आदिवासी इलाके की बेटियों की सुरक्षा पर सवाल, बीजापुर घटना से सियासत गर्म

सोमवार की दोपहर छत्तीसगढ़ विधानसभा का माहौल अचानक गरमा गया। विपक्षी बेंचों से तेज आवाजें उठने लगीं। वजह—बीजापुर जिले का एक संवेदनशील मामला।

Bijapur Hostel Pregnancy का मुद्दा सामने आते ही सदन में सन्नाटा भी छाया और शोर भी बढ़ा। आरोप है कि गंगालूर के पोर्टा केबिन स्कूल हॉस्टल से जुड़ी 3 नाबालिग छात्राएं गर्भवती पाई गईं। कांग्रेस ने इसे बेहद गंभीर बताया। सवाल सीधा था—अगर यह सच है, तो आखिर जिम्मेदार कौन है?


Bijapur Hostel Pregnancy मामला: विधानसभा में टकराव

Bijapur Hostel Pregnancy का मुद्दा सोमवार को जीरो आवर में उठाया गया। बीजापुर के कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी ने सबसे पहले मामला उठाया। फिर विपक्ष के नेता चरण दास महंत और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी खड़े हो गए।

विपक्ष का आरोप साफ था। उनका कहना था कि राज्य सरकार इस घटना को दबाने की कोशिश कर रही है। मंडावी ने कहा कि जैसे ही छात्राओं के गर्भवती होने की खबर सामने आई, उन्हें तुरंत घर भेज दिया गया।

और फिर अधिकारियों ने कहा—वे हॉस्टल में रह ही नहीं रही थीं।

शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने जवाब दिया। उनका कहना था कि 2 छात्राएं पोर्टा केबिन हॉस्टल में रहती ही नहीं थीं। वे स्वामी आत्मानंद हिंदी मीडियम स्कूल में पढ़ती थीं और घर से आती-जाती थीं।

तीसरी छात्रा—कक्षा 12 की—पहले हॉस्टल में रहती थी। मगर मंत्री के मुताबिक वह 18 अक्टूबर 2025, यानी दिवाली की छुट्टियों में घर गई और वापस नहीं लौटी।

मंत्री ने कहा कि छात्रा ने खुद हॉस्टल छोड़ दिया था। उसे हटाया नहीं गया।

लेकिन विपक्ष संतुष्ट नहीं हुआ। सदन में नारेबाजी शुरू हो गई। थोड़ी देर बाद कांग्रेस विधायक वॉकआउट कर गए।


Background: आदिवासी इलाके के हॉस्टलों पर पहले भी उठे सवाल

बीजापुर का गंगालूर इलाका बस्तर संभाग के अनुसूचित क्षेत्र में आता है। यहां पढ़ाई के लिए पोर्टा केबिन स्कूल बनाए गए थे। उद्देश्य साफ था—दूरदराज के गांवों के बच्चों को शिक्षा देना।

मैंने कुछ साल पहले इसी इलाके का दौरा किया था। छोटे-छोटे जंगलों के बीच बने ये स्कूल कई बच्चों के लिए उम्मीद की तरह दिखते हैं। मगर चुनौतियां भी कम नहीं।

सूत्रों के मुताबिक इन हॉस्टलों में सुरक्षा और निगरानी को लेकर पहले भी शिकायतें आती रही हैं। हालांकि हर बार प्रशासन ने सुधार का दावा किया।

लेकिन यह मामला सामने आते ही सवाल फिर खड़े हो गए।
क्या निगरानी व्यवस्था सच में मजबूत है?

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सरकारी स्कूल और योजनाओं से जुड़ी जानकारी आधिकारिक पोर्टल पर भी देखी जा सकती है:
https://www.india.gov.in

और शिक्षा विभाग से संबंधित प्रेस नोट अक्सर यहां जारी होते हैं:
https://pib.gov.in

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Key Facts: Bijapur Hostel Pregnancy मामले की अहम बातें

• Bijapur Hostel Pregnancy विवाद तब शुरू हुआ जब विपक्षी विधायकों ने सदन में आरोप लगाया कि गंगालूर क्षेत्र की 3 नाबालिग छात्राएं गर्भवती पाई गईं।

• शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि 2 छात्राएं पोर्टा केबिन हॉस्टल में रहती ही नहीं थीं और वे अपने घर से स्कूल आती-जाती थीं।

• तीसरी छात्रा पहले हॉस्टल में रहती थी, मगर दिवाली की छुट्टियों में घर जाने के बाद उसने वापस लौटने का फैसला नहीं किया।

• कांग्रेस विधायकों का आरोप है कि घटना सामने आते ही छात्राओं को घर भेज दिया गया और फिर कहा गया कि वे हॉस्टल में थीं ही नहीं।

• इस मुद्दे पर चर्चा की मांग करते हुए विपक्ष ने स्थगन प्रस्ताव दिया, मगर सदन की अध्यक्षता कर रहे धर्मजीत सिंह ने उसे मंजूर नहीं किया।


Impact & Public Reaction

बस्तर क्षेत्र में यह खबर फैलते ही लोग अलग-अलग तरह की बातें कर रहे हैं। कुछ लोग प्रशासन के पक्ष में हैं। उनका कहना है कि जांच से पहले निष्कर्ष निकालना ठीक नहीं।

मगर कई स्थानीय लोग नाराज भी दिखे। बीजापुर बाजार में एक दुकानदार ने कहा, “अगर बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं, तो फिर हॉस्टल का मतलब क्या है?”

और राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है। विपक्ष ने सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया। नेता प्रतिपक्ष महंत ने कहा कि मंत्री का जवाब गंभीर मुद्दे को हल्के में लेने जैसा लगा।

कांग्रेस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
सरकार का पक्ष है—तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है।

सच क्या है? यह सवाल अभी भी हवा में तैर रहा है।


बीजापुर का यह मामला अब सिर्फ एक स्थानीय खबर नहीं रहा। Bijapur Hostel Pregnancy विवाद ने विधानसभा से लेकर गांवों तक चर्चा छेड़ दी है।

फिलहाल सरकार का कहना है कि आरोप सही नहीं हैं। विपक्ष जांच की मांग पर अड़ा है। और गंगालूर जैसे छोटे इलाके में लोग बस यही पूछ रहे हैं—सच्चाई आखिर सामने कब आएगी?

अभी तो राजनीतिक बहस जारी है। अगले कुछ दिनों में शायद तस्वीर थोड़ी साफ हो।

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