Strait of Hormuz Crisis: 80,800 टन तेल लेकर निकला जहाज

Strait of Hormuz Crisis के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह बंदरगाह से 80,800 मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर एक भारतीय जहाज रविवार को सुरक्षित भारत के लिए रवाना हो गया। यह वही बंदरगाह है जहां एक दिन पहले ड्रोन हमला और आग लगने की घटना हुई थी। इसके बावजूद तेल लोडिंग की प्रक्रिया दोबारा शुरू कर दी गई। भारतीय सरकार ने बताया कि जहाज पर मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। हालांकि क्षेत्र में जारी सैन्य तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई है।


Strait of Hormuz Crisis: फुजैराह से भारत के लिए रवाना हुआ तेल जहाज

Strait of Hormuz Crisis के बीच भारतीय ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक अहम अपडेट सामने आया है। भारत के झंडे वाला तेल टैंकर जग लाड़की संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह टर्मिनल से 80,800 मीट्रिक टन मुर्बन क्रूड ऑयल लेकर भारत के लिए रवाना हो गया।

यह जहाज उस समय तेल लोड कर रहा था जब फुजैराह के टर्मिनल पर ड्रोन हमला हुआ और आग लग गई। इसके बावजूद जहाज और उस पर सवार भारतीय नाविक सुरक्षित रहे। भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इसकी पुष्टि की।

फुजैराह, जो कि Strait of Hormuz के बाहर स्थित है, संयुक्त अरब अमीरात के मुर्बन कच्चे तेल के निर्यात का एक बड़ा केंद्र है। यहां से रोज करीब 10 लाख बैरल तेल दुनिया के अलग-अलग देशों में भेजा जाता है। यह मात्रा वैश्विक तेल मांग का लगभग 1 प्रतिशत है।

हालांकि शनिवार को हुए ड्रोन हमले के बाद कुछ समय के लिए तेल लोडिंग गतिविधियां रोक दी गई थीं। बाद में सुरक्षा जांच के बाद ऑपरेशन दोबारा शुरू किया गया।

भारतीय अधिकारियों ने कहा कि जहाज की आवाजाही सामान्य है और चालक दल पूरी तरह सुरक्षित है।

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क्यों बढ़ा Strait of Hormuz Crisis

Strait of Hormuz Crisis की जड़ें मध्य-पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव में छिपी हैं। 28 फरवरी को United States और Israel ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए।

इसके बाद Iran ने जवाबी कदम उठाते हुए इस रणनीतिक जलमार्ग में जहाजों की आवाजाही पर सख्ती कर दी। यही जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और समुद्री एलएनजी आपूर्ति इसी रास्ते से गुजरती है। इसलिए यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार को तुरंत प्रभावित करता है।

हालांकि हाल ही में ईरान ने कुछ भारतीय जहाजों को अपवाद के तौर पर इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दी है। इसी कारण कुछ जहाज अब धीरे-धीरे भारत की ओर बढ़ रहे हैं।


Key Facts

  • भारतीय जहाज जग लाड़की 80,800 मीट्रिक टन मुर्बन क्रूड लेकर भारत के लिए रवाना हुआ।
  • फुजैराह बंदरगाह पर ड्रोन हमला और आग के बाद कुछ समय के लिए तेल लोडिंग रुकी।
  • फुजैराह से रोज लगभग 10 लाख बैरल तेल निर्यात होता है।
  • दो भारतीय एलपीजी जहाज भी स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पार कर भारत की ओर बढ़ रहे हैं।
  • वैश्विक तेल और एलएनजी आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत इसी मार्ग से गुजरता है।

प्रतिक्रियाएं

Strait of Hormuz Crisis का असर भारत समेत कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है।

भारत के विदेश मंत्रालय ने बताया कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के पश्चिम में फंसे 22 भारतीय जहाजों के लिए सुरक्षित रास्ता तलाशा जा रहा है। भारत लगातार क्षेत्रीय देशों से संपर्क बनाए हुए है।

इसी बीच दो भारतीय एलपीजी जहाज भी सुरक्षित तरीके से इस जलमार्ग को पार कर चुके हैं। इन जहाजों में लगभग 92,712 मीट्रिक टन एलपीजी है।

इनमें से एक जहाज 16 मार्च को गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पहुंचेगा। दूसरा जहाज 17 मार्च को कांडला बंदरगाह पहुंचेगा।

ऊर्जा विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह संकट लंबा चला तो वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। इससे भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।

अधिक जानकारी के लिए देखें:
https://www.reuters.com
https://www.iea.org


Strait of Hormuz Crisis के बीच भारतीय जहाज का सुरक्षित रवाना होना राहत की खबर है। हालांकि क्षेत्र में तनाव अभी भी बरकरार है। अगर स्थिति और बिगड़ती है तो वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है।

इसलिए आने वाले दिनों में Strait of Hormuz Crisis न केवल मध्य-पूर्व बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक अहम मुद्दा बना रहेगा।

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