Liquor Shops Closed on Holi in Durg: आम आदमी पार्टी की सख्त मांग, प्रशासन को चेतावनी

दुर्ग। Liquor Shops Closed on Holi in Durg की मांग को लेकर आम आदमी पार्टी की दुर्ग लोकसभा इकाई ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए होली के दिन जिले की सभी शराब दुकानों को पूर्णतः बंद रखने की सख्त मांग की है। पार्टी का कहना है कि रंगों का यह पावन पर्व भाईचारे, प्रेम और सौहार्द का प्रतीक है, लेकिन शराब की खुली बिक्री से हर वर्ष कई अप्रिय घटनाएं सामने आती हैं।

आम आदमी पार्टी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि प्रशासन इस मांग पर विचार नहीं करता, तो होली के दिन किसी भी कानून-व्यवस्था की स्थिति के लिए शासन स्वयं जिम्मेदार होगा।


होली और सामाजिक जिम्मेदारी का सवाल

होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि रिश्तों को मजबूत करने का अवसर भी है। बच्चे पिचकारी लेकर सड़कों पर निकलते हैं, महिलाएं पारंपरिक पकवान बनाती हैं और परिवार एक-दूसरे के घर जाकर रंग लगाते हैं।

लेकिन पिछले वर्षों में देखा गया है कि शराब की उपलब्धता ने इस त्योहार की पवित्रता को प्रभावित किया है। इसी संदर्भ में Liquor Shops Closed on Holi in Durg की मांग को सामाजिक सुरक्षा से जोड़कर उठाया गया है।

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आप ने रखे चार मजबूत तर्क

आम आदमी पार्टी ने प्रशासन के समक्ष चार प्रमुख बिंदुओं के साथ अपनी बात रखी:

सार्वजनिक सुरक्षा का मुद्दा

त्योहार के दिन नशे में धुत लोग अक्सर सड़क दुर्घटनाओं और झगड़ों का कारण बनते हैं। इससे आम नागरिकों, खासकर बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है।

पार्टी का कहना है कि Liquor Shops Closed on Holi in Durg का निर्णय कई संभावित हादसों को रोक सकता है।


पुलिस प्रशासन पर बढ़ता दबाव

होली जैसे बड़े त्योहार पर पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी शांति व्यवस्था बनाए रखना होती है। लेकिन शराब की दुकानें खुली रहने से हुड़दंग और विवाद की घटनाएं बढ़ जाती हैं।

आप नेताओं ने कहा कि शासन को पुलिस का सहयोग करना चाहिए, न कि शराब बिक्री से उनकी जिम्मेदारियां बढ़ानी चाहिए।


मातृशक्ति का सम्मान

त्योहार के दौरान महिलाओं और बेटियों के साथ छेड़छाड़ की घटनाएं अक्सर नशे की हालत में सामने आती हैं।

पार्टी ने कहा कि मातृशक्ति की गरिमा और सुरक्षा सर्वोपरि है। इसलिए Liquor Shops Closed on Holi in Durg केवल प्रशासनिक मांग नहीं, बल्कि सामाजिक सम्मान का प्रश्न है।


दोहरी नीति पर सवाल

आप नेताओं ने शासन की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ओर शराब बिक्री से राजस्व कमाया जाता है, वहीं दूसरी ओर ‘ड्रिंक एंड ड्राइव’ अभियान चलाकर आम आदमी को दंडित किया जाता है।

पार्टी ने कटाक्ष करते हुए पूछा,
“क्या शासन का राजस्व, नागरिकों की जान से बढ़कर है?”


प्रशासन को सौंपा ज्ञापन

दुर्ग जिलाधीश के नाम ज्ञापन सौंपते हुए पार्टी प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि होली के दिन शराब दुकानें बंद नहीं की गईं और कोई अप्रिय घटना होती है, तो उसकी नैतिक जिम्मेदारी शासन और जिला प्रशासन की होगी।

ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रदेश संगठन मंत्री संजीत विश्वकर्मा, प्रदेश सचिव देविंदर सिंह भाटिया, दुर्ग लोकसभा अध्यक्षा श्रीमती गीतेश्वरी बघेल, लोकसभा महासचिव ज्ञान प्रकाश तिवारी, जिला अध्यक्ष रवि साहू तथा अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।


क्या कहता है जनमानस?

स्थानीय नागरिकों का भी मानना है कि होली जैसे पर्व पर शांति और सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। कई परिवारों ने बताया कि वे बच्चों को लेकर बाहर निकलने में असहज महसूस करते हैं जब सड़कों पर नशे में लोग हुड़दंग करते हैं।

इसलिए Liquor Shops Closed on Holi in Durg की मांग केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि आम नागरिकों की भावना से जुड़ा विषय बन गया है।


कानून-व्यवस्था और सामाजिक संतुलन

त्योहारों के दौरान प्रशासन का मुख्य उद्देश्य सामाजिक समरसता बनाए रखना होता है। यदि एक दिन के लिए शराब दुकानें बंद रखी जाती हैं, तो इससे कानून-व्यवस्था को मजबूत करने में सहायता मिल सकती है।

विशेषज्ञों का भी मानना है कि त्योहारों के दौरान नियंत्रित वातावरण समाज के लिए अधिक सुरक्षित होता है।

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Liquor Shops Closed on Holi in Durg की मांग ने एक व्यापक सामाजिक बहस को जन्म दिया है। यह मुद्दा केवल राजस्व या राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा, महिला सम्मान और सामाजिक शांति का है।

अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए क्या निर्णय लेता है।

होली रंगों का त्योहार है — क्या यह सुरक्षित और सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाई जाएगी, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।