Chhattisgarh News: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा नोटिस

Chhattisgarh News: सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के एक विवादित आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया है। यह मामला एक प्रोबेशनरी कर्मचारी को LL.B के तीसरे वर्ष में नियमित छात्र के रूप में परीक्षा देने की अनुमति से जुड़ा है।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता शामिल हैं, ने 27 जनवरी के आदेश को चुनौती देने वाली स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया।

कोर्ट ने कहा कि इस तरह की अनुमति देने से प्रशासनिक अनुशासन, कार्यालय के कामकाज और सेवा नियमों के पालन पर प्रभाव पड़ सकता है

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मामले की पृष्ठभूमि क्या है?

इस Chhattisgarh News मामले की शुरुआत सितंबर 2022 में हुई थी, जब एक कर्मचारी को प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट और सेशन कोर्ट में असिस्टेंट ग्रेड-III के पद पर नियुक्त किया गया था।

नियुक्ति के दौरान कर्मचारी को तीन साल की प्रोबेशन अवधि में रखा गया था।

नियुक्ति की शर्तों में स्पष्ट लिखा था कि:

  • पहले वर्ष में
  • कार्यालय प्रमुख की पूर्व अनुमति के बिना
  • किसी भी उच्च शिक्षा में दाखिला नहीं लिया जा सकता।

इसके बावजूद कर्मचारी ने LL.B कोर्स के पहले और दूसरे वर्ष की पढ़ाई के लिए अधिकारी से अनुमति प्राप्त कर ली थी।


Chhattisgarh News: कर्मचारी की LL.B पढ़ाई पर विवाद

Chhattisgarh News में यह मामला तब और जटिल हो गया जब कर्मचारी ने LL.B के तीसरे वर्ष की परीक्षा में नियमित छात्र के रूप में बैठने की अनुमति मांगी।

लेकिन इस समय तक राज्य में छत्तीसगढ़ डिस्ट्रिक्ट ज्यूडिशियरी एस्टैब्लिशमेंट (भर्ती और सेवा शर्तें) कर्मचारी नियम, 2023 लागू हो चुके थे।

इन नियमों के अनुसार:

  • कोई भी कर्मचारी रेगुलर कैंडिडेट के रूप में किसी शैक्षणिक परीक्षा में शामिल नहीं हो सकता
  • केवल प्राइवेट या कॉरेस्पोंडेंस कैंडिडेट के रूप में पढ़ाई की अनुमति है
  • इसके लिए भी नियुक्ति अधिकारी की अनुमति आवश्यक है

इसी नियम के आधार पर नियुक्ति अधिकारी ने कर्मचारी की मांग को खारिज कर दिया


2023 के नए नियमों ने बदला पूरा मामला

Chhattisgarh News के इस विवाद में 2023 के नए सेवा नियम महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इन नियमों का उद्देश्य था:

  • सरकारी कर्मचारियों के कार्यालयीन कार्य में व्यवधान को रोकना
  • प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखना
  • कर्मचारियों की पढ़ाई को नियंत्रित और व्यवस्थित तरीके से अनुमति देना

इसलिए नियम 11 के तहत स्पष्ट किया गया कि कर्मचारी रेगुलर स्टूडेंट के रूप में पढ़ाई नहीं कर सकते

https://www.sci.gov.in/


हाईकोर्ट के सिंगल जज का फैसला

नियुक्ति अधिकारी के फैसले से असंतुष्ट होकर कर्मचारी ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

हाईकोर्ट के सिंगल जज ने याचिका को स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि कर्मचारी को LL.B तीसरे वर्ष की परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाए

सिंगल जज ने अपने फैसले में नियम 47 (Repeal and Savings Clause) का हवाला दिया।

इस प्रावधान के अनुसार:

  • 2023 के नियम लागू होने से पहले के आदेश और निर्देश
  • कुछ मामलों में प्रभावी रह सकते हैं

इसी आधार पर सिंगल जज ने माना कि इस मामले में 2023 के नए नियम लागू नहीं होंगे


डिवीजन बेंच ने क्यों रद्द किया आदेश

Chhattisgarh News के इस महत्वपूर्ण कानूनी विवाद में आगे बड़ा मोड़ तब आया जब अपीलकर्ताओं ने सिंगल जज के आदेश को डिवीजन बेंच में चुनौती दी।

डिवीजन बेंच में शामिल थे:

  • चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा
  • जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल

डिवीजन बेंच ने सिंगल जज के आदेश को रद्द कर दिया

कोर्ट ने कहा कि:

  • सेवा नियमों का पालन अनिवार्य है
  • प्रशासनिक अनुशासन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
  • कर्मचारियों को नियमों के दायरे में रहकर ही पढ़ाई करनी होगी

सुप्रीम कोर्ट की दखल से बढ़ी कानूनी बहस

अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है, जहां शीर्ष अदालत ने इस पर नोटिस जारी कर दिया है

इस Chhattisgarh News मामले से कई महत्वपूर्ण कानूनी सवाल सामने आए हैं:

  • क्या प्रोबेशनरी कर्मचारी नियमित छात्र के रूप में पढ़ाई कर सकता है?
  • क्या नए सेवा नियम पुराने मामलों पर लागू होंगे?
  • प्रशासनिक अनुशासन और शिक्षा के अधिकार में संतुलन कैसे बनाया जाए?

इन सवालों का अंतिम जवाब अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ही तय होगा।


Chhattisgarh News में सामने आया यह मामला केवल एक कर्मचारी की पढ़ाई से जुड़ा विवाद नहीं है, बल्कि यह सरकारी सेवा नियमों और कर्मचारियों के शिक्षा अधिकार के बीच संतुलन का महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद अब सभी की नजरें इस केस के अंतिम फैसले पर हैं। आने वाले समय में अदालत का निर्णय न केवल इस कर्मचारी बल्कि पूरे न्यायिक तंत्र में कार्यरत कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल बन सकता है।

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