Breaking News Chhattisgarh – छत्तीसगढ़ से एक बड़ी और राहत भरी खबर आई है। राजनांदगांव और कांकेर डिवीजन कमेटी के 6 माओवादियों ने 27 मार्च 2026 को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।
यह सरेंडर सरकार के लगातार चलाए जा रहे माओवाद-विरोधी अभियानों और पुनर्वास योजनाओं की बड़ी सफलता है। इन माओवादियों ने न केवल हथियार जमा किए, बल्कि मुख्यधारा में लौटने का फैसला लेकर एक नई ज़िंदगी की शुरुआत की है।
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कौन हैं ये 6 माओवादी? – पूरी लिस्ट
आत्मसमर्पण करने वाले सदस्यों में शामिल हैं:
- SCM मंगेश पड़ियामी (Mangesh Padiami)
- SCM गणेश विके (Ganesh Vike)
- SCM मंगली जुरी (Mangli Juri)
- SCM हिड्मे मरकाम (Hidme Markam)
- SCM राजे (Raje)
- PPCM सदस्य स्वरूपा उसेंडी (Swaroopa Usendi)
ये सभी सदस्य राजनांदगांव और कांकेर डिवीजन कमेटी के सक्रिय कैडर थे। इनके सरेंडर से इस क्षेत्र में माओवादी नेटवर्क को गहरा झटका लगा है।
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हथियार जमा – SLR और .303 राइफलें सौंपीं
आत्मसमर्पण के दौरान इन माओवादियों ने पुलिस को 1 SLR राइफल और 3 नग .303 राइफलें सौंपीं — कुल 4 हथियार जमा किए गए।
यह हथियार सरेंडर इस बात का प्रमाण है कि माओवादी संगठन का मनोबल टूट रहा है। जो लोग कभी इन हथियारों के दम पर सुरक्षाबलों से लोहा लेते थे, वे अब शांति का रास्ता चुन रहे हैं।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सरकारी पुनर्वास नीति के तहत इन सभी को आर्थिक सहायता और पुनर्वास का आश्वासन दिया गया है।
Breaking News Chhattisgarh: 26 माह में 2700+ सरेंडर का रिकॉर्ड
Breaking News Chhattisgarh – यह सरेंडर किसी एकाकी घटना नहीं, बल्कि एक बड़े सुरक्षा अभियान की निरंतर सफलता है।
पिछले 26 महीनों में छत्तीसगढ़, ओडिशा और पड़ोसी राज्यों में लगभग 2,700 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। यह आंकड़ा अपने आप में ऐतिहासिक है और सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ में वामपंथी उग्रवाद को समाप्त करने की जो समयसीमा घोषित की थी, यह आंकड़ा उसी दिशा में ठोस प्रगति की कहानी बयान करता है।
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सरकार की डेडलाइन – सिर्फ 5 दिन बचे
अधिकारियों ने बताया कि माओवादियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए सरकार ने जो डेडलाइन तय की है, उसमें अब केवल 5 दिन शेष हैं।
इस डेडलाइन की नज़दीकी के चलते और अधिक कैडरों के सरेंडर करने की उम्मीद जताई जा रही है। सुरक्षा बलों के लगातार दबाव और पुनर्वास के आकर्षक प्रावधानों ने माओवादी संगठन को भीतर से खोखला कर दिया है।
जो माओवादी अभी भी जंगलों में छुपे हैं, उनके सामने दो ही रास्ते हैं — सरेंडर करके नई ज़िंदगी शुरू करें, या ऑपरेशन के शिकार बनें।
कांकेर जिला हुआ नक्सल मुक्त – ऐतिहासिक उपलब्धि
Breaking News Chhattisgarh की सबसे बड़ी खबर यह है कि ताज़ा सरेंडर के बाद कांकेर जिले को अब नक्सल मुक्त घोषित कर दिया गया है।
यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। दशकों तक माओवादी हिंसा का दंश झेलने वाला कांकेर अब शांति की राह पर है। यहाँ के आदिवासी समुदाय अब बिना भय के विकास की ओर कदम बढ़ा सकेंगे।
स्थानीय प्रशासन और सुरक्षाबलों के संयुक्त प्रयासों ने यह संभव किया है।
पुनर्वास नीति – सरकार का बड़ा वादा
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति के तहत निम्न सुविधाएं दी जाती हैं:
- आर्थिक सहायता राशि (एकमुश्त और मासिक)
- कौशल विकास और रोज़गार के अवसर
- आवास सुविधा और परिवार की सुरक्षा
- बच्चों की शिक्षा के लिए विशेष प्रावधान
- कानूनी सहायता और केस रिव्यू की सुविधा
यह नीति माओवादियों को हिंसा छोड़कर सम्मानजनक जीवन जीने का एक वास्तविक मौका देती है। पुलिस ने सभी 6 आत्मसमर्पणकर्ताओं को इन योजनाओं की जानकारी देते हुए पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है।
Breaking News Chhattisgarh – राजनांदगांव और कांकेर के 6 माओवादियों का यह सरेंडर छत्तीसगढ़ में शांति की दिशा में एक और मजबूत कदम है। 26 महीनों में 2,700 से अधिक सरेंडर, 4 हथियार जमा, और कांकेर का नक्सल मुक्त होना — ये सब मिलकर एक ऐतिहासिक तस्वीर बनाते हैं।
सरकार की डेडलाइन, माओवाद-विरोधी अभियान और पुनर्वास नीति का यह त्रिभुज छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद के अंत की इबारत लिख रहा है। Breaking News Chhattisgarh पाठकों को इस ऐतिहासिक बदलाव की हर अपडेट देता रहेगा।
