Narayanpur News: अबूझमाड़ के घने जंगलों से निकल रहे हैं फुटबॉल के 5 बड़े सितारे – RK Mission आश्रम की अद्भुत कहानी!

Narayanpur News — छत्तीसगढ़ के सबसे दूरस्थ और एक समय नक्सल-प्रभावित क्षेत्र के रूप में चर्चित अबूझमाड़ की पहचान अब बदल रही है। यहां के घने जंगलों के बीच स्थित रामकृष्ण मिशन विवेकानंद आश्रम आज देश की सबसे प्रेरणादायक फुटबॉल नर्सरियों में से एक बन चुका है।

रायपुर से लगभग 250 किलोमीटर दूर नारायणपुर जिले में स्थित यह आश्रम चुपचाप उन बच्चों को तराश रहा है जिनके गांवों तक कभी शिक्षा की रोशनी भी नहीं पहुंची थी। आज वही बच्चे राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ का झंडा बुलंद कर रहे हैं।


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1986 में बोया गया था यह अनोखा बीज – RK Mission की स्थापना

रामकृष्ण मिशन विवेकानंद आश्रम की स्थापना 1986 में हुई थी। उद्देश्य था — छत्तीसगढ़ के आदिवासी समुदायों का उत्थान। बस्तर क्षेत्र के अबूझमाड़ में जहां सड़क, बिजली और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं थीं, वहां यह आश्रम एक उम्मीद की किरण बनकर आया।

दशकों से यह संस्थान उन बच्चों तक पहुंच रहा है जो घने जंगलों के भीतर बसे दूरदराज के आदिवासी गांवों से आते हैं। इन गांवों में औपचारिक शिक्षा की पहुंच या तो बेहद सीमित थी या बिल्कुल न के बराबर।

आश्रम ने इन बच्चों को न केवल मुफ्त शिक्षा दी, बल्कि संगीत, कला और खेलों के माध्यम से उनके व्यक्तित्व को भी निखारा। आज यह आश्रम कक्षा 1 से 12 तक के 2,700 से अधिक बच्चों का आवासीय घर है।


Khelo India Tribal Games में आश्रम का दमदार प्रदर्शन

Narayanpur News की सबसे बड़ी खुशखबरी यह है कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स (KITG) 2026 में छत्तीसगढ़ की पुरुष और महिला फुटबॉल टीमों में एक दर्जन से अधिक खिलाड़ी इसी आश्रम से निकले हैं।

छत्तीसगढ़ फुटबॉल संघ (CFA) के सहायक महासचिव और AIFF कार्यकारी समिति के सदस्य मोहन लाल ने बताया कि KITG 2026 में प्रतिस्पर्धा कर रही पुरुष और महिला दोनों फुटबॉल टीमों में प्रत्येक में लगभग 12-13 खिलाड़ी इसी अकादमी के हैं।

परिणाम भी शानदार रहे — महिला फुटबॉल टीम फाइनल में पहुंच चुकी है, जबकि पुरुष टीम ने सेमीफाइनल में जगह बनाई है। यह उपलब्धि उस आश्रम की है जो अबूझमाड़ के जंगलों में चुपचाप देश के भविष्य को गढ़ रहा है।


Narayanpur News: 2700 बच्चों का घर – एक अद्भुत आवासीय संसार

इस Narayanpur News की सबसे भावनात्मक तस्वीर यह है कि आश्रम में रहने वाले अधिकतर बच्चे उन परिवारों से हैं जहां शिक्षा एक सपना था। आज यही बच्चे देश की शीर्ष कंपनियों में काम कर रहे हैं और प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाई कर रहे हैं।

मोहन लाल ने गर्व के साथ कहा — “कई मायनों में यह देश के सर्वश्रेष्ठ आवासीय स्कूलों में से एक है।”

आश्रम में बच्चों को कम उम्र से ही खेलों से परिचित कराया जाता है। शिक्षा के साथ-साथ व्यवस्थित खेल प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वे पढ़ाई जारी रखते हुए खेल में भी करियर बना सकें। हर साल यहां के 50 से 60 छात्र राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं।


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तीन फुटबॉल मैदान और एस्ट्रो-टर्फ – विश्वस्तरीय खेल सुविधाएं

अबूझमाड़ जैसे दुर्गम इलाके में यह जानकर हैरानी होती है कि आश्रम के परिसर में तीन फुटबॉल मैदान हैं — जिनमें से एक एस्ट्रो-टर्फ सुविधा से लैस है।

इसके अलावा परिसर में बैडमिंटन, टेबल टेनिस, खो-खो और मल्लखंभ के लिए इनडोर एरेना भी उपलब्ध है। यह सुविधाएं किसी बड़े शहर के प्रतिष्ठित स्पोर्ट्स अकादमी को भी टक्कर देती हैं।

यही कारण है कि यहां से निकले खिलाड़ी केवल स्थानीय नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी छाप छोड़ रहे हैं। Khelo India Tribal Games में इनका प्रदर्शन इसका जीता-जागता प्रमाण है।


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नक्सल प्रभावित बच्चों की जिंदगी बदल रहा है खेल

मोहन लाल का मानना है कि नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले कई बच्चों के जीवन में खेल ने परिवर्तनकारी भूमिका निभाई है। जो बच्चे कभी अंधेरे भविष्य की ओर जा सकते थे, वे आज राष्ट्रीय मंचों पर छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

Narayanpur News की यह कहानी बताती है कि जब एक संस्था किसी बच्चे को सही दिशा, सुविधा और आत्मविश्वास दे, तो वह किसी भी पृष्ठभूमि से होने के बावजूद असाधारण ऊंचाइयां छू सकता है।

बस्तर जैसे क्षेत्र में जहां दशकों से केवल संघर्ष और अलगाव की बातें होती थीं, वहां से डॉक्टर, इंजीनियर, खिलाड़ी और शिक्षाविद निकलना — यह किसी चमत्कार से कम नहीं।


RKM FA – AIFF की मान्यता पाने वाला राज्य का पहला फुटबॉल क्लब

रामकृष्ण मिशन फुटबॉल अकादमी (RKM FA) को तब और बड़ी पहचान मिली जब यह छत्तीसगढ़ का पहला फुटबॉल क्लब बना जिसने ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) द्वारा आयोजित अंडर-17 यूथ कप और आई-लीग 2 में भाग लिया।

यह उपलब्धि केवल एक क्लब की जीत नहीं — यह पूरे अबूझमाड़ और नारायणपुर के आदिवासी बच्चों की जीत है। जिस जमीन पर कभी बंदूकें चलती थीं, वहां आज फुटबॉल की गूंज सुनाई दे रही है।

AIFF जैसी राष्ट्रीय संस्था की मान्यता मिलने का अर्थ है कि इस आश्रम से निकले खिलाड़ियों का भविष्य और भी उज्ज्वल होने वाला है।


Narayanpur News की यह कहानी केवल एक आश्रम या एक फुटबॉल अकादमी की नहीं है — यह उस भारत की कहानी है जो जंगलों और पहाड़ों के बीच भी अपना सपना देख रहा है और उसे पूरा भी कर रहा है। रामकृष्ण मिशन विवेकानंद आश्रम ने साबित किया है कि अगर शिक्षा, खेल और संकल्प एक साथ हों, तो अबूझमाड़ के बच्चे भी Khelo India Tribal Games के फाइनल तक पहुंच सकते हैं।

Chhattisgarh के Raipur, Bhilai, Bilaspur और Durg में बैठे हर उस व्यक्ति को यह Narayanpur News पढ़नी चाहिए, जो मानता है कि अच्छे खिलाड़ी केवल बड़े शहरों से ही निकलते हैं। नारायणपुर के जंगलों से निकले ये बच्चे उस सोच को चुनौती दे रहे हैं — और जीत भी रहे हैं।

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