Chhattisgarh News, 29 मार्च 2026। रायपुर से एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। छत्तीसगढ़ सरकार ने आजीवन कारावास की सजा काट रहे 10 बंदियों को समय से पहले रिहाई की मंजूरी देकर उन्हें बड़ी राहत प्रदान की है।
राज्य दण्डादेश पुनर्विलोकन बोर्ड की सिफारिश पर यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। इन सभी बंदियों को सोमवार को जेल से रिहा किया जाएगा। ये सभी हत्या के मामलों में दोषी पाए गए थे और 14 साल से अधिक समय जेल में बिता चुके थे।
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🏛️ Chhattisgarh News: 10 बंदियों को मिली समय से पहले रिहाई
छत्तीसगढ़ सरकार का यह फैसला मानवीय दृष्टिकोण और न्याय की भावना को दर्शाता है। सभी 10 बंदी हत्या के मामलों में दोषी थे और लंबे समय से जेल में थे।
इनमें से 9 बंदियों को शर्तों के साथ और 1 बंदी को निःशर्त रिहाई दी गई है। यह फैसला राज्य दण्डादेश पुनर्विलोकन बोर्ड की सिफारिश के आधार पर लिया गया।
बंदियों का रिहाई स्थान इस प्रकार है:
- 🔷 केन्द्रीय जेल दुर्ग — 8 बंदी
- 🔷 केन्द्रीय जेल अंबिकापुर — 1 बंदी
- 🔷 केन्द्रीय जेल रायपुर — 1 बंदी (निःशर्त)
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📋 बोर्ड की बैठक में कैसे हुआ फैसला?
महानिदेशक जेल श्री हिमांशु गुप्ता (सदस्य सचिव) की ओर से 16 प्रकरण बोर्ड के समक्ष भेजे गए थे।
12 फरवरी 2026 को बोर्ड की बैठक में इन सभी प्रकरणों पर विस्तारपूर्वक विचार किया गया। बैठक में निम्नलिखित रिपोर्टों का गहन परीक्षण किया गया:
- ✅ संबंधित न्यायालय की रिपोर्ट
- ✅ जेल अधीक्षक की रिपोर्ट
- ✅ चिकित्सा अधिकारी की स्वास्थ्य संबंधी रिपोर्ट
- ✅ पुलिस अधीक्षक की आचरण रिपोर्ट
- ✅ जिला मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट
इन सभी रिपोर्टों, बंदियों के व्यवहार, आयु और जेल में बिताए गए समय का समग्र मूल्यांकन करने के बाद बोर्ड ने अपनी सिफारिश राज्य सरकार को भेजी।
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⚖️ Chhattisgarh News: 9 बंदियों को सशर्त रिहाई — क्या हैं शर्तें?
बोर्ड ने 9 मामलों में निर्धारित प्रारूप “स” के तहत शर्तों के अधीन समय से पहले रिहाई की सिफारिश की। राज्य सरकार ने इसे मंजूरी दे दी।
रिहाई की प्रमुख शर्तें:
- 📌 बंदियों को ₹50,000 का निजी मुचलका देना होगा
- 📌 शपथ पत्र देना होगा कि भविष्य में कोई अपराध नहीं किया जाएगा
- 📌 शर्तों का उल्लंघन होने पर रिहाई निरस्त कर दी जाएगी
- 📌 शर्तें तोड़ने पर शेष सजा जेल में भुगतनी होगी
ये शर्तें इसलिए लगाई गई हैं ताकि रिहा किए गए बंदी समाज में एक जिम्मेदार नागरिक की तरह जीवन व्यतीत करें और दोबारा किसी आपराधिक गतिविधि में संलिप्त न हों।

Do Follow Links:
- National Human Rights Commission India — भारत में कैदियों के अधिकार और मानवाधिकार संबंधी प्रावधानों की जानकारी के लिए
👥 दुर्ग और अंबिकापुर के बंदियों की सूची
सशर्त रिहाई पाने वाले 9 बंदियों की जानकारी इस प्रकार है:
🔴 केन्द्रीय जेल दुर्ग से रिहा होने वाले 8 बंदी:
| क्र. | बंदी का नाम |
|---|---|
| 1 | प्रेमलाल बंजारे |
| 2 | लोचन सतनामी |
| 3 | ओमप्रकाश पुरानिक |
| 4 | दलित कुमार |
| 5 | दगन उर्फ रामकुमार |
| 6 | कचरूराम लोधी |
| 7 | पीलूराम |
| 8 | (आठवें बंदी की जानकारी जुटाई जा रही है) |
🔵 केन्द्रीय जेल अंबिकापुर से:
- गोपाल कंवर — सशर्त रिहाई
ये सभी बंदी 14 वर्ष से अधिक समय जेल में बिता चुके थे। उनके अच्छे आचरण और सुधार की भावना को देखते हुए यह निर्णय लिया गया।
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🕊️ Chhattisgarh News: रायपुर के भागीरथी को मिली निःशर्त रिहाई
Chhattisgarh News में एक और मार्मिक पहलू यह है कि केन्द्रीय जेल रायपुर के बंदी भागीरथी उर्फ भागी को बिना किसी शर्त के रिहाई की मंजूरी दी गई है।
बोर्ड ने उनकी उम्र और जेल में बिताए गए लंबे समय को ध्यान में रखते हुए यह सिफारिश की। सरकार ने सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए इस सिफारिश को स्वीकृति प्रदान की।
यह निःशर्त रिहाई इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ सरकार बंदियों के पुनर्वास और मानवीय संवेदनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।
📜 जेल नियम 358 — क्या है यह महत्वपूर्ण प्रावधान?
जेल अधीक्षक श्री योगेश सिंह क्षत्री ने इस संदर्भ में महत्वपूर्ण जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि जेल नियम 358 के तहत जो कैदी:
- ✅ अच्छा व्यवहार बनाए रखते हैं
- ✅ अपनी तय सजा का बड़ा हिस्सा पूरा कर चुके होते हैं
उनके मामलों को अदालत, पुलिस अधीक्षक और जिला प्रशासन की राय के साथ जेल मुख्यालय भेजा जाता है।
इसके बाद राज्य दण्डादेश पुनर्विलोकन बोर्ड की सिफारिश पर सरकार उनकी शेष सजा को माफ कर सकती है। यह प्रावधान उन बंदियों को दूसरा जीवन जीने का अवसर देता है जो सच में सुधर चुके हैं।
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✅ निष्कर्ष
आज की यह Chhattisgarh News एक मानवीय और संवेदनशील निर्णय की कहानी है। छत्तीसगढ़ सरकार ने 10 आजीवन कारावास के बंदियों को समय से पहले रिहाई देकर यह साबित किया है कि न्याय व्यवस्था में सुधार और पुनर्वास की भावना सर्वोपरि है।
14 से अधिक वर्ष जेल में बिताने, अच्छा आचरण बनाए रखने और सुधार की इच्छाशक्ति दिखाने वाले इन बंदियों को एक नई शुरुआत का मौका मिला है। Chhattisgarh News के हर पाठक के लिए यह जानना जरूरी है कि हमारी न्याय व्यवस्था केवल दंड नहीं बल्कि सुधार और पुनर्वास में भी विश्वास रखती है।
