Lakhpati Didi: 1 आदिवासी महिला की प्रेरक सफलता कहानी

Lakhpati Didi की यह प्रेरक कहानी छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के एक छोटे से गांव से सामने आई है। ग्राम गढ़पिछवाड़ी की रहने वाली आदिवासी महिला सगो तेता ने संघर्ष से सफलता तक का अनोखा सफर तय किया है। कभी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने वाली सगो आज आत्मनिर्भर उद्यमी बन चुकी हैं। बिहान योजना और स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में नया सवेरा आया। मेहनत, आत्मविश्वास और सरकारी योजनाओं के सहारे आज वे पूरे क्षेत्र में Lakhpati Didi के रूप में जानी जाती हैं।


Lakhpati Didi: बिहान से मिली नई दिशा और आत्मनिर्भरता

Lakhpati Didi के रूप में पहचान बनाने वाली सगो तेता की सफलता ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। कांकेर जिला मुख्यालय से लगभग सात किलोमीटर दूर स्थित ग्राम गढ़पिछवाड़ी की रहने वाली सगो तेता ने अपने मजबूत इरादों से जिंदगी बदल दी।

उन्होंने गांव की अन्य महिलाओं के साथ मिलकर गायत्री स्व-सहायता समूह बनाया। इस समूह में कुल दस महिलाएं शामिल हैं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बिहान योजना के अंतर्गत 60 हजार रुपये की सामुदायिक निवेश राशि मिली। इस सहायता ने उनके जीवन की दिशा बदल दी।

सगो तेता बताती हैं कि पहले उनके खेत में सिंचाई की कोई व्यवस्था नहीं थी। खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर थी और साल में केवल एक ही फसल ली जा सकती थी। बाद में उन्होंने समूह से ऋण लेकर अपने खेत में बोर करवाया और मोटरपंप लगवाया।

अब उनके खेतों में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है। इसी कारण वे साल में दो फसलें ले पा रही हैं। इससे उनकी आय में बड़ा सुधार हुआ है और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।

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अभावों से संघर्ष और फिर सफलता

Lakhpati Didi बनने से पहले सगो तेता का जीवन कठिनाइयों से भरा था। परिवार की आय सीमित थी और खेती ही एकमात्र सहारा था।

सीमित संसाधनों और पारंपरिक खेती के कारण आय बहुत कम होती थी। बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्च की चिंता उन्हें हमेशा परेशान करती थी।

लेकिन जब उन्हें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और बिहान योजना के बारे में जानकारी मिली, तब उन्होंने इसे अवसर के रूप में देखा। उन्होंने गांव की महिलाओं को साथ लेकर स्व-सहायता समूह बनाया।

यहीं से उनकी जिंदगी का नया अध्याय शुरू हुआ। धीरे-धीरे उन्होंने कई आजीविका गतिविधियां शुरू कीं और अपने परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया।


Key Facts

  • Lakhpati Didi सगो तेता कांकेर जिले के ग्राम गढ़पिछवाड़ी की निवासी हैं।
  • उन्होंने गायत्री स्व-सहायता समूह बनाकर आजीविका गतिविधियां शुरू कीं।
  • बिहान योजना के तहत उन्हें 60 हजार रुपये की सामुदायिक निवेश राशि मिली।
  • अब वे मशरूम पालन, सब्जी उत्पादन और अन्य कार्यों से आय अर्जित कर रही हैं।
  • उनकी मासिक आय लगभग 18 से 20 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है।

कई महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा

Lakhpati Didi के रूप में सगो तेता की सफलता ने पूरे गांव में नई प्रेरणा पैदा की है। अब गढ़पिछवाड़ी गांव की कई महिलाएं भी स्व-सहायता समूहों से जुड़कर आजीविका गतिविधियों में भाग ले रही हैं।

सगो तेता ने मशरूम उत्पादन, छेना निर्माण, जैविक खाद तैयार करना, सब्जी उत्पादन और कपड़ों के विक्रय जैसे कई कार्य शुरू किए। उनकी मेहनत से आज वे हर महीने लगभग 18 से 20 हजार रुपये तक कमा रही हैं।

उन्होंने अपने तीनों बच्चों की पढ़ाई करवाई और दो बच्चों की शादी भी करवा दी। अब वे अपनी छोटी बेटी की शादी की तैयारी कर रही हैं।

सगो तेता महतारी वंदन योजना का भी लाभ ले रही हैं और उससे मिलने वाली राशि को भविष्य के लिए बचा रही हैं।

सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी के लिए
https://www.nrlm.gov.in
और
https://www.india.gov.in

जैसी आधिकारिक वेबसाइटों पर जानकारी उपलब्ध है।


Lakhpati Didi सगो तेता की कहानी यह दिखाती है कि सही अवसर और मजबूत इच्छाशक्ति से जिंदगी बदली जा सकती है। बिहान योजना और स्व-सहायता समूह के सहयोग से उन्होंने अभावों को अवसर में बदल दिया। आज वे न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि अपने गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन चुकी हैं। सगो तेता की यह प्रेरक यात्रा बताती है कि मेहनत, लगन और विश्वास से कोई भी महिला Lakhpati Didi बन सकती है।

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