Natural Jaggery Production ने सुकमा जिले के चिंदागर ब्लॉक के लिथिरास गांव में नई उम्मीद जगाई है। यहां डोला स्वयं सहायता समूह की महिलाएं जंगली खजूर यानी चिंद के रस से शुद्ध और प्राकृतिक गुड़ बना रही हैं। यह पहल केवल गुड़ बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की मजबूत कहानी भी है। गांव की महिलाएं अब अपने श्रम और कौशल से परिवार की आय बढ़ा रही हैं। साथ ही, “वोकल फॉर लोकल” अभियान को भी मजबूती मिल रही है।
Natural Jaggery Production से महिलाओं को नया सहारा
सुकमा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मुखुंद ठाकुर ने बताया कि महिलाओं को विधिवत प्रशिक्षण दिया गया। प्रशासन ने दंतेवाड़ा से प्रशिक्षकों को बुलाया। 20 से 30 महिलाओं को पेड़ों पर सही तरीके से कट लगाने और रस निकालने की प्रक्रिया सिखाई गई।
मुखुंद ठाकुर ने कहा कि उन्होंने खुद गुड़ का स्वाद चखा और उसकी गुणवत्ता उत्कृष्ट पाई। फिलहाल यह पहल छोटे स्तर पर शुरू हुई है। लेकिन अब इसे बड़े स्तर पर दोहराने की योजना है।
उन्होंने बताया कि सुकमा में चिंद के पेड़ प्रचुर मात्रा में हैं। वैज्ञानिक परीक्षण और खाद्य सुरक्षा प्रमाणन के बाद इस गुड़ को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बेचने की योजना है। साथ ही, सुकमा, मल्कानगिरी, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बाजारों में भी इसे पहुंचाया जाएगा।
डोला स्वयं सहायता समूह की प्रमुख अनु साह ने प्रशासन और मुख्यमंत्री का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह रोजगार का बड़ा अवसर है और गुड़ पूरी तरह प्राकृतिक है।
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पृष्ठभूमि: प्रशिक्षण से बाजार तक की तैयारी
लिथिरास गांव का डोला स्वयं सहायता समूह लंबे समय से आजीविका के नए साधन खोज रहा था। प्रशासन ने जब इस संभावना को पहचाना, तब प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया।
दंतेवाड़ा से आए प्रशिक्षकों ने पहले पेड़ की पहचान की। फिर कट लगाने और रस एकत्र करने की पूरी प्रक्रिया का प्रदर्शन किया। महिलाओं को खुद अभ्यास करने का मौका दिया गया।
अनिता नाग, जो वित्तीय साक्षरता समुदाय संसाधन व्यक्ति हैं, ने बताया कि गुड़ बनाने में किसी प्रकार की अतिरिक्त चीनी नहीं मिलाई जाती। केवल चिंद का रस उपयोग होता है।
व्यावसायिक संसाधन व्यक्ति आलिया भगत ने कहा कि समूह की सभी महिलाएं एकजुट होकर बड़े पैमाने पर उत्पादन की तैयारी कर रही हैं।
महिला स्वयं सहायता समूहों की जानकारी के लिए https://nrlm.gov.in पर विस्तृत विवरण उपलब्ध है।
Natural Jaggery Production: मुख्य तथ्य
- लिथिरास गांव में डोला स्वयं सहायता समूह सक्रिय।
- 20-30 महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण मिला।
- चिंद के रस से बिना मिलावट का गुड़ तैयार।
- खाद्य सुरक्षा प्रमाणन के बाद ऑनलाइन बिक्री की योजना।
- स्थानीय और पड़ोसी राज्यों में बाजार विस्तार की तैयारी।
असर और भविष्य की संभावनाएं
Natural Jaggery Production से गांव की महिलाओं को स्थायी आय का स्रोत मिल रहा है। पहले वे सीमित अवसरों पर निर्भर थीं। अब वे अपने कौशल से उत्पादन और बिक्री कर रही हैं।
यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर रही है। साथ ही, स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग हो रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि यह मॉडल सफल रहा, तो अन्य गांवों में भी इसे अपनाया जा सकता है। इससे बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित होगा।
आत्मनिर्भर भारत अभियान की जानकारी के लिए https://aatmanirbharbharat.mygov.in पर भी विवरण उपलब्ध है।
Natural Jaggery Production सुकमा की महिलाओं के लिए सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम बन रहा है। चिंद के रस से बना शुद्ध गुड़ न केवल स्वास्थ्यकर है, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता का प्रतीक भी है। प्रशासन के सहयोग और महिलाओं की मेहनत से यह पहल आगे बढ़ रही है। यदि इसी तरह प्रयास जारी रहे, तो Natural Jaggery Production ग्रामीण विकास की नई दिशा तय कर सकता है।
