भिलाई से राष्ट्रीय मंच तक—पति का सपना पूरा करतीं संगीता लाहिरी ने ‘नियुद्धा सोसाइटी’ को बनाया बच्चों की ताकत

भिलाई 18 अगस्त 2025।
कभी एक छोटे से मैदान पर शुरू हुआ कराटे का सपना आज सैकड़ों बच्चों के लिए उम्मीद और आत्मविश्वास का जरिया बन चुका है। कहानी है स्व. सेंसई शैबल कुमार लाहिरी की, जिन्होंने आत्मरक्षा और शिक्षा को जोड़कर समाज को एक नई दिशा देने का काम किया।

सेंसई लाहिरी सिर्फ एक कराटे मास्टर ही नहीं थे, बल्कि बच्चों को अनुशासन, साहस और संघर्ष की ताकत सिखाने वाले मार्गदर्शक भी थे। छत्तीसगढ़ कराटे एसोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट रहने के बावजूद उनका सपना हमेशा यही था कि कराटे हर बच्चे की ज़िंदगी का हिस्सा बने। इसी सपने को साकार करने के लिए उन्होंने 2013 में ‘नियुद्धा सेल्फ डिफेंस एंड एजुकेशन सोसाइटी’ की स्थापना की।

🥋 शुरुआत मैदान से

2006 में जब लाहिरी ने सेक्टर-4 इस्पात क्लब और रिसाली-रांवा भाटा ग्राउंड में कराटे क्लास शुरू की थी, तब किसी ने नहीं सोचा था कि यही पहल आगे चलकर एक एनजीओ में बदलेगी। छोटे-छोटे बच्चों की टोलियां, ज़मीन पर बिछी चटाइयां और सेंसई लाहिरी की सख़्त लेकिन अपनापन भरी आवाज़—यही से नींव पड़ी।

❤️ पत्नी ने संभाला सपना

2013 में संस्था पंजीकृत हुई, लेकिन कुछ ही समय बाद नियति ने करवट बदली। सेंसई लाहिरी के निधन के बाद उनकी पत्नी संगीता लाहिरी ने संस्था की ज़िम्मेदारी उठाई। जो पहले महासचिव थीं, वे अध्यक्ष बनीं और पति का सपना आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। संगीता कहती हैं—

“ये सिर्फ कराटे नहीं, बल्कि बच्चों के लिए आत्मविश्वास का हथियार है। जब भी कोई बच्चा राष्ट्रीय स्तर पर जाता है, मुझे लगता है कि शैबल जी का सपना सच हो रहा है।”

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🎯 बच्चों को मिली पहचान

संस्था से जुड़े बच्चों ने सिर्फ खेलना नहीं सीखा बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। रायपुर के मयराम सुरजन स्कूल से वर्ष 2014-15 में हुए स्कूल गेम्स में खिलाड़ियों काला जांघेल, दुर्गा साहू, ज्योति गायकवाड़, सिया सेन और प्रतिभा केवट ने राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व किया।

अब तक संस्था के बच्चे खंडाला, नासिक, आगरा, बनारस और दिल्ली जैसी जगहों पर आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं।

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📍 आज कहां चल रही ट्रेनिंग

आज ‘नियुद्धा सोसाइटी’ की कक्षाएं भारत माता स्कूल, टाटीबंध (रायपुर), रिसाली ग्राउंड और सेक्टर-4 स्ट्रीट-8 स्थित कार्यालय से संचालित हो रही हैं। यहाँ न सिर्फ बच्चे बल्कि अभिभावक भी गर्व से जुड़ते हैं क्योंकि वे देखते हैं कि उनका बच्चा मजबूत, आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बन रहा है।

🌟 खेल से समाज तक

‘नियुद्धा सोसाइटी’ ने यह साबित किया है कि कराटे केवल प्रतियोगिता जीतने का साधन नहीं है। यह जीवन जीने की कला है—जहाँ हर बच्चा गिरने के बाद उठना और हर कठिनाई का सामना करना सीखता है।

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भिलाई और रायपुर की गलियों से निकलकर जब कोई बच्चा राष्ट्रीय मंच पर खड़ा होता है, तो वह सिर्फ अपनी जीत नहीं बल्कि सेंसई लाहिरी के अधूरे सपने को पूरा करता है।

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