दुर्ग से अयोध्या धाम के लिए रवाना हुए श्रद्धालु, पर्यटन और शिक्षा मंत्री ने दिखाई हरी झंडी

दुर्ग, 03 सितम्बर 2025।
छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘श्री रामलला दर्शन (अयोध्या धाम) योजना’ के तहत आज दुर्ग जिले से श्रद्धालुओं का पहला जत्था अयोध्या धाम के लिए रवाना हुआ। दुर्ग रेलवे स्टेशन जय श्री राम के नारों से गूंज उठा, जब 185 रामभक्त स्पेशल ट्रेन से प्रभु श्रीराम के दर्शन के लिए प्रस्थान कर रहे थे।

भव्य विदाई का नज़ारा

दुर्ग रेलवे स्टेशन पर श्रद्धालुओं का स्वागत फूल-मालाओं, गाजे-बाजे और जयघोष के साथ किया गया। तत्पश्चात स्पेशल ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस अवसर पर पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मस्व मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव, अहिवारा विधायक श्री डोमनलाल कोर्सेवाड़ा, महापौर श्रीमती अलका बाघमार और जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सरस्वती बंजारे ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर श्रद्धालुओं को शुभकामनाओं के साथ विदा किया।

अयोध्या के लिए रवाना हुई यह ट्रेन पहले राजनांदगांव से निकलकर दुर्ग पहुंची, जहां श्रद्धालुओं की भावनाओं से सराबोर भीड़ उमड़ी।

यात्रियों के लिए विशेष व्यवस्था

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श्रद्धालुओं की यात्रा सुखद और सुविधाजनक बनाने के लिए प्रशासन ने भोजन, आवास और चिकित्सा सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की हैं। रवाना होते समय श्रद्धालुओं को जनसम्पर्क विभाग की मासिक पत्रिका ‘छत्तीसगढ़ जनमन’ की प्रतियां भी स्मृति स्वरूप भेंट की गईं।

जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहे मौजूद

इस अवसर पर कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री विजय अग्रवाल, जिला पंचायत सीईओ श्री बजरंग दुबे, नगर निगम दुर्ग आयुक्त श्री सुमीत अग्रवाल, संयुक्त कलेक्टर श्री हरवंश सिंह मिरी, डिप्टी कलेक्टर श्री हितेश पिस्दा एवं श्री उत्तम ध्रुव, जनपद सीईओ श्री रूपेश पाण्डेय, रेलवे विभाग के अधिकारी और अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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श्रद्धालुओं में उत्साह

रवाना होते समय श्रद्धालुओं के चेहरों पर उत्साह और आस्था झलक रही थी। कई वृद्ध श्रद्धालु भावुक हो उठे कि जीवन में पहली बार उन्हें श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या धाम जाने का अवसर मिल रहा है। महिलाएँ और युवा भी जयकारे लगाते हुए इस आध्यात्मिक यात्रा के लिए उत्सुक नजर आए।

यह आयोजन न केवल श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक अनुभव है, बल्कि छत्तीसगढ़ सरकार की उस प्रतिबद्धता का प्रतीक भी है, जिसमें संस्कृति और आस्था को राज्य की पहचान और गौरव से जोड़ा गया है।