CSVTU News इन दिनों छत्तीसगढ़ में एक बड़े विवाद का केंद्र बन गई है। छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (CSVTU) में 65 वर्ष या उससे अधिक आयु के सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारियों को वरिष्ठ सलाहकार के पद पर दोबारा नियुक्त किया गया है।
यह नियुक्ति उस समय हुई जब राज्य में शिक्षित बेरोज़गार युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है और उन्हें रोजगार के अवसरों का बेसब्री से इंतजार है। इस खुलासे ने पूरे छत्तीसगढ़ में रोजगार नीति की पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
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🔍 कौन हैं ये वरिष्ठ सलाहकार और कैसे हुई नियुक्ति?
CSVTU News के अनुसार, इन वरिष्ठ सलाहकारों को पूर्व कुलपति के संरक्षण में नियुक्त किया गया था। ये अधिकारी पहले किसी न किसी सरकारी विभाग से सेवानिवृत्त हो चुके हैं और उनकी आयु 65 वर्ष या उससे अधिक है।
यह नियुक्ति किसी खुली भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से नहीं, बल्कि पूर्व कुलपति के व्यक्तिगत संरक्षण के तहत की गई बताई जा रही है। इससे यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है कि क्या यह नियुक्ति नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार की गई है?
राज्य में इस तरह की नियुक्तियों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं, लेकिन CSVTU के मामले ने इसे एक नया और गंभीर मोड़ दे दिया है।
💰 CSVTU News: पेंशन के ऊपर अतिरिक्त वेतन — दोहरा फायदा, दोहरा नुकसान
यह मामला इसलिए और भी चौंकाने वाला है क्योंकि ये वरिष्ठ सलाहकार पहले से पेंशन प्राप्त कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार स्थिति कुछ इस प्रकार है:
| स्रोत | राशि (प्रतिमाह) |
|---|---|
| पेंशन (पूर्व सरकारी सेवा से) | ₹1 लाख – ₹1.5 लाख |
| CSVTU से अतिरिक्त वेतन | ₹50,000 – ₹60,000 |
| कुल मासिक आय | ₹1.5 लाख – ₹2.1 लाख |
यानी एक ओर ये अधिकारी पेंशन के रूप में सरकारी खजाने से लाखों रुपये ले रहे हैं, वहीं दूसरी ओर CSVTU के बजट से भी अतिरिक्त वेतन का लाभ उठा रहे हैं।
इस दोहरे वेतन की व्यवस्था ने न केवल विश्वविद्यालय के वित्तीय बोझ को बढ़ाया है, बल्कि यह उन युवाओं के साथ घोर अन्याय भी है जिन्हें एक साधारण नौकरी के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है।
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👨🎓 युवाओं के अवसर कैसे हो रहे हैं बाधित?
CSVTU News का यह पहलू सबसे ज्यादा चिंताजनक है। छत्तीसगढ़ में आज हजारों युवा तकनीकी और प्रशासनिक योग्यता रखने के बावजूद बेरोजगार हैं।
इन युवाओं के पास है:
- आधुनिक कंप्यूटर और डिजिटल ज्ञान
- नई तकनीकों की समझ
- तेज काम करने की क्षमता और ऊर्जा
- उच्च शैक्षणिक योग्यता
लेकिन जब इन्हीं पदों पर सेवानिवृत्त अधिकारियों को बिठा दिया जाता है, तो युवाओं के लिए अवसर की खिड़की बंद हो जाती है। यह केवल एक विश्वविद्यालय की समस्या नहीं है — यह पूरी व्यवस्था की विफलता का संकेत है।
💻 तकनीकी दक्षता में युवा बनाम रिटायर्ड अधिकारी — कौन है ज्यादा काबिल?
CSVTU जैसे तकनीकी विश्वविद्यालय में आधुनिक प्रशासनिक दक्षता की आवश्यकता सर्वोच्च होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि 65 वर्ष से अधिक आयु के अधिकारी:
- नई तकनीक और डिजिटल प्रणालियों के साथ तालमेल बिठाने में कठिनाई अनुभव करते हैं
- तेज प्रशासनिक निर्णय लेने में युवाओं की तुलना में धीमे होते हैं
- आधुनिक शिक्षा नीतियों और NEP 2020 जैसे नए बदलावों को समझने में अधिक समय लगाते हैं
इसके विपरीत, एक युवा और योग्य अधिकारी कम वेतन में अधिक और बेहतर काम करने में सक्षम होता है। फिर भी उन्हें अवसर न देकर सेवानिवृत्त अधिकारियों को बनाए रखना प्रशासनिक दक्षता के साथ-साथ सामाजिक न्याय का भी मखौल है।
🗣️ CSVTU News: विशेषज्ञ और सामाजिक कार्यकर्ताओं की राय
इस मामले पर छत्तीसगढ़ के विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
उनका स्पष्ट मत है:
“किसी भी विभाग में एक बार सेवानिवृत्त हो जाने के बाद 62–65 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ अधिकारियों को दोबारा कार्य पर नहीं रखा जाना चाहिए।”
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह नीति युवाओं के साथ सीधा अन्याय है। जब देश युवाओं को आगे बढ़ाने की बात करता है, तो ऐसे संस्थानों में इस तरह की नियुक्तियां उस सोच के विपरीत हैं।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और स्किल इंडिया जैसे कार्यक्रम युवाओं को रोजगार देने पर जोर देते हैं। लेकिन जब तकनीकी विश्वविद्यालयों में ही ऐसी नियुक्तियां होंगी, तो यह नीतिगत विरोधाभास चिंताजनक है।
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🏛️ प्रशासन और सरकार की जिम्मेदारी — अब बदलाव जरूरी
CSVTU और राज्य शासन को इस मामले में तत्काल और ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
विशेषज्ञों की मांगें स्पष्ट हैं:
1. पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया अपनाई जाए किसी भी पद पर नियुक्ति खुली प्रतियोगिता और नियमों के आधार पर होनी चाहिए, न कि किसी के व्यक्तिगत संरक्षण में।
2. सेवानिवृत्त अधिकारियों की पुनर्नियुक्ति पर रोक लगे जो अधिकारी पहले से पेंशन ले रहे हैं, उन्हें सरकारी या अर्धसरकारी संस्थानों में अतिरिक्त वेतन पर नहीं रखा जाना चाहिए।
3. युवाओं को प्राथमिकता दी जाए तकनीकी विश्वविद्यालयों में योग्य, दक्ष और तकनीकी रूप से सक्षम युवाओं को पहले अवसर मिलना चाहिए।
4. जांच की मांग पूर्व कुलपति के संरक्षण में हुई इन नियुक्तियों की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए ताकि जिम्मेदारी तय हो सके।
CSVTU News — युवाओं का हक दिलाने के लिए नीति में बदलाव अनिवार्य
CSVTU News का यह मामला केवल एक विश्वविद्यालय की आंतरिक समस्या नहीं है — यह छत्तीसगढ़ में रोजगार नीति की उस कमजोरी को उजागर करता है जो शिक्षित और योग्य युवाओं को उनके हक से वंचित करती है।
जब तक CSVTU और राज्य शासन इस नीति पर पुनर्विचार नहीं करते और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया नहीं अपनाते, तब तक यह सवाल बना रहेगा कि आखिर “युवा शक्ति” के नारे कब सच्चाई में बदलेंगे।
पेंशन और अतिरिक्त वेतन पर बैठे वरिष्ठ सलाहकारों की जगह योग्य, ऊर्जावान और तकनीकी रूप से दक्ष युवाओं को दी जानी चाहिए — यही प्रशासनिक न्याय है, यही सामाजिक जिम्मेदारी है और यही CSVTU की असली जरूरत है।
