मनरेगा विवाद: 5 बड़े आरोप, गर्मी से हुई तबाही

MGNREGA Row ने छत्तीसगढ़ विधानसभा में अचानक माहौल को गरमा दिया। जैसे ही मुद्दा उठा, सत्ता और विपक्ष आमने-सामने आ गए। इस बहस में गरीबों के अधिकार, रोजगार और केंद्र की नीतियां केंद्र में रहीं। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि नई योजना के जरिए मनरेगा की मूल भावना को कमजोर किया जा रहा है। वहीं भाजपा ने इसे राजनीतिक ड्रामा बताया। पूरे घटनाक्रम में नारेबाजी, स्थगन और बहिष्कार जैसे दृश्य देखने को मिले, जिससे सदन की कार्यवाही भी प्रभावित हुई।


MGNREGA Row पर विधानसभा में तीखी टकराव

MGNREGA Row को लेकर सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शून्यकाल में मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि 2005 में शुरू हुआ मनरेगा दुनिया के सबसे बड़े रोजगार कार्यक्रमों में शामिल है। इसके जरिए लाखों मजदूरों को काम मिला।

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अब ‘विकसित भारत – रोजगार और आजीविका मिशन’ (VBG-Ram G) के जरिए इसकी संरचना बदल रही है। उनके मुताबिक पहले मजदूरी का 100% खर्च केंद्र उठाता था, लेकिन अब इसमें बदलाव किया गया है।

दूसरी तरफ भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कांग्रेस पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष पहले से तय एजेंडा लेकर आया था। साथ ही, उन्होंने कांग्रेस पर विधानसभा का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया।

स्थिति तब और बिगड़ गई जब दोनों पक्षों ने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद सभापति धर्मलाल कौशिक ने कार्यवाही को पांच मिनट के लिए स्थगित कर दिया।

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Background: मनरेगा और नई योजना का विवाद

मनरेगा (MGNREGA) भारत में ग्रामीण रोजगार की सबसे बड़ी योजनाओं में से एक है। इसे 2005 में लागू किया गया था। इसका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को साल में कम से कम 100 दिन का रोजगार देना है।

हालांकि, हाल के वर्षों में केंद्र सरकार ने इसके ढांचे में बदलाव और नई योजनाओं को जोड़ने की कोशिश की है। इसी कड़ी में ‘विकसित भारत – रोजगार और आजीविका मिशन’ का नाम सामने आया।

कांग्रेस का आरोप है कि यह बदलाव गरीबों के अधिकारों को सीमित कर सकता है। जबकि भाजपा का कहना है कि यह योजना रोजगार को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए लाई जा रही है।

(External Reference: https://nrega.nic.in)

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Key Facts (MGNREGA Row)

  • MGNREGA Row छत्तीसगढ़ विधानसभा में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना
  • भूपेश बघेल ने केंद्र पर संरचना बदलने का आरोप लगाया
  • भाजपा के अजय चंद्राकर ने इसे राजनीतिक एजेंडा बताया
  • नारेबाजी के बाद सदन की कार्यवाही स्थगित हुई
  • कांग्रेस ने अंत में सदन का बहिष्कार किया

Impact और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

जब कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, तब नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने कहा कि यह मुद्दा सीधे गरीबों से जुड़ा है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर ऐसे मुद्दों पर चर्चा नहीं होगी, तो फिर सदन का क्या महत्व है।

इसके अलावा, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कवासी लखमा और उमेश पटेल ने भी इस मांग का समर्थन किया।

हालांकि सभापति ने इसे केंद्र का विषय बताते हुए स्थगन प्रस्ताव खारिज कर दिया। इसके बाद कांग्रेस विधायकों ने विरोध जताते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।

इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नया तनाव पैदा कर दिया है।


Conclusion

MGNREGA Row अब सिर्फ एक योजना का विवाद नहीं रहा, बल्कि यह राजनीतिक संघर्ष का बड़ा मुद्दा बन चुका है। जहां एक तरफ कांग्रेस इसे गरीबों के अधिकारों से जोड़ रही है, वहीं भाजपा इसे विकास और सुधार का कदम बता रही है। आने वाले समय में यह MGNREGA Row और भी बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है, खासकर जब रोजगार और आजीविका जैसे संवेदनशील विषय इससे जुड़े हैं।

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