Chhattisgarh News में एक गौरवशाली अध्याय जुड़ गया है। कांकेर जिले के छोटे से गांव माहुद, चारामा के रहने वाले चंद्रकांत यादव ने बस्तर संभाग के पहले राष्ट्रीय कबड्डी रेफरी बनने का ऐतिहासिक गौरव हासिल किया है।
यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे बस्तर अंचल और छत्तीसगढ़ के लिए एक बड़ी खुशखबरी है।
क्या है पूरा मामला?
Chhattisgarh News: एमेच्योर कबड्डी फेडरेशन ऑफ इंडिया (AKFI) ने 16 से 18 फरवरी 2026 तक मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में राष्ट्रीय रेफरी परीक्षा का आयोजन किया।
इस परीक्षा में छत्तीसगढ़ से कुल 60 स्टेट ऑफिशियल्स ने भाग लिया। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद इनमें से केवल 37 प्रतिभागियों को राष्ट्रीय स्तर के रेफरी के रूप में चुना गया।
चंद्रकांत यादव इन्हीं 37 भाग्यशाली और प्रतिभाशाली चयनित रेफरी में शामिल हैं, जो बस्तर संभाग से यह उपलब्धि पाने वाले पहले व्यक्ति बने हैं।
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Chhattisgarh News: भोपाल में हुई राष्ट्रीय रेफरी परीक्षा का विवरण
परीक्षा की संरचना और महत्व
यह राष्ट्रीय रेफरी परीक्षा एमेच्योर कबड्डी फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित की जाती है, जो देशभर में कबड्डी के संचालन और विकास के लिए शीर्ष संस्था है।
इस परीक्षा में उत्तीर्ण होने वाले रेफरी राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट में ऑफिशियल की भूमिका निभाने के योग्य हो जाते हैं। यह किसी भी कबड्डी ऑफिशियल के करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव होता है।
छत्तीसगढ़ का प्रदर्शन
छत्तीसगढ़ से 60 स्टेट ऑफिशियल्स ने इस परीक्षा में हिस्सा लिया। 37 का चयन यानी 61.6% सफलता दर — यह छत्तीसगढ़ के कबड्डी प्रशिक्षण की गुणवत्ता को दर्शाता है।
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चंद्रकांत यादव की ऐतिहासिक उपलब्धि
कौन हैं चंद्रकांत यादव?
चंद्रकांत यादव कांकेर जिले के ग्राम माहुद, चारामा के निवासी हैं। उनके पिता का नाम हेमलाल यादव है। एक छोटे से गांव से निकलकर राष्ट्रीय स्तर का रेफरी बनना किसी बड़े संघर्ष और मेहनत की कहानी से कम नहीं है।
बस्तर संभाग में पहली बार
चंद्रकांत यादव की यह सफलता इसलिए भी विशेष है क्योंकि वे बस्तर संभाग के पहले राष्ट्रीय कबड्डी रेफरी बने हैं। बस्तर एक आदिवासी बहुल और दूरदराज का क्षेत्र है, जहां से इस स्तर की उपलब्धि हासिल करना वाकई प्रशंसनीय है।
यह उपलब्धि बताती है कि प्रतिभा और लगन हो तो भौगोलिक दूरी कोई बाधा नहीं बन सकती।
Chhattisgarh News: परीक्षा में रहे ये दिग्गज पर्यवेक्षक
प्रो कबड्डी के टेक्निकल डायरेक्टर की मौजूदगी
इस राष्ट्रीय परीक्षा की विश्वसनीयता और महत्व का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि परीक्षा के दौरान प्रो कबड्डी लीग के टेक्निकल डायरेक्टर और इंटरनेशनल कोच तेज नारायण माधव पर्यवेक्षक के रूप में उपस्थित रहे।
तेलुगू टाइटन्स के मेंटोर भी रहे मौजूद
इसके अलावा तेलुगू टाइटन्स के मेंटोर और इंटरनेशनल कोच के. जगमोहन भी परीक्षा के पर्यवेक्षक के रूप में उपस्थित रहे।
इन दोनों अनुभवी और प्रतिष्ठित खेल विशेषज्ञों की देखरेख में परीक्षा का सफल और निष्पक्ष संचालन किया गया। इनकी उपस्थिति ने परीक्षा की गरिमा को और बढ़ाया।
बस्तर के युवाओं के लिए प्रेरणा बनी यह सफलता
चंद्रकांत यादव की यह सफलता बस्तर संभाग के युवा खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। यह साबित करती है कि सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है।
खेल विशेषज्ञ मानते हैं कि बस्तर जैसे इलाकों में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, बस सही मार्गदर्शन और अवसर की जरूरत होती है।
Chhattisgarh News में कबड्डी का बढ़ता दबदबा
राज्य में कबड्डी की बढ़ती लोकप्रियता
Chhattisgarh News में कबड्डी से जुड़ी उपलब्धियां लगातार सामने आ रही हैं। राज्य के खिलाड़ी और अधिकारी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं।
छत्तीसगढ़ कबड्डी संघ की मेहनत और राज्य सरकार के खेल प्रोत्साहन कार्यक्रमों के कारण यह संभव हो पा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों से उभर रही प्रतिभाएं
राज्य के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों से निकलकर युवा खिलाड़ी राष्ट्रीय मंच पर अपनी छाप छोड़ रहे हैं। चंद्रकांत यादव इसी कड़ी की एक चमकती हुई कड़ी हैं।
निष्कर्ष
Chhattisgarh News में यह खबर राज्य के खेल जगत के लिए एक सुनहरा पल है। कांकेर के छोटे से गांव माहुद से निकलकर चंद्रकांत यादव ने जो मुकाम हासिल किया है, वह हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखता है।
बस्तर संभाग के पहले राष्ट्रीय कबड्डी रेफरी के रूप में उनकी यह पहचान न केवल उनके परिवार का, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ का सिर गर्व से ऊंचा करती है। Chhattisgarh News में ऐसी उपलब्धियां राज्य की खेल संस्कृति को और मजबूत बनाती हैं।
