दीदी के बखरी: कांकेर की 3364 महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर, मासिक आय ₹25 हजार तक पहुँचाने का लक्ष्य

उत्तर बस्तर, कांकेर (छत्तीसगढ़)। Didi ke Bakhri योजना ने उत्तर बस्तर कांकेर जिले की ग्रामीण महिलाओं के जीवन में एक क्रांतिकारी बदलाव लाना शुरू कर दिया है। बिहान योजना के तहत संचालित इस अभिनव कार्यक्रम के जरिए हजारों महिला किसान अब सब्जी बाड़ी, पोषण वाटिका, मुर्गी पालन, मछली पालन और वनोपज संग्रहण से न केवल अपने परिवार को पोषण दे रही हैं, बल्कि हर महीने हजारों रुपये की आमदनी भी कर रही हैं।


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🌿 दीदी के बखरी योजना क्या है?

“Didi ke Bakhri” एक एकीकृत कृषि आधारित आजीविका कार्यक्रम है, जो छत्तीसगढ़ राज्य की बिहान योजना के अंतर्गत उत्तर बस्तर कांकेर जिले में संचालित किया जा रहा है।

इस योजना का मूल उद्देश्य ग्रामीण महिला किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है। योजना के तहत प्रत्येक महिला को उसके घर की बखरी (बाड़ी) में व्यावसायिक स्तर पर खेती और पशुपालन की गतिविधियाँ संचालित करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है।

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, उत्तर बस्तर कांकेर के कुशल मार्गदर्शन में यह योजना जिले में सुचारु रूप से चल रही है। लक्ष्य है कि महिला किसानों की औसत मासिक आय ₹20,000 से ₹25,000 तक पहुँचाई जाए।

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📍 कांकेर जिले में कहाँ-कहाँ चल रही है यह योजना?

Didi ke Bakhri कार्यक्रम कांकेर जिले के चार विकासखंडों में संचालित है। प्रत्येक विकासखंड के अंतर्गत चार-चार गाँवों को इस योजना में शामिल किया गया है:

विकासखंडजुड़ी महिला किसानों की संख्या
नरहरपुर1200
कांकेर790
चारामा734
भानुप्रतापपुर640
कुल3364

यह योजना एकीकृत कृषि मॉडल पर आधारित है, जिसमें सब्जी उत्पादन, पशुपालन, मत्स्य पालन और वन संसाधनों के संग्रहण को एक साथ जोड़ा गया है।


👩‍🌾 3364 महिलाएं जुड़ी हैं दीदी के बखरी से

वर्तमान में कांकेर जिले में कुल 3364 महिला किसान इस योजना के तहत काम कर रही हैं। ये महिलाएं निम्नलिखित गतिविधियाँ कर रही हैं:

  • सब्जी बाड़ी: घर की बखरी में व्यावसायिक रूप से सब्जियाँ उगाकर बाजार में बिक्री।
  • पोषण वाटिका: परिवार के लिए हरी पत्तेदार सब्जियाँ, फल और कंदमूल उगाना।
  • मुर्गी पालन: कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाला व्यवसाय।
  • मछली पालन: तालाब और डबरी में मत्स्य पालन।
  • वनोपज संग्रहण: महुआ, इमली, शहद, लाख और जड़ी-बूटियों का संग्रहण और विक्रय।
  • बकरी पालन: पशुपालन के जरिए आय का अतिरिक्त स्रोत।
  • सूरजमुखी की खेती: नगदी फसल के रूप में।

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🌟 महिला किसानों की प्रेरणादायक कहानियाँ

Didi ke Bakhri योजना के तहत कई महिला किसान अपने जीवन में अभूतपूर्व बदलाव ला रही हैं। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने हाल ही में नरहरपुर, चारामा, भानुप्रतापपुर और कांकेर के विभिन्न गाँवों का दौरा कर इन महिलाओं से सीधे मुलाकात की और उनके कार्यों की जानकारी ली।


🥦 सुरेखा नेताम – ग्राफ्टेड सब्जी और मुर्गी पालन से बदली जिंदगी

नरहरपुर विकासखंड की सुदूर ग्राम पंचायत रावस और बांस पत्तर की महिला किसान सुरेखा नेताम ने अपनी बखरी में ग्राफ्टेड सब्जी-भाजी और मुर्गी पालन का कार्य शुरू किया है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने उनके बखरी का दौरा कर उनके कार्य की खुलकर प्रशंसा की।

सुरेखा ने बताया कि हरी पत्तेदार सब्जियाँ, कंदमूल और फल न केवल परिवार को पोषण देते हैं, बल्कि एनीमिया (खून की कमी) जैसी बीमारी को भी दूर करते हैं। बच्चों और माताओं को इनसे आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं। दीदी के बखरी की यह मॉडल बखरी आसपास की महिलाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गई है।


🌳 नामिका यादव – वनोपज संग्रहण से कमाई का नया रास्ता

ग्राम ठेमा की महिला किसान नामिका यादव वनोपज संग्रहण के साथ-साथ मुर्गी पालन और मछली पालन का कार्य भी कर रही हैं। मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने उनके कार्य की सराहना की।

नामिका ने बताया कि ग्रामीण और जनजातीय समुदाय महुआ, इमली, शहद, लाख और विभिन्न जड़ी-बूटियों का संग्रहण कर उन्हें बेचकर अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। वनोपज यहाँ के जंगलों में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है और यह महिलाओं की आय का एक टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल स्रोत है।


🐔🐟 मोतिन दर्रो – मुर्गी और मछली पालन का अनूठा प्रयोग

भानुप्रतापपुर विकासखंड के ग्राम हाटकर्रा की महिला मोतिन दर्रो ने एकीकृत खेती का एक बेहद सफल और अनूठा मॉडल अपनाया है। वे मुर्गी पालन के साथ-साथ मछली पालन (Poultry-cum-Fish Farming) करती हैं।

मोतिन ने बताया कि इस मॉडल में मुर्गियों की बीट सीधे मछली का चारा बन जाती है, जिससे चारे की लागत लगभग शून्य हो जाती है और मुनाफा कई गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा वे बकरी पालन और सूरजमुखी की खेती भी करती हैं। यह मॉडल अब जिले की अन्य महिलाओं के लिए भी मिसाल बन रहा है।


💧 जमुना कोर्राम – आजीविका डबरी से नई उम्मीद

ग्राम धनेली की महिला जमुना कोर्राम से मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने आजीविका डबरी (तालाब) से संबंधित जानकारी ली। डबरी के माध्यम से मछली पालन से ये महिला न केवल पारिवारिक प्रोटीन की जरूरत पूरी कर रही हैं, बल्कि बाजार में मछली बेचकर नियमित आमदनी भी कर रही हैं।

ग्राम कठोली की दीदी से चर्चा के दौरान मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने उनकी औसत मासिक आय की जानकारी ली और उन्हें और अधिक उत्साह से काम करने के लिए प्रोत्साहित किया।


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🎯 2026-27 में 10,780 महिलाओं को जोड़ने का लक्ष्य

Didi ke Bakhri योजना की सफलता को देखते हुए जिला प्रशासन ने वित्त वर्ष 2026-27 में इस योजना का व्यापक विस्तार करने का निर्णय लिया है। इस वर्ष 10,780 महिलाओं को योजना से जोड़ने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।

इन महिलाओं को आवश्यक सहयोग प्रदान करके उनकी आय में वृद्धि का प्रयास किया जाएगा। योजना का अंतिम लक्ष्य है कि प्रत्येक लाभार्थी महिला किसान की मासिक आय ₹20,000 से ₹25,000 के बीच पहुँचे, जो अभी औसत ग्रामीण मजदूरी से कई गुना अधिक है।


🏪 आजीविका सेवा केंद्र: दीदियों द्वारा, दीदियों के लिए

Didi ke Bakhri योजना को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए जिले के सभी क्लस्टर स्तरों पर आजीविका सेवा केंद्र खोले जा रहे हैं। इन केंद्रों की सबसे खास बात यह है कि इन्हें दीदियों द्वारा ही संचालित किया जाएगा।

इन सेवा केंद्रों के माध्यम से महिला किसानों को निम्नलिखित सुविधाएं मिलेंगी:

  • उन्नत और प्रमाणित बीज
  • आधुनिक कृषि उपकरण
  • जैविक और रासायनिक खाद
  • तकनीकी प्रशिक्षण और मार्गदर्शन

यह व्यवस्था महिलाओं को न केवल उत्पादक बनाएगी बल्कि उन्हें उद्यमी की भूमिका में भी स्थापित करेगी। एक दीदी दूसरी दीदी की मदद करेगी, यही इस मॉडल की असली शक्ति है।


💪 Didi ke Bakhri योजना का महत्व और उज्ज्वल भविष्य

Didi ke Bakhri योजना ग्रामीण भारत में महिला सशक्तिकरण का एक जीवंत उदाहरण बन रही है। यह योजना एकसाथ कई लक्ष्यों को साध रही है:

  • पोषण सुरक्षा: ताजी सब्जियाँ, मछली, मुर्गी और फल परिवार को संतुलित आहार दे रहे हैं।
  • आर्थिक स्वतंत्रता: महिलाएं अब अपने खर्चों के लिए किसी पर निर्भर नहीं।
  • पर्यावरण संरक्षण: वनोपज संग्रहण से जंगल का टिकाऊ उपयोग।
  • सामाजिक बदलाव: एक सफल दीदी को देखकर दूसरी दीदियाँ भी जागरूक हो रही हैं।

यह योजना साबित करती है कि जब प्रशासन, योजना और महिलाओं की मेहनत एकसाथ आती है, तो बदलाव अवश्य होता है। कांकेर जिले की ये साहसी और मेहनती दीदियाँ न केवल अपने परिवार का भविष्य सँवार रही हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र की महिलाओं के लिए एक नई राह बना रही हैं।

Didi ke Bakhri योजना छत्तीसगढ़ के उत्तर बस्तर क्षेत्र के विकास की कहानी को एक नया अध्याय दे रही है और आने वाले वर्षों में यह कार्यक्रम लाखों महिलाओं की जिंदगी बदलने की क्षमता रखता है।

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