पटना रोड शो में मोदी की चमक फीकी, नीतीश की गैरमौजूदगी और जनता की नाराज़गी से NDA में हलचल

पटना, 5 नवम्बर 2025:
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के प्रचार के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पटना रोड शो जितनी उम्मीदों से आयोजित हुआ था, उससे कहीं ज़्यादा विवादों और सियासी संकेतों का कारण बन गया।
अगर इस Modi Patna roadshow controversy को जनता के मूड का संकेतक माना जाए, तो यह साफ दिखता है कि एनडीए के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है।

इस बहुप्रचारित रोड शो में एक ओर जहां जनता की नाराज़गी और ट्रैफिक जाम चर्चा में रही, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अनुपस्थिति ने पूरे राजनीतिक माहौल को झकझोर दिया।
रोड शो के दौरान पटना के लगभग सभी मुख्य मार्गों को घंटों बंद रखा गया, जिससे लोगों को भारी असुविधा झेलनी पड़ी। सोशल मीडिया पर लोगों ने सरकार के खिलाफ खुलकर नाराज़गी जताई।

दूसरी बड़ी चर्चा थी — नीतीश कुमार का रोड शो से गायब रहना।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह अनुपस्थिति कोई सामान्य बात नहीं थी, बल्कि भाजपा को नीतीश का “संदेश” थी।
जानकारों के मुताबिक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जानबूझकर दूरी बनाई ताकि भाजपा को यह महसूस हो कि चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर अस्पष्टता उन्हें मंजूर नहीं है।

नीतीश गुट का कहना है कि भाजपा को स्पष्ट रूप से यह घोषणा करनी चाहिए कि एनडीए की अगली सरकार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही होंगे।
वहीं, अमित शाह के बयान कि “मुख्यमंत्री का चुनाव विधायक दल करेगा”, ने जेडीयू के शक को और गहरा कर दिया है।

इसी बीच, मोकामा से जेडीयू उम्मीदवार अनंत सिंह की गिरफ्तारी ने भी नया मोड़ ला दिया।
अनंत सिंह पर जनसुराज कार्यकर्ता दुलारचंद यादव की हत्या का आरोप है। चुनाव के बीच उनकी गिरफ्तारी को भाजपा-जेडीयू की “सुशासन बनाम जंगलराज” की बहस से जोड़कर देखा जा रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह गिरफ्तारी सुशासन की छवि बचाने का प्रयास थी, लेकिन इससे एनडीए का नैरेटिव कमजोर हुआ है।
“जंगलराज बनाम सुशासन” का जो विमर्श पिछले दो दशकों से भाजपा-जेडीयू के सहारे कायम था, वह अब खुद नीतीश सरकार की अपराध दरों के आंकड़ों के तले दबता जा रहा है।

Screenshot 2025 11 05 145808

NCRB के आंकड़ों के मुताबिक, 2023 में बिहार देश का चौथा सबसे अपराधग्रस्त राज्य रहा।
हत्या, अपहरण और महिला अपराधों में 13% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि “सुशासन बाबू” की छवि अब वास्तविक आंकड़ों के बोझ तले कमजोर पड़ चुकी है।

प्रधानमंत्री मोदी का पटना रोड शो जहां एनडीए की ताकत दिखाने का प्रयास था, वहीं यह आयोजन अब नीतीश कुमार की नाराज़गी, जनता की परेशानी और अपराध के आंकड़ों के बीच एक राजनीतिक झटके में बदल गया है।