन का विमोचन।
इस महत्वपूर्ण कृति का अनावरण मुख्य न्यायाधिपति रमेश सिन्हा के हाथों हुआ। यह प्रकाशन Durg संभाग में सौहार्दपूर्ण विवाद समाधान को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष रणनीतिक दस्तावेज है।
यह विमोचन न्यायपालिका की प्रगतिशील और विवाद-समाधानकारी सोच का प्रतीक बना। Durg के लिए अनुकूलित यह मध्यस्थता मॉडल न्यायालयों पर मुकदमों का बोझ कम करने में सहायक होगा।
Durg सेमीनार में प्रस्तुत किए गए 6 प्रमुख विधिक विषय
Durg सेमीनार में प्रतिभागी न्यायिक अधिकारियों ने निम्नलिखित 6 महत्वपूर्ण विधिक विषयों पर प्रस्तुतिकरण दिए —
पहला: आदेश 7 नियम 10 एवं नियम 11 — सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत न्यायालय की अधिकारिता और वादपत्र निरस्तीकरण की शक्ति।
दूसरा: निष्पादन प्रकरणों के शीघ्र निराकरण हेतु रणनीतियाँ, जिससे लंबित मामलों की संख्या घटाई जा सके।
तीसरा: धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम के प्रकरणों के निपटारे हेतु तकनीक एवं उपाय।
चौथा: धारा 351 BNSS के अंतर्गत अभियुक्त के परीक्षण का उद्देश्य, ग्राह्यता एवं साक्ष्य मूल्य।
पाँचवाँ: e-साक्ष्य का अवलोकन एवं धारा 63 के अंतर्गत उसके वैधानिक प्रावधान।
Durg में इन विषयों पर हुई गहन चर्चा से न्यायिक अधिकारियों को अपनी दैनिक कार्यप्रणाली में व्यावहारिक सुधार के लिए दिशा मिली।
रिफ्रेशर कोर्स — BNS और BNSS के प्रावधानों पर विस्तृत प्रशिक्षण
Durg सेमीनार में नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक विशेष रिफ्रेशर कोर्स का भी आयोजन किया गया।
जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश, चतुर्थ FTSC (POCSO), दुर्ग ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) के प्रावधानों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी, धमधा ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी। Durg के न्यायिक अधिकारियों के लिए यह प्रशिक्षण अत्यंत उपयोगी और व्यावहारिक रहा।
5 जिलों के 120 न्यायिक अधिकारियों की सहभागिता
Durg में आयोजित इस सेमीनार में संभाग के पाँच जिलों के न्यायिक अधिकारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, कवर्धा और राजनांदगांव जिलों के कुल 120 न्यायिक अधिकारी इस ज्ञान-वर्धक आयोजन में सम्मिलित हुए।
इसके अलावा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल और रजिस्ट्री के वरिष्ठ अधिकारीगण भी उपस्थित रहे। Durg में इतनी बड़ी संख्या में न्यायिक अधिकारियों का एकत्रित होना इस सेमीनार की व्यापकता और महत्व को दर्शाता है।
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न्यायपालिका की शक्ति — दक्षता, निष्पक्षता और प्रतिबद्धता
Durg सेमीनार में मुख्य न्यायाधिपति रमेश सिन्हा ने अपने उद्बोधन के अंत में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरक संदेश दिया।
उन्होंने कहा — “न्यायपालिका की शक्ति उसकी दक्षता, निष्पक्षता एवं न्याय के प्रति अटूट प्रतिबद्धता में निहित है।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि Durg सहित पूरे संभाग के न्यायिक अधिकारियों की भूमिका विधि के शासन को सुदृढ़ करने और जनता का विश्वास बनाए रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
निरंतर न्यायिक शिक्षा — समय की मांग
Durg के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने स्वागत भाषण में निरंतर न्यायिक शिक्षा और विचारों के आदान-प्रदान के महत्व को रेखांकित किया।
निदेशक निधि शर्मा तिवारी, छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी, बिलासपुर ने सेमीनार के उद्देश्यों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बदलते कानूनी परिदृश्य में क्षमता निर्माण की बढ़ती आवश्यकता पर बल दिया।
Durg बना छत्तीसगढ़ की न्यायिक प्रगति का केंद्र
Durg जिला न्यायालय में आयोजित यह संभागीय न्यायिक सेमीनार छत्तीसगढ़ की न्यायपालिका के आधुनिकीकरण और सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है।
120 न्यायिक अधिकारियों का एक साथ प्रशिक्षण, नए आपराधिक कानूनों पर गहन चर्चा, e-साक्ष्य पर जागरूकता और Durg के लिए विशेष मध्यस्थता 2.0 मॉडल का विमोचन — ये सभी मिलकर यह संदेश देते हैं कि Durg की न्यायपालिका आधुनिक चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार है।
मुख्य न्यायाधिपति रमेश सिन्हा का यह प्रयास Durg और पूरे छत्तीसगढ़ में त्वरित, निष्पक्ष और तकनीकी रूप से सक्षम न्याय व्यवस्था की नींव को और मजबूत करेगा।
