छत्तीसगढ़ की आदिवासी महिला बनी उद्यमी, शुरू किया फ्लाई ऐश ईंट उद्योग

Chhattisgarh Tribal Woman Entrepreneur: कभी कचरे में फेंका गया एक फटा-पुराना कागज़… और उसी कागज़ ने छत्तीसगढ़ की एक आदिवासी महिला की पूरी जिंदगी की दिशा बदल दी। यह कहानी है कोरिया जिले के बैकुंठपुर विकासखंड के तेलगा गांव की रहने वाली अंजना ओरांव की, जिन्होंने संघर्ष, धैर्य और हिम्मत के बल पर खुद को एक साधारण कर्मचारी से सफल उद्यमी बना लिया।


🌱 कचरे से निकली उम्मीद की चिंगारी

साल 2017 में खड़गवां जनपद पंचायत कार्यालय में पार्ट-टाइम डाटा एंट्री ऑपरेटर के रूप में काम कर रहीं अंजना ओरांव को मात्र ₹4,000 मासिक वेतन मिलता था। घर चलाना मुश्किल था। एक दिन सफाई के बाद कूड़े के ढेर में पड़ा एक फटा कागज़ उनकी नजर में आया। उस पर लिखा था—
“प्रधानमंत्री सृजन स्वरोजगार योजना के तहत ऋण लेकर स्वरोजगार शुरू करें।”

यहीं से उनकी सोच बदल गई। उसी पल उन्होंने तय कर लिया कि अब वे भी अपना खुद का काम शुरू करेंगी।


🧱 फ्लाई ऐश ईंट उद्योग का चयन

शुरुआत आसान नहीं थी। समाज ने रोका, परिवार ने डराया, बैंकिंग प्रक्रिया ने थकाया। लेकिन अंजना रुकी नहीं।
जिला उद्योग केंद्र गईं, पोड़ी-बचरा क्षेत्र में फ्लाई ऐश ईंट यूनिट देखी और समझा कि यह व्यवसाय बिजली संयंत्रों, निर्माण कार्यों और स्थानीय संसाधनों से जुड़ा होने के कारण टिकाऊ है।


💪 संघर्ष, कर्ज और सफलता

कई बैंकों के चक्कर लगाने के बाद आखिरकार बैकुंठपुर के एक निजी बैंक से ₹30 लाख का लोन स्वीकृत हुआ।
मशीनें कटघोरा से मंगाईं, कोरबा से फ्लाई ऐश लिया गया, शेड बनाया गया और स्थानीय स्तर पर रेत-सीमेंट की व्यवस्था की गई।

अगस्त 2025 में “अंजना एंटरप्राइजेज” की शुरुआत हुई।
अब तक यूनिट से 80,000 से अधिक फ्लाई ऐश ईंटें बन चुकी हैं। हर महीने करीब ₹60,000 की EMI नियमित रूप से चुकाई जा रही है।


🌾 घर, खेती और कारोबार – तीनों की जिम्मेदारी

अंजना ओरांव आज न सिर्फ उद्यमी हैं, बल्कि किसान भी हैं। परिवार के साथ चार एकड़ जमीन पर धान और गेहूं की खेती भी करती हैं। बच्चों, बुजुर्गों और व्यवसाय—तीनों जिम्मेदारियों को संतुलन के साथ निभा रही हैं।


📈 भविष्य की बड़ी योजना

अब उनका लक्ष्य है—
➡️ रोज़ाना 15,000 ईंट उत्पादन क्षमता
➡️ ₹6–7 लाख मासिक टर्नओवर
➡️ यूनिट का विस्तार और रोजगार सृजन


🏛️ प्रशासन ने भी सराहा साहस

कोरिया कलेक्टर चंदन त्रिपाठी ने अंजना को महिला सशक्तिकरण की मिसाल बताया। उन्होंने कहा—
अंजना उन महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं जो संसाधनों की कमी का बहाना बनाकर खुद को रोक लेती हैं। सरकारी योजनाओं का सही उपयोग करके उन्होंने आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है।


🌸 कचरे से पहचान तक का सफर

अंजना ओरांव खुद कहती हैं—
“कचरे में मिले उस कागज़ ने मुझे मेरी पहचान दी। मैंने फॉर्म भरे, अस्वीकृति झेली, इंतज़ार किया और ईंट-दर-ईंट अपनी किस्मत बना ली।”


यह सिर्फ एक कहानी नहीं, एक संदेश है

Chhattisgarh Tribal Woman Entrepreneur की यह कहानी सिर्फ सफलता की नहीं, बल्कि हिम्मत, सोच और आत्मनिर्भर भारत की सच्ची तस्वीर है।
यह साबित करती है कि कभी-कभी बदलाव की शुरुआत वहीं से होती है, जहां लोग देखना भी जरूरी नहीं समझते।