धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पास – 5 बड़े खुलासे जो आपको चौंका देंगे

Chhattisgarh News में गुरुवार 19 मार्च 2026 को एक ऐतिहासिक घटनाक्रम सामने आया जब छत्तीसगढ़ विधानसभा ने छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 (Chhattisgarh Dharm Swatantraya Vidheyak 2026) को पारित कर दिया। यह विधेयक जबरन, प्रलोभन, धोखाधड़ी या गलत बयानी के जरिए किए जाने वाले धर्मांतरण को रोकने के उद्देश्य से लाया गया है।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा द्वारा सदन में प्रस्तुत इस विधेयक को करीब पांच घंटे की चर्चा के बाद पारित किया गया। इस दौरान Congress विधायकों ने सदन का बहिष्कार किया।


विधेयक का परिचय – Chhattisgarh News की बड़ी खबर

यह विधेयक वर्ष 1968 के छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम की जगह लेगा, जिसे राज्य के 2000 में मध्य प्रदेश से अलग होने पर अपनाया गया था। नए विधेयक में कई ऐसे प्रावधान जोड़े गए हैं जो डिजिटल युग की चुनौतियों को ध्यान में रखते हैं।

नई व्यवस्था के अनुसार, सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक संचार माध्यमों के जरिए किए जाने वाले धर्मांतरण को भी इस कानून के दायरे में लाया गया है – जो इसे पुराने कानून से अलग और अधिक प्रासंगिक बनाता है।


विधेयक की मुख्य विशेषताएं (Key Highlights)

Chhattisgarh News में चर्चित यह विधेयक कई महत्वपूर्ण प्रावधान लेकर आया है:

सभी अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होंगे। इसका मतलब है कि पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तारी कर सकती है और आरोपी को जमानत मिलना आसान नहीं होगा।

पैतृक धर्म में वापसी को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा। यह प्रावधान उन लोगों के लिए राहतभरा है जो किसी दबाव में धर्म बदल चुके थे और अपने मूल धर्म में लौटना चाहते हैं।

“सामूहिक धर्मांतरण” की परिभाषा तय की गई है – एक ही आयोजन में दो या अधिक व्यक्तियों का धर्मांतरण “सामूहिक धर्मांतरण” कहलाएगा।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी लागू होगा कानून। सोशल मीडिया या इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से धर्मांतरण को प्रेरित करना भी अपराध की श्रेणी में आएगा।

धर्मांतरण प्रमाणपत्र नागरिकता या पहचान प्रमाण नहीं माने जाएंगे।

अनुमति मिलने के 90 दिनों के भीतर धर्मांतरण न होने पर आवेदन स्वतः रद्द हो जाएगा।

केवल विवाह धर्मांतरण का आधार नहीं होगा – विवाह के लिए किया गया धर्मांतरण या धर्मांतरण के लिए किया गया विवाह – दोनों को अमान्य माना जाएगा जब तक कानूनी प्रक्रिया का पालन न हो।

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Chhattisgarh News: दंड के प्रावधान क्या हैं?

यह विधेयक दंड के मामले में बेहद कड़ा है। Chhattisgarh News के इस अहम विधेयक में दंड के प्रावधान इस प्रकार हैं:

सामान्य उल्लंघन पर दंड

साधारण मामलों में न्यूनतम 7 साल और अधिकतम 10 साल कैद के साथ न्यूनतम ₹5 लाख का जुर्माना लगाया जाएगा।

विशेष श्रेणी के पीड़ितों के लिए कठोर दंड

नाबालिग, महिला, मानसिक रूप से विकलांग व्यक्ति, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग के व्यक्ति को निशाना बनाने पर 10 से 20 साल की जेल और न्यूनतम ₹10 लाख जुर्माना देना होगा।

सामूहिक धर्मांतरण पर दंड

सामूहिक धर्मांतरण के मामले में न्यूनतम 10 साल की जेल जो आजीवन कारावास तक बढ़ सकती है, साथ ही ₹25 लाख या उससे अधिक का जुर्माना लगाया जाएगा।

बार-बार अपराध करने पर

बार-बार अपराध दोहराने पर आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।

पीड़ितों को मुआवजा

गैरकानूनी धर्मांतरण के पीड़ितों को ₹10 लाख तक का मुआवजा दिया जाएगा – यह एक नई और राहतकारी व्यवस्था है।


Congress का बहिष्कार और सदन में माहौल

Chhattisgarh News के अनुसार, इस विधेयक पर करीब पांच घंटे लंबी बहस हुई। Congress विधायकों ने सदन का बहिष्कार किया, जिससे यह चर्चा एकतरफा रही।

विपक्ष के अनुपस्थित रहने के बावजूद सत्तारूढ़ पक्ष ने विधेयक को पारित करा लिया। कांग्रेस ने इस विधेयक को लेकर अपनी आपत्तियां पहले ही व्यक्त की थीं।


पुराने कानून से क्या बदला?

1968 का पुराना अधिनियम मध्य प्रदेश से लिया गया था और तकनीकी रूप से उस दौर की जरूरतों के अनुसार था। Chhattisgarh News के तहत नए विधेयक में इन अहम बदलावों को शामिल किया गया है:

डिजिटल माध्यमों से धर्मांतरण को अपराध माना जाना, सामूहिक धर्मांतरण की परिभाषा तय करना, और पीड़ितों को मुआवजे का प्रावधान जोड़ना – ये तीन सबसे बड़े परिवर्तन हैं।

पुराने कानून में नाबालिगों और महिलाओं को लेकर अलग से कठोर दंड का प्रावधान नहीं था, जो अब नए विधेयक में किया गया है।


Chhattisgarh News: जांच और अदालती प्रक्रिया

नए विधेयक के अनुसार इन मामलों की जांच उप निरीक्षक (Sub-Inspector) या उससे ऊपर के पद के पुलिस अधिकारी करेंगे। मामलों की सुनवाई विशेष नामित अदालतों में होगी।

धर्मांतरण कराने वाले धार्मिक कार्यकर्ताओं को पहले से सूचना देना अनिवार्य होगा और धर्मांतरण कराने वाले व्यक्ति को भी सक्षम प्राधिकारी को घोषणापत्र सौंपना होगा।

Chhattisgarh News में यह विधेयक एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक कदम है। छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 राज्य में जबरन धर्मांतरण के विरुद्ध एक कठोर कानूनी ढांचा तैयार करता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म से लेकर सामूहिक धर्मांतरण तक – हर मोर्चे पर इसमें सख्त प्रावधान किए गए हैं। पीड़ितों को ₹10 लाख तक मुआवजे का प्रावधान इस कानून को और अधिक न्यायसंगत बनाता है। यह Chhattisgarh News आने वाले समय में राज्य की राजनीति और समाज को गहरे स्तर पर प्रभावित करेगी।

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