Breaking News यह है कि भारत सरकार ने सोशल मीडिया पर असहमति की आवाज़ों को दबाने के लिए एक व्यापक अभियान शुरू किया है — और इस बार हथियार बना है सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम में किया गया नया संशोधन।
Breaking News: क्या है पूरा मामला?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सैकड़ों अकाउंट्स और पोस्ट्स को ब्लॉक किया है। यह कार्रवाई इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की “कानूनी मांगों” के नाम पर की गई है।
इन ब्लॉकिंग ऑर्डर्स के बारे में MeitY द्वारा सख्त गोपनीयता बरती जाती है, और इसका सबूत तब सामने आया जब उपयोगकर्ताओं ने X पर मिले टेकडाउन नोटिस सार्वजनिक किए।
हैरान करने वाली बात यह है कि एक यूज़र ने शिकायत की कि “हर दसवीं पोस्ट” प्रतिबंधित कर दी गई है। ब्लॉक किए गए अधिकांश अकाउंट्स में एक बात समान थी — वे सभी मोदी सरकार की आलोचना करते थे।
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किन-किन अकाउंट्स को किया गया ब्लॉक?
29 मार्च 2026 को फैक्ट-चेकर और Alt News के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर ने बताया कि IT Act की धारा 69A के तहत सरकारी आदेश मिलने के बाद X पर उनकी कई पोस्ट भारत में ब्लॉक कर दी गईं।
हाल ही में कॉमेडियन पुलकित मानी का एक Instagram वीडियो, जिसमें PM मोदी और विदेशी नेताओं की बातचीत पर व्यंग्य किया गया था, लाखों व्यूज़ के बाद भारत सरकार की “कानूनी मांग” पर Meta ने हटा दिया।
एक पोस्ट जिसमें मोदी को “बुरे स्वाद” में दर्शाया गया था, उसे भी ब्लॉक किया गया। Internet Freedom Foundation ने इसे “सोशल मीडिया सेंसरशिप का खतरनाक विस्तार” बताया।
पत्रकार, एक्टिविस्ट, कार्टूनिस्ट और कॉमेडियन — सभी इस डिजिटल कार्रवाई के निशाने पर आए।
IT Act में नए संशोधन — 5 चौंकाने वाले बदलाव
Breaking News यह है कि 30 मार्च 2026 को MeitY ने IT Rules 2021 में संशोधन के नए मसौदे जारी किए, जिन पर 14 अप्रैल 2026 तक जनता से सुझाव मांगे गए हैं।
यह मसौदा न केवल सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज़ बल्कि उन आम यूज़र्स तक भी सरकारी नियंत्रण का विस्तार करता है जो समाचार और सामयिक सामग्री ऑनलाइन साझा करते हैं।
इन संशोधनों के 5 प्रमुख बदलाव इस प्रकार हैं:
1. ब्लॉकिंग अधिकारों का विकेंद्रीकरण
अक्टूबर 2024 में सरकार ने Sahyog प्लेटफॉर्म लॉन्च किया, जिससे टेकडाउन की मांग करने का अधिकार केंद्र और राज्य सरकार की सभी एजेंसियों, यहाँ तक कि जिला स्तर के अधिकारियों और पुलिस को भी मिल गया।
2. कंटेंट हटाने की समय सीमा में भारी कटौती
पहले सोशल मीडिया कंपनियों को 36 घंटे मिलते थे। नए नियमों के तहत यह समय सिर्फ 2-3 घंटे कर दिया गया है — बिना कंटेंट क्रिएटर को कोई नोटिस दिए।
3. यूज़र-जनरेटेड न्यूज़ कंटेंट पर नया शिकंजा
प्रस्तावित संशोधन सरकार के नियंत्रण को न केवल इंटरमीडियरीज़ बल्कि उन आम यूज़र्स तक भी बढ़ाते हैं जो समाचार सामग्री ऑनलाइन साझा करते हैं, और इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म्स यूज़र-जनरेटेड कंटेंट के लिए सीधे ज़िम्मेदार हो सकते हैं।
4. एडवाइज़री को कानूनी बाध्यता
Rule 3(4) के तहत इंटरमीडियरीज़ को सरकार द्वारा जारी एडवाइज़री, SOPs और दिशानिर्देशों का पालन करना होगा, अन्यथा वे IT Act की धारा 79 के तहत मिली कानूनी सुरक्षा खो देंगे।
5. सूचना और प्रसारण मंत्रालय का दायरा बढ़ा
सोशल मीडिया क्रिएटर्स, यूट्यूबर्स और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स अब सूचना और प्रसारण मंत्रालय की निगरानी में आएंगे — वही नियम जो पत्रकारों पर लागू होते हैं।
⚠️ Disclaimer: यह आर्टिकल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी, डिजिटल अधिकार संस्थाओं की रिपोर्ट्स और मीडिया स्रोतों पर आधारित है। यह किसी राजनीतिक दल या विचारधारा का समर्थन नहीं करता।
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Breaking News — 3 घंटे का नया नियम: क्यों है यह खतरनाक?
Tech Policy Press के फेलो और Internet Freedom Foundation के पूर्व कार्यकारी निदेशक प्रतीक वाघरे ने इस नए नियम पर गहरी चिंता जताई है।
उनके अनुसार: “पहले 36 घंटे मिलते थे — अब सिर्फ 3 घंटे। प्लेटफॉर्म्स के पास पोस्ट की कानूनी वैधता जाँचने का समय ही नहीं बचेगा। वे बिना सोचे-समझे कंटेंट हटा देंगे।”
IT Rules 2021 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऐसे नोटिस मिलने के घंटों के भीतर कंटेंट हटाना होता है, अन्यथा वे कानूनी सुरक्षा खो देते हैं।
MediaNama के संस्थापक और डिजिटल अधिकार कार्यकर्ता निखिल पाहवा ने कहा: “कोई सरकारी अधिकारी एक सुबह उठेगा, कोई Tweet या YouTube वीडियो देखेगा जो उसे पसंद नहीं आएगा, और हटाने का आदेश दे देगा — इसकी कोई पारदर्शिता नहीं है।”
नए नियम एक ऐसा डिजिटल वातावरण बना रहे हैं जहाँ प्लेटफॉर्म्स “अनुपालन एजेंट” और नागरिक “सतर्क प्रतिभागी” बन जाएंगे, जो खुले संवाद के बजाय प्रत्याशित अनुपालन से संचालित होगा।
⚠️ Disclaimer: यह आर्टिकल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी, डिजिटल अधिकार संस्थाओं की रिपोर्ट्स और मीडिया स्रोतों पर आधारित है। यह किसी राजनीतिक दल या विचारधारा का समर्थन नहीं करता।
“सेंसरशिप का इन्फ्रास्ट्रक्चर” — विशेषज्ञों की चेतावनी
पाहवा का कहना है कि ये नए कानून भारत में “सेंसरशिप के इन्फ्रास्ट्रक्चर” की नींव रख रहे हैं।
“यह व्यवस्थागत और व्यापक है — और इसे धीरे-धीरे टुकड़ों में बनाया जा रहा है, बिना हमें एहसास हुए।”
IFF ने कहा, “हम अनियंत्रित कार्यकारी शक्ति के निरंतर विस्तार से चिंतित हैं… ये कदम डिजिटल अधिनायकवाद की बू आते हैं।”
वाघरे ने यह भी चेताया कि नई अपारदर्शिता से व्यंग्यात्मक कार्टून और पत्रकारिता जैसी वैध सामग्री को गैरकानूनी गतिविधि के साथ मिला दिया जाएगा।
“अभी बहुत सारा कंटेंट हटाया जा रहा है — हम यह नहीं जान सकते कि क्या वाकई समस्याग्रस्त है और क्या सिर्फ किसी का व्यंग्य, क्योंकि सरकार बताएगी नहीं।”
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सोशल मीडिया क्रिएटर्स पर नया शिकंजा — Breaking News
2014 से 2022 के बीच, टेकडाउन ऑर्डर 14 गुना बढ़ गए — 471 से बढ़कर 6,775 तक। 2022 के बाद का डेटा RTI के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा छूट का हवाला देकर नकार दिया गया।
2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक IT Act की धारा 79(3)(b) के तहत 1,11,185 ऑनलाइन कंटेंट पीस ब्लॉक किए जा चुके थे।
पाहवा के अनुसार, पिछले एक दशक में स्वतंत्र पत्रकारिता YouTube और सोशल मीडिया पर शिफ्ट हो गई थी क्योंकि वे अब तक सूचना और प्रसारण मंत्रालय के दायरे से बाहर थे।
“यह अब नाटकीय रूप से बदलने वाला है।”
Chhattisgarh और देशभर के नागरिकों पर क्या होगा असर?
छत्तीसगढ़ में रायपुर, भिलाई, बिलासपुर, दुर्ग सहित पूरे राज्य के लाखों सोशल मीडिया यूज़र्स, युवा कंटेंट क्रिएटर्स, पत्रकार और एक्टिविस्ट इन नए नियमों से सीधे प्रभावित होंगे।
स्थानीय पत्रकारों और ब्लॉगर्स पर खतरा
अब कोई भी यूज़र जो सामयिक खबरें या सरकारी नीतियों पर टिप्पणी शेयर करता है, वह इन नए नियमों के दायरे में आ सकता है।
यूट्यूबर्स और इन्फ्लुएंसर्स भी निशाने पर
IFF ने इन संशोधनों को ‘डिजिटल अधिनायकवाद’ की संज्ञा दी है। छत्तीसगढ़ के लोकल यूट्यूब चैनल्स जो प्रशासनिक मुद्दों पर बात करते हैं, उन्हें अब अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता — संविधान का अनुच्छेद 19
भारत का संविधान अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देता है। लेकिन ये नए नियम उस अधिकार की व्यावहारिक सीमाएं तेज़ी से संकुचित कर रहे हैं।
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Breaking News जो हर भारतीय को जाननी चाहिए
यह Breaking News सिर्फ दिल्ली या किसी राजनीतिक दल की नहीं है — यह हर उस भारतीय नागरिक की खबर है जो इंटरनेट पर अपनी बात कहता है।
नए IT Act संशोधन भारत में डिजिटल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अब तक का सबसे बड़ा खतरा बन सकते हैं। 2-3 घंटे की टेकडाउन विंडो, ब्लॉकिंग अधिकारों का विकेंद्रीकरण, और सोशल मीडिया क्रिएटर्स पर पत्रकारिता नियमों का विस्तार — ये सब मिलकर एक ऐसी व्यवस्था बना रहे हैं जिसमें आलोचना, व्यंग्य और स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए जगह सिकुड़ती जा रही है।
जैसा निखिल पाहवा ने कहा: “लोग इन नियमों को अंतिम समझ रहे हैं — मैं इसे एक चेकपॉइंट मान रहा हूँ।”
छत्तीसगढ़ के रायपुर, भिलाई, बिलासपुर और दुर्ग सहित देशभर के नागरिकों को इस Breaking News पर नज़र रखनी चाहिए और अपने डिजिटल अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिए।
⚠️ Disclaimer: यह आर्टिकल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी, डिजिटल अधिकार संस्थाओं की रिपोर्ट्स और मीडिया स्रोतों पर आधारित है। यह किसी राजनीतिक दल या विचारधारा का समर्थन नहीं करता।
