Cow Dung Holika ने इस बार दुर्ग शहर के सत्तीचौरा गंजपारा को पूरे जिले में अलग पहचान दी। जहां आमतौर पर होलिका दहन में लकड़ियां और अन्य सामग्री जलाई जाती हैं, वहीं यहां सिर्फ गोबर के कंडों से होली जलाई गई। यह पहल न सिर्फ पर्यावरण के लिए सकारात्मक रही, बल्कि 100 साल पुरानी परंपरा को भी मजबूती दी। सुबह से ही सैकड़ों लोग इस ऐतिहासिक होलिका दहन को देखने पहुंचे। ढोल-नगाड़ों और मंत्रोच्चार के बीच जब अग्नि प्रज्वलित हुई, तब पूरा माहौल भक्ति और उत्साह से भर गया।
Cow Dung Holika से पर्यावरण संरक्षण का संदेश
दुर्ग की धार्मिक पहचान रखने वाले दुर्ग के सत्तीचौरा गंजपारा में पिछले 10 वर्षों से सिर्फ गोबर के कंडों से होलिका दहन किया जा रहा है। इस वर्ष भी आयोजन समिति ने लगभग 4200 गोबर के कंडे, 2 किलो कपूर, 500 ग्राम लौंग, 500 ग्राम इलायची, गुड़ और नीम के सूखे पत्तों का उपयोग किया।
आयोजन के प्रमुख योगेंद्र शर्मा बंटी ने बताया कि उनका उद्देश्य प्रदूषण कम करना है। उन्होंने कहा कि लकड़ियों से उठने वाला धुआं स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। इसलिए Cow Dung Holika एक बेहतर विकल्प है।
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सुबह 8 बजे सबसे पहले स्थल पर गोबर का लेपन किया गया। फिर महिलाओं ने विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके बाद समिति के सदस्य पार्षद प्रतिभा सुरेश गुप्ता की दो मालवाहक गाड़ियों से कंडे एकत्रित कर लाए। लगभग 7 फीट ऊंची और 10 फीट चौड़ी होलिका तैयार की गई।
होलिका में भक्त प्रहलाद और होलिका माता की आकर्षक प्रतिमा रखी गई। अग्नि प्रज्वलित होने के बाद भक्त प्रहलाद की प्रतिमा सुरक्षित निकाली गई। यह दृश्य देखने सैकड़ों लोग पहुंचे।

पृष्ठभूमि: 100 वर्षों की परंपरा
सत्तीचौरा वासी पिछले 100 वर्षों से अधिक समय से सामूहिक रूप से होलिका दहन करते आ रहे हैं। हर वर्ष गंजपारा के सभी परिवार एक साथ इस पर्व को मनाते हैं।
समय के साथ जहां कई जगह परंपराएं बदल गईं, वहीं सत्तीचौरा ने अपनी परंपरा को नया रूप दिया। पिछले कुछ वर्षों से समिति पूरे शहर में जाकर अन्य होलिका समितियों से भी गोबर के कंडों का उपयोग करने की अपील करती है।
इस वर्ष उनकी अपील का असर दिखा। शहर के 20 से अधिक स्थानों पर सिर्फ गोबर के कंडों से होलिका जलाई गई। लगभग 10 हजार से अधिक कंडों की बिक्री हुई। इससे गौठान और गौशालाओं को आर्थिक सहयोग मिला।
पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी जानकारी के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वेबसाइट https://cpcb.nic.in पर विस्तृत विवरण उपलब्ध है।
Cow Dung Holika: मुख्य तथ्य
- 4200 गोबर के कंडों से होलिका दहन किया गया।
- 2 किलो कपूर, 500 ग्राम लौंग और इलायची का उपयोग हुआ।
- 7 फीट ऊंची और 10 फीट चौड़ी होलिका बनाई गई।
- 20 से अधिक स्थानों पर गोबर की होली जलाई गई।
- 10 हजार से अधिक कंडों की बिक्री से गौशालाओं को लाभ मिला।
प्रभाव और जन प्रतिक्रिया
इस अनूठी Cow Dung Holika को देखने सुबह से ही लोग पहुंचने लगे। पंडित सुनील पांडेय ने मंत्रोच्चार के साथ पूजन कराया। इसके बाद सभी महिलाओं और पुरुषों ने मिलकर आरती की।
ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच लोग एक-दूसरे से गले मिले। बच्चों ने बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। यह दृश्य सामाजिक एकता का प्रतीक बना।
पार्षद प्रतिभा सुरेश गुप्ता सहित कई जनप्रतिनिधि और सैकड़ों नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल की सराहना की। लोगों ने कहा कि यह परंपरा और पर्यावरण का सुंदर संगम है।
होलिका दहन और उसके धार्मिक महत्व की जानकारी के लिए https://www.india.gov.in पर भी विवरण देखा जा सकता है।
Cow Dung Holika ने साबित किया कि परंपरा और पर्यावरण साथ चल सकते हैं। सत्तीचौरा गंजपारा की यह पहल पूरे जिले के लिए प्रेरणा बनी। 100 साल पुरानी परंपरा को आधुनिक सोच से जोड़कर समाज ने सकारात्मक संदेश दिया। यदि अन्य स्थान भी इसी तरह Cow Dung Holika अपनाएं, तो प्रदूषण कम होगा और गौशालाओं को भी सहयोग मिलेगा। यही सच्चे अर्थों में जिम्मेदार और जागरूक होली है।
