‘बारूद नहीं, संस्कृति है बस्तर की पहचान’ — बस्तर पंडुम 2026 में अमित शाह का बड़ा बयान

बस्तर पंडुम 2026 के मंच से संस्कृति का मजबूत संदेश

जगदलपुर, 9 फरवरी।
छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र की पहचान कभी भी बारूद या हिंसा नहीं रही है, बल्कि इसकी असली पहचान समृद्ध संस्कृति और विरासत है। यह बात केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को Bastar Pandum 2026 के संभागीय स्तर के समापन समारोह में कही।

तीन दिवसीय इस सांस्कृतिक आयोजन का समापन जगदलपुर, बस्तर जिले के मुख्यालय में हुआ, जहां बड़ी संख्या में जनजातीय कलाकार, स्थानीय नागरिक और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।


‘बस्तर की आत्मा उसकी संस्कृति में बसती है’

अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा—

“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्ष्य है कि बस्तर की संस्कृति को पूरे देश और दुनिया तक पहुंचाया जाए। बारूद बस्तर की पहचान नहीं हो सकता। इसकी सच्ची पहचान इसकी संस्कृति और परंपराएं हैं।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार आने वाले दशकों तक बस्तर की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।


नक्सलवाद से समाज को नहीं मिला कोई लाभ

Amit Shah Bastar Pandum 2026 कार्यक्रम के दौरान गृह मंत्री ने नक्सलवाद पर भी खुलकर बात की।
उन्होंने कहा कि—

“माओवाद ने दुनिया में जहां-जहां पैर पसारे, वहां सिर्फ विनाश हुआ।”

उन्होंने कोलंबिया, पेरू और कंबोडिया जैसे देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि हिंसक विचारधाराओं से किसी समाज को कभी फायदा नहीं हुआ।


31 मार्च तक नक्सलवाद के खात्मे का लक्ष्य

अमित शाह ने दोहराया कि—

“देश से नक्सल समस्या को 31 मार्च तक पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा।”

उन्होंने शेष सक्रिय माओवादी कैडरों से हथियार छोड़ने और मुख्यधारा में लौटने की अपील की।
विशेष रूप से उन्होंने यह चिंता जताई कि युवा आदिवासी लड़कियां भी नक्सली संगठनों में शामिल हैं

“उनका पूरा जीवन आगे पड़ा है, उन्हें पुनर्वास की जरूरत है, न कि हिंसा की।”


हथियार छोड़ने वालों के लिए सुरक्षा, हिंसा करने वालों को चेतावनी

गृह मंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया—

  • आत्मसमर्पण करने वालों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा
  • लेकिन जो लोग गोली चलाते हैं, IED लगाते हैं और स्कूल-अस्पताल जलाते हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा

उन्होंने कहा—

“अगर कोई हथियार उठाएगा, तो जवाब भी उसी भाषा में दिया जाएगा।”


बस्तर बन रहा है विकास का नया मॉडल

अमित शाह ने कहा कि बस्तर आज पूरे देश के सामने एक सकारात्मक ब्रांड के रूप में उभर रहा है।
उन्होंने बताया कि—

  • 40 वर्षों से बंद पड़े स्कूल दोबारा खोले गए हैं
  • प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, अस्पताल और कॉलेज फिर से शुरू हो रहे हैं
  • हर गांव में डाकघर खुल रहे हैं
  • मोबाइल टावर और पक्की सड़कें गांवों को जोड़ रही हैं

उन्होंने भावुक अंदाज़ में कहा—

“कई गांवों में 40 साल बाद तिरंगा फहराया गया है।”


अगले पांच साल में बस्तर होगा सबसे विकसित आदिवासी क्षेत्र

गृह मंत्री ने भरोसा दिलाया कि—

“आने वाले पांच वर्षों में बस्तर देश का सबसे विकसित आदिवासी क्षेत्र बनेगा।”

उन्होंने कहा कि पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से बस्तर में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और युवा पीढ़ी को अपनी धरती पर ही भविष्य मिलेगा।


हिंसा नहीं, संस्कृति और विकास का रास्ता

बस्तर पंडुम 2026 के मंच से दिया गया यह संदेश केवल एक भाषण नहीं, बल्कि बस्तर के भविष्य की दिशा को दर्शाता है।
सरकार का साफ दृष्टिकोण है—
👉 हिंसा नहीं, संस्कृति
👉 डर नहीं, विकास
👉 अलगाव नहीं, मुख्यधारा