SDM आदेश के बाद भी नहीं हुई बेदखली – 21 पट्टाधारकों का चौंकाने वाला मामला सामने आया

Durg News – दुर्ग जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर मामला सामने आया है जिसने प्रशासनिक लापरवाही और नियमों की अनदेखी को एक बार फिर उजागर कर दिया है। राजीव गांधी आश्रय योजना के अंतर्गत जिन 21 लोगों को आवासीय उपयोग के लिए पट्टा जारी किया गया था, उन्होंने न केवल नियमों को ताक पर रखा, बल्कि आवंटित जमीन का व्यावसायिक उपयोग और क्रय-विक्रय तक कर डाला।

एसडीएम के आदेश के बावजूद अतिक्रमण आज भी जस का तस बना हुआ है, और नगर निगम दुर्ग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यह मामला अब जिला प्रशासन तक पहुँच चुका है।


Durg News: क्या है पूरा मामला?

News के अनुसार, यह मामला कलेक्टर कार्यालय दुर्ग के सामने आया है जहाँ राजीव गांधी आश्रय योजना के तहत 21 लोगों को आवासीय उद्देश्य से पट्टा जारी किया गया था।

योजना के नियम और शर्तें एकदम स्पष्ट थीं – पट्टे का उपयोग केवल आवास के लिए किया जाना था। लेकिन इन पट्टाधारकों ने नियमों को दरकिनार करते हुए जमीन का पूरा स्वरूप ही बदल दिया।

आवंटित जमीन पर व्यावसायिक गतिविधियाँ शुरू हो गईं और कुछ लोगों ने तो इस जमीन का अवैध रूप से क्रय-विक्रय तक कर दिया – जो कि पट्टे की शर्तों का सीधा उल्लंघन है।


राजीव गांधी आश्रय योजना – पट्टा किस शर्त पर मिला था?

राजीव गांधी आश्रय योजना एक सरकारी आवासीय योजना है जिसके अंतर्गत गरीब और जरूरतमंद लोगों को शासकीय भूमि पर आवास हेतु पट्टा दिया जाता है।

इस योजना के तहत जमीन का उपयोग केवल और केवल आवास के लिए होना अनिवार्य है। पट्टाधारक न तो जमीन को बेच सकते हैं, न किसी अन्य को हस्तांतरित कर सकते हैं, और न ही व्यावसायिक प्रयोजन के लिए उपयोग कर सकते हैं।

इन नियमों की अनदेखी करना न केवल पट्टे के रद्द होने का कारण बनती है, बल्कि यह एक दंडनीय उल्लंघन भी है।

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Durg News: नियमों का उल्लंघन – क्या-क्या हुआ गलत?

Durg में सामने आए इस मामले में पट्टाधारकों ने कई स्तरों पर नियमों का उल्लंघन किया:

जमीन का व्यावसायिक उपयोग: पट्टाधारकों ने आवासीय जमीन पर दुकानें और व्यावसायिक गतिविधियाँ शुरू कर दीं। यह योजना की मूल भावना के सीधे विरुद्ध है।

जमीन का क्रय-विक्रय: नियमों में स्पष्ट उल्लेख है कि पट्टे की जमीन को बेचा नहीं जा सकता। इसके बावजूद कई पट्टाधारकों ने आवंटित जमीन का अवैध रूप से क्रय-विक्रय किया।

अतिक्रमण: जमीन की सीमाओं का अतिक्रमण किया गया। शासकीय भूमि पर अनाधिकृत कब्जा जमाया गया।

पट्टे की शर्तों की अनदेखी: पट्टे में स्पष्ट रूप से लिखा था कि इसका उपयोग क्रय-विक्रय करने के लिए नहीं किया जा सकता, फिर भी नियमों की धज्जियाँ उड़ाई गईं।


SDM का बड़ा आदेश – फिर भी कार्रवाई शून्य

9 अगस्त 2021 को तत्कालीन एसडीएम नियम पायम ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया।

उन्होंने सभी 21 पट्टाधारकों की लीज निरस्त करने और अतिक्रमण हटाने का आदेश जारी किया। साथ ही नगर निगम दुर्ग को इस अतिक्रमण को हटाने के लिए निर्देशित किया गया।

लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि एसडीएम के इस आदेश के बावजूद आज तक कब्जा नहीं हटाया गया। नगर निगम की ओर से कोई ठोस एक्शन नहीं लिया गया और अतिक्रमणकारी आज भी शासकीय जमीन पर काबिज हैं।


निगम को दिया गया था एक माह का समय – गुजर गया साल

एसडीएम कार्यालय ने नगर निगम दुर्ग को इन सभी 21 पट्टों को निरस्त कर अतिक्रमण हटाने के लिए एक माह का समय दिया था।

यह समयसीमा कब की समाप्त हो चुकी है। कई वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन नगर निगम की ओर से कार्रवाई आज तक पूरी नहीं हुई।

इस दौरान इस विभाग में अनेक आयुक्त भी कार्य कर चुके हैं, लेकिन किसी ने भी इन पट्टों के निरस्तीकरण की ओर ध्यान नहीं दिया। यह प्रशासनिक उदासीनता का एक गंभीर उदाहरण है।


किन 21 लोगों को जारी किया गया था पट्टा?

जानकारी के मुताबिक, राजीव गांधी आश्रय योजना के नियमों के तहत जिन लोगों को पट्टा जारी किया गया था, उनमें शामिल हैं:

भैयालाल, यासमीन, नरोत्तम, मानसिंह, रामकुमार, पूनमचंद, देवकती, गायत्रीबाई, विद्या देवांगन, किंजेश सोनकर, खेमलाल, अहमद अली, राम खिलावन, निखिल, जगीला बानो, रजिया बेगम, बाफिर, सईदा बेगम, दिनेश गुप्ता, जगोती बाई, दालसिंह।

इन सभी को नियमानुसार आवास हेतु पट्टा दिया गया था। लेकिन इनमें से अनेक लोगों ने जमीन का व्यावसायिक उपयोग किया तथा आवंटित जमीन का क्रय-विक्रय भी किया।


Durg News: जिला प्रशासन से शिकायत – क्या है माँग?

Durg के इस मामले में अब जिला प्रशासन से औपचारिक शिकायत की गई है।

शिकायत में यह माँग की गई है कि:

  • सभी 21 पट्टाधारकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
  • अतिक्रमण को तत्काल हटाया जाए और शासकीय भूमि को खाली करवाया जाए।
  • नगर निगम दुर्ग को SDM के आदेश का पालन सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिया जाए।
  • जिन लोगों ने जमीन का अवैध क्रय-विक्रय किया है, उनके विरुद्ध भी कड़ी कानूनी कार्रवाई हो।

यह शिकायत अब कलेक्टर कार्यालय दुर्ग के सामने लंबित है।

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यह मामला क्यों है गंभीर?

शासकीय योजनाओं का दुरुपयोग

राजीव गांधी आश्रय योजना जैसी कल्याणकारी सरकारी योजनाएँ सही मायने में जरूरतमंद और गरीब लोगों के लिए बनाई जाती हैं। जब इन योजनाओं का दुरुपयोग होता है तो असली लाभार्थी वंचित रह जाते हैं।

प्रशासनिक आदेशों की अनदेखी

SDM जैसे वरिष्ठ अधिकारी के आदेश का वर्षों तक पालन न होना यह दर्शाता है कि प्रशासनिक तंत्र में कहीं न कहीं जवाबदेही की कमी है। यह लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है।

अवैध क्रय-विक्रय से उपजी समस्याएँ

शासकीय जमीन का अवैध क्रय-विक्रय एक ऐसी समस्या है जो आगे चलकर भूमि विवाद, न्यायालयीन मामले और सामाजिक तनाव को जन्म देती है। इसे शुरुआत में ही रोकना जरूरी था।


Durg News का यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही और सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। राजीव गांधी आश्रय योजना के तहत 21 लोगों को आवास हेतु जारी पट्टे नियमों के उल्लंघन के कारण निरस्त किए जा चुके हैं, लेकिन एसडीएम के स्पष्ट आदेश के बाद भी नगर निगम दुर्ग ने वर्षों में कोई कार्रवाई नहीं की। शासकीय भूमि पर अतिक्रमण और अवैध क्रय-विक्रय जैसी गंभीर अनियमितताओं के बाद भी जिम्मेदार अमला निष्क्रिय रहा। अब जब यह Durg News जिला प्रशासन के संज्ञान में आ चुकी है, तो उम्मीद है कि दोषियों के विरुद्ध कड़ी और शीघ्र कार्रवाई होगी तथा शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त किया जाएगा।

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