ISBM University Degree Case में बिलासपुर हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। आईएसबीएम यूनिवर्सिटी की डिग्री को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने संबंधित डिग्रीधारकों की नियुक्ति पर फिलहाल रोक लगा दी है।
जस्टिस पीपी साहू की सिंगल बेंच ने यह अंतरिम आदेश पारित किया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि अगली सुनवाई तक उन अभ्यर्थियों को नियुक्ति आदेश जारी न किए जाएं, जिनके पास संबंधित यूनिवर्सिटी की विवादित डिग्री है।
राज्य सरकार सहित कई पक्षों को नोटिस
ISBM University Degree Case में अदालत ने राज्य सरकार, उच्च शिक्षा विभाग, निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) समेत अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है।
मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च से शुरू होने वाले सप्ताह में निर्धारित की गई है।
इस आदेश के बाद उन अभ्यर्थियों में चिंता बढ़ गई है, जिन्होंने उक्त डिग्री के आधार पर आवेदन किया था।
सात अभ्यर्थियों की याचिका
प्रियांशु दानी सहित सात अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि आईएसबीएम यूनिवर्सिटी द्वारा संचालित डिप्लोमा कोर्स निर्धारित शैक्षणिक मानकों को पूरा नहीं करता।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, शिकायतों के बाद 16 सितंबर 2025 को एक जांच समिति गठित की गई थी। समिति ने 9 अक्तूबर 2025 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि आईएसबीएम यूनिवर्सिटी का पीजीडीआरडी (PGDRD) पाठ्यक्रम अवैध है।
ऑर्डिनेंस नंबर 57 पर सवाल
ISBM University Degree Case में यह भी सामने आया है कि संबंधित प्रोग्राम यूनिवर्सिटी के ऑर्डिनेंस नंबर 57 के तहत संचालित किया जा रहा था।
हालांकि, यह ऑर्डिनेंस कॉमर्स और मैनेजमेंट फैकल्टी के डिप्लोमा कोर्स से संबंधित है, न कि रूरल डेवलपमेंट से।
याचिका में कहा गया कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के आयुक्त से इस विषय में स्पष्टीकरण मांगा गया था। जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर पाठ्यक्रम को अमान्य माना गया।
छात्रों और अभ्यर्थियों में असमंजस
कोर्ट के इस आदेश के बाद उन छात्रों और अभ्यर्थियों में असमंजस की स्थिति है, जिन्होंने उक्त डिग्री प्राप्त कर रोजगार की उम्मीद लगाई थी।
कई अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने निर्धारित नियमों के तहत प्रवेश लिया और परीक्षा उत्तीर्ण की। ऐसे में अब नियुक्ति पर रोक लगने से उनके भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।
अगली सुनवाई पर टिकी नजरें
ISBM University Degree Case की अगली सुनवाई 16 मार्च से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी।
इस दौरान संबंधित पक्षों को अपना जवाब दाखिल करना होगा। कोर्ट के अंतिम निर्णय से यह स्पष्ट होगा कि विवादित डिग्री की वैधता पर क्या अंतिम रुख अपनाया जाता है।
निष्कर्ष
बिलासपुर हाईकोर्ट का यह अंतरिम आदेश शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और मानकों के पालन के महत्व को रेखांकित करता है।
ISBM University Degree Case ने यह सवाल खड़ा किया है कि निजी विश्वविद्यालयों द्वारा संचालित पाठ्यक्रमों की निगरानी और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की प्रक्रिया कितनी प्रभावी है।
अब सभी की नजरें अदालत की अगली सुनवाई और अंतिम निर्णय पर टिकी हैं, जो सैकड़ों अभ्यर्थियों के भविष्य को प्रभावित कर सकता है।
