भिलाई | छत्तीसगढ़
Dhirendra Shastri News: छत्तीसगढ़ दौरे पर आए बागेश्वर धाम प्रमुख पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद अब खुलकर मंच से सामने आ गया है।
सरकारी विमान से भिलाई पहुंचने को लेकर उठे सवालों पर पहली बार धीरेंद्र शास्त्री ने सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी।
यह बयान उन्होंने भिलाई में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान दिया, जहां मंच पर राज्य मंत्री गुरु खुशवंत साहेब भी मौजूद थे।
✈️ सरकारी विमान से आगमन बना सियासी मुद्दा
धीरेंद्र शास्त्री 25 दिसंबर को दुर्ग जिले के भिलाई में एक धार्मिक आयोजन में शामिल होने पहुंचे थे।
उनके आगमन के बाद यह खबर सामने आई कि वे सरकारी विमान से कार्यक्रम स्थल तक आए, जिसके बाद कांग्रेस पार्टी ने सवाल उठाए।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने निजी धार्मिक कार्यक्रम के लिए सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किया है।
🎤 मंच से तोड़ी चुप्पी
बढ़ते विवाद के बीच धीरेंद्र शास्त्री ने मंच से बोलते हुए मंत्री गुरु खुशवंत साहेब की ओर इशारा किया और कहा—
“अब ये भी तय नहीं है कि मुझे वापस भेजने की व्यवस्था होगी या नहीं।
मेरे आने पर सवाल उठाए जा रहे हैं, लेकिन व्यवस्था किसने की, इसकी जिम्मेदारी उन्हीं की है।”
उन्होंने कहा कि उनके आने-जाने के साधन पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं, जबकि वे भारत के नागरिक हैं, कोई विदेशी नहीं।
⚖️ ‘आलोचना चुनिंदा क्यों?’
धीरेंद्र शास्त्री ने सवाल उठाया कि—
- देश को नुकसान पहुंचाने वाले लोग
- सार्वजनिक संसाधनों को लूटने वाले लोग
आसानी से घूमते हैं, लेकिन—
- सनातन मूल्यों की बात करने वाला व्यक्ति
- कैंसर अस्पतालों का समर्थन करने वाला
- गरीब बेटियों की शादी में मदद करने वाला
- नशे के खिलाफ काम करने वाला व्यक्ति
अगर विमान से आता है, तो उस पर सवाल खड़े किए जाते हैं।
उन्होंने इसे गलत मानसिकता करार दिया।
🕊️ विवाद से दूरी, समर्थकों का आभार
धीरेंद्र शास्त्री ने साफ किया कि वे इस मुद्दे पर ज्यादा कुछ नहीं बोलना चाहते, ताकि कोई नया विवाद खड़ा न हो।
उन्होंने कहा—
“मुझ पर सवाल उठाने वालों के प्रति मेरे मन में कोई दुर्भावना नहीं है।”
इसके साथ ही उन्होंने उन लोगों का धन्यवाद किया, जिन्होंने इस मामले में उनका समर्थन किया।
उन्होंने यह भी कहा कि कई बार मीडिया कवरेज से बहस और ज्यादा बढ़ जाती है।
🔍 राजनीति और आस्था का टकराव
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि—
- सरकारी संसाधनों का उपयोग कहां तक उचित है
- और धार्मिक आयोजनों पर राजनीति की सीमा क्या होनी चाहिए
फिलहाल, इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी जारी है और आने वाले दिनों में विवाद और गहराने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
