Phulo Devi Netam को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने मौजूदा राज्यसभा सांसद फूलो देवी नेताम को फिर से उम्मीदवार बनाकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। पार्टी का यह फैसला आगामी राज्यसभा चुनाव में दिलचस्प मुकाबले का संकेत दे रहा है। भाजपा ने भी ओबीसी नेता लक्ष्मी वर्मा को उम्मीदवार बनाया है। ऐसे में यह चुनाव केवल एक सीट की लड़ाई नहीं रहेगा। बल्कि इसमें क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, महिला नेतृत्व और सामाजिक संतुलन की भी बड़ी भूमिका देखने को मिलेगी।
Phulo Devi Netam: कांग्रेस ने फिर जताया भरोसा
Phulo Devi Netam को दोबारा उम्मीदवार बनाकर कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी आदिवासी नेतृत्व को मजबूत करना चाहती है। कांग्रेस के संचार विभाग के प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने इसकी पुष्टि की है।
दरअसल छत्तीसगढ़ से दो राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त हो रहा है। इनमें फूलो देवी नेताम और केटीएस तुलसी शामिल हैं। पार्टी ने नेताम को फिर से मैदान में उतारने का फैसला किया है।
फूलो देवी नेताम वर्तमान में छत्तीसगढ़ प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष भी हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि उनकी जमीनी पकड़ और संसदीय प्रदर्शन को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
नेताम ने कहा कि उन्होंने 1994 में फरसगांव जनपद अध्यक्ष के रूप में अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की थी। इसके बाद 1998 में अविभाजित मध्यप्रदेश में केशकाल से विधायक बनीं।
उन्होंने पार्टी नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें किसी राजनीतिक परिवार का सहारा नहीं मिला। पार्टी और जनता के भरोसे ने ही उन्हें आगे बढ़ने का मौका दिया।
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राज्यसभा के बारे में अधिक जानकारी यहां पढ़ सकते हैं:
https://rajyasabha.nic.in

जमीनी राजनीति से राज्यसभा तक का सफर
फूलो देवी नेताम का राजनीतिक सफर काफी संघर्षपूर्ण रहा है। उन्होंने अपनी राजनीति की शुरुआत 1994 में फरसगांव जनपद अध्यक्ष बनकर की थी।
1998 में वह अविभाजित मध्यप्रदेश विधानसभा में केशकाल से विधायक चुनी गईं। इसके बाद उन्होंने बस्तर जिला पंचायत अध्यक्ष के रूप में भी काम किया।
2005 से 2010 तक उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। वहीं 2011 से 2020 के बीच पार्टी संगठन में कई अहम भूमिकाएं निभाईं।
14 सितंबर 2020 को उन्हें पहली बार राज्यसभा भेजा गया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने आदिवासी अधिकार, वन अधिकार और नक्सल प्रभावित इलाकों के विकास जैसे मुद्दे उठाए।
फूलो देवी नेताम 2013 के झीरम घाटी नक्सल हमले की भी जीवित गवाह हैं। 25 मई 2013 को बस्तर के दरभा घाटी में कांग्रेस काफिले पर हमला हुआ था। इस हमले में कई वरिष्ठ नेताओं की मौत हुई थी।
इस घटना के बाद भी उन्होंने राजनीति में सक्रिय भूमिका जारी रखी।
झीरम घाटी हमले के बारे में यहां पढ़ सकते हैं:
https://hi.wikipedia.org/wiki/झीरम_घाटी_हमला
Key Facts: Phulo Devi Netam से जुड़ी मुख्य बातें
- कांग्रेस ने फूलो देवी नेताम को फिर राज्यसभा उम्मीदवार बनाया।
- भाजपा ने ओबीसी नेता लक्ष्मी वर्मा को मैदान में उतारा है।
- नेताम का पहला राज्यसभा कार्यकाल सितंबर 2020 में शुरू हुआ था।
- वह 2013 के झीरम घाटी नक्सल हमले की जीवित गवाह हैं।
- उन्होंने राजनीति की शुरुआत 1994 में जनपद अध्यक्ष से की थी।
चुनाव में सामाजिक संतुलन की राजनीति
Phulo Devi Netam की उम्मीदवारी से छत्तीसगढ़ की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। कांग्रेस का यह फैसला बस्तर क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति माना जा रहा है।
बस्तर राज्य की राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है। यहां आदिवासी मतदाताओं की बड़ी संख्या है। इसलिए कांग्रेस का यह कदम आदिवासी नेतृत्व को आगे बढ़ाने के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
दूसरी ओर भाजपा ने भी महिला उम्मीदवार लक्ष्मी वर्मा को उतारा है। इससे मुकाबला और रोचक हो गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव केवल सीट का नहीं बल्कि सामाजिक प्रतिनिधित्व का भी सवाल बन सकता है।
Phulo Devi Netam की उम्मीदवारी ने राज्यसभा चुनाव को दिलचस्प बना दिया है। कांग्रेस ने उन्हें दोबारा मौका देकर आदिवासी नेतृत्व पर भरोसा जताया है।
अब सबकी नजर नामांकन प्रक्रिया और आगे की राजनीतिक रणनीति पर रहेगी। यह मुकाबला छत्तीसगढ़ की राजनीति में बड़ा संदेश भी दे सकता है।
