Bhilai News: ₹4.93 करोड़ के स्विमिंग पूल में 3 बड़े खुलासे — गलत दिशा, डूब क्षेत्र और नेशनल इवेंट पर खतरा

📍 भिलाई, छत्तीसगढ़ | Breaking Bhilai News


Bhilai News: मामला क्या है?

Bhilai News की यह रिपोर्ट उस करोड़ों रुपए के प्रोजेक्ट की परतें उघाड़ती है जो खेल के नाम पर शुरू तो हुआ, लेकिन अब विशेषज्ञों और जनप्रतिनिधियों की नज़रों में संदेह के घेरे में आ गया है।

भिलाई नगर निगम द्वारा प्रियदर्शिनी परिसर पश्चिम में लगभग ₹4.93 करोड़ की लागत से एक नया स्विमिंग पूल बनाया जा रहा है। अब तक करीब 5 फीट तक खुदाई हो चुकी है। लेकिन निर्माण शुरू होते ही तीन गंभीर सवाल सामने आए हैं — पूल की गलत दिशा, डूब क्षेत्र में निर्माण स्थल, और तकनीकी मानकों की अनदेखी।

स्थानीय कोच, विशेषज्ञ और नेता प्रतिपक्ष सभी एक स्वर में कह रहे हैं — “यह स्विमिंग पूल नहीं, तालाब बनने वाला है।”


स्विमिंग पूल की गलत दिशा — एक्सपर्ट्स ने क्या कहा?

तकनीकी मानक क्या कहते हैं?

स्विमिंग पूल निर्माण के अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसी भी खुले स्विमिंग पूल (Open Area Pool) को हमेशा उत्तर-दक्षिण (North–South) दिशा में बनाया जाना चाहिए।

इसके पीछे एक ठोस कारण है — जब पूल उत्तर-दक्षिण दिशा में हो, तो सुबह और शाम के समय सूरज की रोशनी सीधे तैराकों की आंखों पर नहीं पड़ती। इससे खिलाड़ियों को प्रतियोगिता और अभ्यास के दौरान कोई दृष्टि संबंधी परेशानी नहीं होती।

Bhilai News: प्रियदर्शिनी में क्या हो रहा है?

यह Bhilai News इसलिए चिंताजनक है क्योंकि प्रियदर्शिनी परिसर में निर्माणाधीन पूल को पूर्व-पश्चिम (East–West) दिशा में बनाया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सीधे तौर पर मानक प्रक्रिया का उल्लंघन है।

गलत दिशा में बना पूल खिलाड़ियों की आंखों में धूप की चुभन पैदा करेगा, जिससे उनका प्रदर्शन प्रभावित होगा। यह न केवल अभ्यास बल्कि प्रतियोगिता के नज़रिए से भी गंभीर समस्या है।

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नेशनल स्तर के आयोजन पर संकट

#### करोड़ों का पूल बनेगा “साधारण तालाब”?

विशेषज्ञों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि निर्माण ऐसे ही जारी रहा तो इस पूल में न कोई राज्य स्तरीय प्रतियोगिता हो सकेगी, न ही राष्ट्रीय स्तर की।

किसी भी प्रतिस्पर्धी स्विमिंग पूल के लिए न्यूनतम मानक इस प्रकार हैं:

  • लंबाई: 50 मीटर
  • चौड़ाई: 25–26 मीटर (10 लेन के लिए)
  • गहराई: लगभग 2 मीटर
  • दिशा: उत्तर से दक्षिण (खुले क्षेत्र में)

यदि इनमें से कोई भी मानक पूरा नहीं होता, तो Swimming Federation of India (SFI) या अन्य आधिकारिक निकाय उस स्थल को प्रतियोगिता के लिए अनुमोदित नहीं करते। ऐसे में ₹4.93 करोड़ की लागत महज जनता के पैसे की बर्बादी बनकर रह जाएगी।

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डूब क्षेत्र में निर्माण — बारिश में बढ़ेगी मुसीबत

#### कोसा नाला के पास, डूब क्षेत्र में है निर्माण स्थल

यह Bhilai News का दूसरा बड़ा खुलासा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रियदर्शिनी परिसर का यह हिस्सा सुपेला के कोसा नाला के पास स्थित है और बारिश के मौसम में यह क्षेत्र अक्सर जलभराव का शिकार होता है।

#### बिना फिलिंग के शुरू हुई खुदाई

स्थानीय लोगों ने बताया कि निर्माण एजेंसी ने बिना मुरुम या डस्ट फिलिंग किए सीधे खुदाई शुरू कर दी। जमीन की ऊंचाई न बढ़ाए जाने से बारिश के दौरान पूरा निर्माण क्षेत्र जलमग्न हो सकता है।

इससे दो बड़े खतरे हैं:

  1. निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर असर
  2. भविष्य में पूल के उपयोग पर खतरा

यह लापरवाही अगर समय रहते नहीं सुधारी गई, तो बरसात के बाद पूरा प्रोजेक्ट दोबारा नुकसान में जा सकता है।


नेता प्रतिपक्ष का हमला — जिम्मेदारों के खिलाफ शिकायत का ऐलान

Bhilai News: भोजराज सिन्हा ने लगाए गंभीर आरोप

भिलाई नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष भोजराज सिन्हा ने इस पूरे मामले पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि ₹5 करोड़ के इस प्रोजेक्ट में भारी अनियमितता और तकनीकी लापरवाही सामने आई है।

कोचों के साथ निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि पूल का पूरा डिजाइन ही गलत है। उनका कहना है कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ वे शीघ्र आधिकारिक शिकायत दर्ज कराएंगे।

सिन्हा ने चेताया — “अगर अभी भी नहीं सुधरा तो यह पूल करोड़ों की लागत से बना तालाब बनकर रह जाएगा।”


NIS कोच का तकनीकी खुलासा

एनआईएस कोच तामेश्वर घंघोरी की राय

स्विमिंग के NIS (National Institute of Sports) प्रशिक्षित कोच तामेश्वर घंघोरी ने इस विवाद में सबसे अहम जानकारी दी है।

उनके अनुसार:

  • प्रतिस्पर्धी पूल की लंबाई 50 मीटर होनी चाहिए
  • चौड़ाई 25 से 26 मीटर ताकि 10 लेन बन सकें
  • गहराई करीब 2 मीटर
  • और सबसे ज़रूरी — खुले पूल की दिशा उत्तर से दक्षिण

कोच घंघोरी ने कहा कि इन मानकों के बिना कोई भी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय संस्था इस पूल को मान्यता नहीं देगी। यहाँ तक कि राज्य स्तर की स्विमिंग चैंपियनशिप भी इस स्थल पर आयोजित करना संभव नहीं होगा।


नगर निगम का जवाब — “कोई शिकायत नहीं मिली”

Bhilai News: निगम ने दी सफाई

भिलाई नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी तिलेश्वर साहू ने इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया दी है। उनके अनुसार अब तक निगम के पास कोई आधिकारिक शिकायत नहीं पहुंची है।

दिशा के विवाद पर उन्होंने कहा कि हर निर्माण स्थल की भौगोलिक स्थिति अलग होती है और परिस्थिति के अनुसार दिशा में बदलाव किया जा सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि निर्माण स्वीकृत एस्टिमेट और निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप ही किया जा रहा है।

हालांकि, निगम ने यह नहीं बताया कि दिशा परिवर्तन के बावजूद नेशनल स्तर की मान्यता कैसे सुनिश्चित की जाएगी।


Bhilai News की यह रिपोर्ट एक बड़े सवाल को जन्म देती है — क्या जनता की गाढ़ी कमाई के ₹4.93 करोड़ से बन रहा यह स्विमिंग पूल वाकई खिलाड़ियों के काम आएगा?

विशेषज्ञ, कोच और नेता प्रतिपक्ष सभी एकमत हैं कि गलत दिशा, डूब क्षेत्र में निर्माण और तकनीकी मानकों की अनदेखी इस प्रोजेक्ट को बर्बाद कर सकती है। यदि समय रहते भिलाई नगर निगम ने इस पर ध्यान नहीं दिया और सुधारात्मक कदम नहीं उठाए, तो यह पूल न केवल बेकार होगा बल्कि छत्तीसगढ़ के खेल भविष्य को भी नुकसान पहुंचाएगा।

जनता को अधिकार है जानने का — यह करोड़ों रुपए खर्च कर क्या बन रहा है, स्विमिंग पूल या सिर्फ एक महंगा तालाब?

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