Raipur News में आज एक प्रेरणादायक और भावुक करने वाली खबर आई है। रायपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के उद्घाटन समारोह में टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता सेखोम मीराबाई चानू ने अपने करियर के सबसे बड़े अधूरे सपने का खुलासा किया।
मीराबाई ने कहा कि एशियन गेम्स में पदक उनके लिए अब भी सर्वोच्च प्राथमिकता है। ओलंपिक, विश्व चैंपियनशिप और कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतने के बावजूद एशियाई खेलों का पदक उनसे अब तक दूर रहा है।
यह बात उन्होंने भरे हुए दिल से कही, जिसने वहां उपस्थित सभी खेल प्रेमियों और युवा खिलाड़ियों को गहराई से प्रभावित किया।
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एशियन गेम्स में अब तक क्यों रहा पदक अधूरा? – Raipur News
2014 इंचियोन – पदार्पण में नौवां स्थान
31 वर्षीय मीराबाई चानू ने 2014 इंचियोन एशियन गेम्स में मात्र 19 वर्ष की उम्र में अंतरराष्ट्रीय मंच पर कदम रखा था। हालांकि युवा होने के कारण वे उस समय नौवें स्थान पर रहीं। यह उनका पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय अनुभव था और उन्होंने यहीं से एशियन गेम्स पदक का सपना देखा।
2018 जकार्ता – पीठ की चोट ने छीना मौका
2018 जकार्ता एशियन गेम्स तक आते-आते मीराबाई भारतीय वेटलिफ्टिंग की सबसे बड़ी उम्मीद बन चुकी थीं। लेकिन पीठ की गंभीर चोट ने उन्हें इस बड़े आयोजन से बाहर कर दिया। यह उनके करियर का एक बेहद दर्दनाक पल था।
2022 हांगझोउ – हिप की चोट बनी बाधा
2022 हांगझोउ एशियन गेम्स में एक बार फिर मीराबाई का सपना चकनाचूर हो गया। इस बार हिप की चोट ने उन्हें प्रतिस्पर्धा से दूर रखा। तीन बार एशियन गेम्स में पदक से चूकना किसी भी खिलाड़ी के लिए मानसिक रूप से बेहद कठिन होता है, लेकिन मीराबाई ने हार नहीं मानी।
खेलो इंडिया – भारत सरकार की आधिकारिक वेबसाइट
Raipur News – खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में मीराबाई की ऐतिहासिक उपस्थिति
रायपुर में 26 मार्च 2026 को खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 का भव्य उद्घाटन हुआ। इस आयोजन में मीराबाई चानू की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी खास बना दिया।
मीराबाई ने इस आयोजन की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि यह मंच देश के दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए एक बड़ा और जरूरी अवसर है।
Raipur News के लिए यह गर्व की बात है कि देश की सबसे बड़ी महिला खिलाड़ियों में से एक ने रायपुर की धरती पर यह महत्वपूर्ण उद्गार व्यक्त किए।
राष्ट्रीय चैंपियनशिप में 3 नए राष्ट्रीय रिकॉर्ड – करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन
मीराबाई ने हाल ही में राष्ट्रीय वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में शानदार वापसी करते हुए 48 किलोग्राम वर्ग में तीन नए राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाए।
उन्होंने स्नैच में 89 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 116 किलोग्राम वजन उठाया। कुल 205 किलोग्राम के साथ उन्होंने स्वर्ण पदक जीता, जो उनके करियर का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।
यह प्रदर्शन दिखाता है कि चोटों से उबरकर मीराबाई न केवल वापस आई हैं, बल्कि पहले से भी ज्यादा मजबूत होकर लौटी हैं।
| स्पर्धा | वजन |
|---|---|
| स्नैच | 89 किलोग्राम (राष्ट्रीय रिकॉर्ड) |
| क्लीन एंड जर्क | 116 किलोग्राम (राष्ट्रीय रिकॉर्ड) |
| कुल | 205 किलोग्राम (राष्ट्रीय रिकॉर्ड) |
48kg और 49kg वर्ग के बीच बड़ी चुनौती
नियमों में हुए बदलाव के कारण मीराबाई को अब 48 किलोग्राम और 49 किलोग्राम वर्ग के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती है।
23 जुलाई से 2 अगस्त 2026 तक ग्लासगो में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स में वे 48 किलोग्राम वर्ग में उतरेंगी। इसके बाद 19 सितंबर से 4 अक्टूबर 2026 तक नागोया, जापान में होने वाले एशियन गेम्स में उन्हें 49 किलोग्राम वर्ग में खेलना होगा।
दो अलग-अलग वजन वर्गों में इतने कम समय के अंतराल में प्रतिस्पर्धा करना किसी भी एथलीट के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद कठिन होता है। मीराबाई ने खुद इसे “बड़ी चुनौती” बताया है।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 और एशियन गेम्स 2026 – Raipur News से जुड़ा रोडमैप
मीराबाई ने अपनी आगामी प्रतियोगिताओं के बारे में स्पष्ट रोडमैप साझा किया। उन्होंने कहा — “कॉमनवेल्थ गेम्स तक मैं 48 किलोग्राम में खेलूंगी, लेकिन एशियन गेम्स के लिए फिर से 49 किलोग्राम वर्ग में आना होगा।”
यह बयान उनकी प्रतिबद्धता और दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है। एशियन गेम्स 2026 उनके लिए सिर्फ एक और प्रतियोगिता नहीं, बल्कि एक दशक से अधूरे सपने को पूरा करने का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण अवसर है।
Raipur News पाठकों के लिए यह जानना उत्साहजनक है कि मीराबाई इस लक्ष्य के लिए अभी से पूरी तैयारी में जुटी हैं।
Raipur News – NCOE और SAI की भूमिका पर मीराबाई की विशेष प्रशंसा
मीराबाई ने नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (NCOE), खेलो इंडिया स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और SAI ट्रेनिंग सेंटर की भूमिका की जमकर तारीफ की।
उनके अनुसार इन संस्थानों में खिलाड़ियों को उच्चस्तरीय प्रशिक्षण, उचित पोषण और विश्वस्तरीय सुविधाएं मिल रही हैं। यह बुनियादी ढांचा भारतीय खेलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयों तक ले जाने में निर्णायक भूमिका निभा रहा है।
जनजातीय खिलाड़ियों के लिए मीराबाई का प्रेरक संदेश
मीराबाई ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की सराहना करते हुए कहा कि उत्तर-पूर्व और जनजातीय इलाकों में बेहद प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं, लेकिन उनके पास प्रदर्शन का मंच नहीं होता।
ऐसे आयोजन इन छिपी हुई प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाते हैं। मीराबाई स्वयं मणिपुर के एक छोटे से गांव से आती हैं, इसलिए उनका यह संदेश और भी ज्यादा प्रभावशाली और प्रामाणिक है।
Raipur News का सबसे प्रेरणादायक अध्याय
Raipur News में आज मीराबाई चानू ने जो बातें कहीं, वे हर भारतीय खेल प्रेमी के दिल को छू जाती हैं। तीन बार एशियन गेम्स से चोट की वजह से दूर रहने के बावजूद उनका हौसला टूटा नहीं है।
राष्ट्रीय चैंपियनशिप में तीन नए राष्ट्रीय रिकॉर्ड, 205 किलोग्राम का करियर-बेस्ट प्रदर्शन और 2026 एशियन गेम्स में पदक का संकल्प — यह सब मिलकर मीराबाई को भारत की सबसे दृढ़निश्चयी एथलीट बनाते हैं।
रायपुर की धरती पर उनके इस संकल्प की गूंज ने Raipur News को एक ऐतिहासिक पल में बदल दिया। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि भारत के जनजातीय खेल भविष्य की नींव है — और मीराबाई जैसी दिग्गज का इसमें शामिल होना इस नींव को और मजबूत बनाता है।
