Bilaspur News – छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक ही दिन दो अलग-अलग मामलों में स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार और नगर निगम पर कड़ा रुख अपनाया है। पहला मामला शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत कक्षा पहली में प्रवेश प्रक्रिया में हो रही भारी लापरवाही से जुड़ा है, जबकि दूसरा मामला बिलासपुर में गंदगी और अधूरे नाली निर्माण का है।
यह खबर न केवल बिलासपुर बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए बेहद अहम है, क्योंकि इससे हजारों बच्चों का भविष्य और लाखों नागरिकों का स्वास्थ्य सीधे प्रभावित हो रहा है।
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मुख्य बातें – एक नजर में
Bilaspur News के इस बड़े अपडेट की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
- मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनवाई की।
- RTE के 38,438 आवेदनों में से केवल 23,766 का सत्यापन हो पाया।
- 16,000 से अधिक आवेदन अभी भी लंबित हैं।
- 13 से 17 अप्रैल के बीच होने वाली लॉटरी प्रक्रिया खतरे में है।
- बिलासपुर के सिरगिट्टी क्षेत्र में डेढ़ महीने से नाली निर्माण अधूरा पड़ा है।
- हाईकोर्ट ने निगम आयुक्त को एक हफ्ते में काम पूरा करने का आदेश दिया।
Bilaspur News: हाईकोर्ट ने क्यों लिया स्वतः संज्ञान?
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर यह स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया। यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि RTE प्रवेश प्रक्रिया में नोडल प्राचार्यों की लापरवाही के चलते हजारों बच्चों का प्रवेश अटका हुआ है।
कोर्ट ने अवकाश के दिन विशेष सुनवाई कर यह संदेश दिया कि जन हित के मामलों में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राज्य सरकार से विस्तृत हलफनामा मांगा है।
RTE प्रवेश में लापरवाही – 16,000 से ज्यादा आवेदन लंबित
शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act 2009) के तहत गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में निःशुल्क प्रवेश दिलाना सरकार की जिम्मेदारी है। लेकिन इस बार की प्रक्रिया में भारी लापरवाही सामने आई है।
हाईकोर्ट में पेश आंकड़ों के अनुसार:
| विवरण | संख्या |
|---|---|
| कुल आवेदन | 38,438 |
| सत्यापित आवेदन | 23,766 |
| लंबित आवेदन | 16,000+ |
कई जिलों में सत्यापन की स्थिति बेहद खराब बताई गई है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि नोडल प्राचार्यों की धीमी कार्यप्रणाली पूरी प्रक्रिया को प्रभावित कर रही है।
यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब हम समझते हैं कि इन बच्चों के अभिभावक अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए इस सरकारी योजना पर निर्भर हैं।
लॉटरी प्रक्रिया पर खतरा – अभिभावकों की बढ़ी चिंता
हाईकोर्ट ने यह भी चिंता जताई कि यदि समय रहते सत्यापन पूरा नहीं हुआ तो 13 से 17 अप्रैल 2026 के बीच प्रस्तावित स्कूल आवंटन की लॉटरी प्रक्रिया भी प्रभावित होगी।
इससे हजारों अभिभावकों को अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ेगी और बच्चों का स्कूल में दाखिला और आगे खिंच सकता है। कोर्ट ने राज्य सरकार को अगली सुनवाई 8 अप्रैल 2026 तक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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Bilaspur News: बिलासपुर की बदहाल व्यवस्था पर हाईकोर्ट सख्त
Bilaspur News में दूसरा बड़ा मामला शहर की बदहाल सफाई व्यवस्था और नाली निर्माण से जुड़ा है। हाईकोर्ट ने एक न्यूज रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लेते हुए बिलासपुर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
कोर्ट ने अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई और यह स्पष्ट किया कि नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं देना निगम की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
सिरगिट्टी वार्ड 12 – डेढ़ महीने से अधूरा काम
यह मामला बिलासपुर के सिरगिट्टी क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 12 (बन्नाक मोहल्ला) का है। यहां करीब डेढ़ महीने पहले नाली निर्माण का काम शुरू हुआ था। ठेकेदार ने 10 फीट गहरी खुदाई की लेकिन उसके बाद काम बीच में ही रोक दिया।
इस खुदाई के दौरान पानी की पाइपलाइन भी क्षतिग्रस्त हो गई जिससे पूरे इलाके में जल आपूर्ति ठप हो गई। खुली खुदाई में गंदा पानी जमा होने लगा और क्षेत्र में जलभराव की स्थिति बन गई।
स्थानीय निवासियों को रोजाना इस गंदगी से होकर गुजरना पड़ रहा है। यह स्थिति न केवल असुविधाजनक है बल्कि सेहत के लिए भी बेहद खतरनाक है।
डेंगू का खतरा और प्रशासनिक लापरवाही
अधूरी नाली में जमा गंदे पानी से मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। स्थानीय लोगों को डेंगू, मलेरिया जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा सता रहा है।
हाईकोर्ट ने इसे प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन से खिलवाड़ किया जा रहा है। कोर्ट ने नगर निगम से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
हाईकोर्ट के 3 बड़े आदेश – एक हफ्ते में करना होगा काम पूरा
Bilaspur News में हाईकोर्ट ने बिलासपुर नगर निगम आयुक्त को निम्नलिखित तीन सख्त निर्देश दिए हैं:
आदेश 1 – नाली निर्माण पूरा करें एक सप्ताह के भीतर सिरगिट्टी वार्ड 12 में नाली निर्माण का काम पूरा किया जाए।
आदेश 2 – पाइपलाइन दुरुस्त और जल आपूर्ति बहाल करें क्षतिग्रस्त पाइपलाइन की मरम्मत कर जल आपूर्ति तत्काल बहाल की जाए।
आदेश 3 – सफाई और सैनिटाइजेशन अभियान चलाएं पूरे क्षेत्र में सफाई अभियान और सैनिटाइजेशन किया जाए, साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई की जाए।
अगली सुनवाई की तारीख
दोनों मामलों की अगली सुनवाई की तारीखें इस प्रकार हैं:
- RTE प्रवेश मामला – अगली सुनवाई 8 अप्रैल 2026
- बिलासपुर नाली/गंदगी मामला – अगली सुनवाई 9 अप्रैल 2026
नगर निगम आयुक्त को 9 अप्रैल की सुनवाई में व्यक्तिगत शपथपत्र के साथ की गई कार्रवाई की पूरी जानकारी कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।
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Bilaspur News का यह मामला दो बड़े मुद्दों को एक साथ सामने लाता है – एक तरफ हजारों गरीब बच्चों के शिक्षा के अधिकार की अनदेखी, तो दूसरी तरफ नागरिकों के स्वास्थ्य से खिलवाड़। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का यह कड़ा रुख सरकारी तंत्र को एक जरूरी संदेश है कि जनता के हितों से समझौता नहीं किया जाएगा।
अब देखना यह होगा कि 8 और 9 अप्रैल की सुनवाई में राज्य सरकार और नगर निगम अपना जवाब कोर्ट के सामने किस तरह रखते हैं और क्या वे तय समयसीमा में कार्रवाई कर पाते हैं।
