Funeral Feasts Protest: 73 वर्षीय का साहसी कदम, भावुक संदेश

Funeral Feasts Protest की यह कहानी छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा से सामने आई है। 73 वर्षीय चंद्रमणि रोहित दास ने समाज की एक परंपरा के खिलाफ अनोखा रास्ता चुना है। उन्होंने खुद को प्रतीकात्मक रूप से “स्वर्गीय” घोषित कर दिया। इतना ही नहीं, वे अपने नाम से पहले “स्वर्गीय” शब्द भी लिखते हैं। सफेद कपड़े पहनकर वे सुबह 11 बजे से रात 8 बजे तक चौराहों पर खड़े रहते हैं। उनके हाथ में एक तख्ती होती है, जिस पर लिखा है—“मृत्युभोज बंद करो।”


Funeral Feasts Protest के पीछे की सोच और संदेश

Funeral Feasts Protest के तहत चंद्रमणि रोहित दास जांजगीर के प्रमुख चौक-चौराहों पर खामोशी से खड़े रहते हैं। वे किसी से बातचीत नहीं करते। दरअसल उन्होंने मौन व्रत लिया है।

लोकल 18 से बातचीत में दास ने बताया कि उन्होंने “स्वर्गीय” शब्द इसलिए जोड़ा क्योंकि उनके अनुसार स्वर्ग वह स्थान है जहां सत्य, संयम और अच्छा आचरण हो। उनका मानना है कि जहां सत्य और अनुशासन है, वही स्वर्ग है। इसलिए वे अपने घर को भी स्वर्ग मानते हैं।

दास का कहना है कि वे उम्र के इस पड़ाव पर सभी को जवाब नहीं दे सकते। इसलिए उन्होंने पोस्टर के जरिए संदेश देने का तरीका चुना। वे मानते हैं कि मृत्युभोज एक सामाजिक अभिशाप है। यह परंपरा शोक में डूबे परिवार पर अतिरिक्त बोझ डालती है।

उनका तर्क है कि मृत व्यक्ति की आत्मा को इससे कोई लाभ नहीं होता। भगवान भी इससे प्रसन्न नहीं होते। बल्कि यह अंधविश्वास और सामाजिक दबाव को बढ़ाता है।

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जांजगीर से ओडिशा तक की तैयारी

चंद्रमणि रोहित दास ने इस अभियान की शुरुआत जांजगीर से की है। इसके बाद वे अकलतरा और बिलासपुर के गोल बाजार में भी खड़े होने की योजना बना रहे हैं।

उनका इरादा केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है। वे ओडिशा और अन्य राज्यों की राजधानियों में भी यह अभियान चलाना चाहते हैं। हालांकि वे केवल राज्य की राजधानियों में ही विरोध दर्ज कराएंगे।

दास का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए मृत्युभोज भारी खर्च बन जाता है। पहले ही परिवार शोक में डूबा होता है। मां रोती है, पत्नी शोक मनाती है और बच्चे पिता को खो देते हैं। ऐसे समय में भोज देना उन्हें अमानवीय लगता है।

सामाजिक सुधार आंदोलनों की जानकारी के लिए आप भारत सरकार की सामाजिक न्याय वेबसाइट देख सकते हैं:
https://socialjustice.gov.in


Key Facts: Funeral Feasts Protest

  • 73 वर्षीय चंद्रमणि रोहित दास ने खुद को “स्वर्गीय” घोषित किया।
  • सफेद कपड़े पहनकर रोज 11 से 8 बजे तक खड़े रहते हैं।
  • “मृत्युभोज बंद करो” तख्ती के जरिए संदेश देते हैं।
  • जांजगीर के बाद अकलतरा और बिलासपुर जाने की योजना।
  • ओडिशा समेत अन्य राज्यों की राजधानियों में अभियान चलाने का इरादा।

प्रभाव और सामाजिक प्रतिक्रिया

Funeral Feasts Protest ने स्थानीय लोगों का ध्यान खींचा है। कई लोग रुककर उनकी तख्ती पढ़ते हैं। हालांकि वे मौन रहते हैं, फिर भी उनका संदेश लोगों तक पहुंच रहा है।

कुछ लोग उनके साहस की सराहना कर रहे हैं। वहीं कुछ इसे परंपरा के खिलाफ कदम मानते हैं। फिर भी चर्चा शुरू हो चुकी है। यही उनका उद्देश्य भी है।

दास का बयान बेहद भावुक है। वे कहते हैं कि शोकाकुल परिवार के घर खाना खाना, उनके आंसुओं से बना भोजन खाने जैसा है। यह पंक्ति लोगों को सोचने पर मजबूर कर रही है।


छत्तीसगढ़ से शुरू हुआ Funeral Feasts Protest एक व्यक्ति का प्रयास जरूर है, लेकिन इसका संदेश व्यापक है। 73 साल की उम्र में चंद्रमणि रोहित दास ने समाज को आईना दिखाने की कोशिश की है। उनका मानना है कि सच्चा सम्मान सादगी में है, दिखावे में नहीं। अब देखना होगा कि Funeral Feasts Protest आने वाले समय में कितनी बड़ी सामाजिक बहस को जन्म देता है।

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