ओनाकोना का सर्दियों में सफर: गंगरेल जलाशय और पहाड़ियों के बीच बसा छत्तीसगढ़ का नया पर्यटन आकर्षण

बालोद (छत्तीसगढ़):
धान के कटोरे के नाम से प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ की धरती सिर्फ खेती के लिए ही नहीं, बल्कि अपने प्राकृतिक सौंदर्य और शांत वातावरण के लिए भी जानी जाती है। इन्हीं खूबसूरत स्थलों में से एक है बालोद जिले का ओनाकोना गांव, जो अब छत्तीसगढ़ का नया पर्यटन आकर्षण (Onakona visit during winter season) बन चुका है।

सर्दियों के मौसम में जब पहाड़ों से आती ठंडी हवाएं मन को सुकून देती हैं, तब ओनाकोना की यात्रा आत्मा को भी ताजगी से भर देती है। गंगरेल जलाशय के किनारे बसा यह गांव चारों ओर से घने जंगलों और पहाड़ियों से घिरा हुआ है। सुबह की धुंध और जलाशय पर पड़ती सूर्य की सुनहरी किरणें यहां का नजारा किसी चित्रकला के दृश्य जैसी मोहक बना देती हैं।

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यहां नासिक के त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग की तर्ज पर बना भव्य मंदिर ओनाकोना का प्रमुख आकर्षण है। मंदिर की शांत और आध्यात्मिक आभा पर्यटकों को भीतर तक सुकून देती है। श्रद्धालु जहां पूजा-अर्चना में लीन रहते हैं, वहीं युवा फोटोग्राफी और रील बनाने में व्यस्त दिखते हैं।

ओनाकोना की यात्रा तब और खास बन जाती है जब पर्यटक स्थानीय मछुआरों की नावों में बोटिंग का आनंद लेते हैं। चप्पू की धीमी ताल और जलाशय की शांति हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देती है। यही नहीं, इस पर्यटन गतिविधि से स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं।

आज ओनाकोना केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि फोटोशूट, म्यूजिक वीडियो और प्री-वेडिंग शूट के लिए भी लोकप्रिय हो चुका है। यहां की हरियाली, मंदिर की भव्यता और झील की पृष्ठभूमि सोशल मीडिया कंटेंट के लिए परफेक्ट बैकड्रॉप बन गई है।

बालोद जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग ने ओनाकोना को विकसित करने के लिए सड़क, सोलर लाइट, पेयजल, शौचालय और बैठने की व्यवस्था जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। रायपुर से मात्र 106 किलोमीटर दूर स्थित यह स्थान अब छत्तीसगढ़ के पर्यटन नक्शे पर चमकता हुआ सितारा बन गया है।

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अगर आप सर्दियों में घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो “Onakona visit” जरूर करें — यहां की शांति, हरियाली और आध्यात्मिकता आपको एक अविस्मरणीय अनुभव देगी।