SC ST Act Cases: 2455 मामले, 5 चौंकाने वाले आंकड़े सामने

SC ST Act Cases को लेकर छत्तीसगढ़ विधानसभा में गुरुवार को एक अहम खुलासा हुआ। सरकार ने बताया कि 1 जनवरी 2023 से 16 फरवरी 2026 के बीच राज्य में अनुसूचित जाति और जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत कुल 2455 मामले दर्ज हुए। इन मामलों में बड़ी संख्या दुष्कर्म और हत्या जैसे गंभीर अपराधों की है। आंकड़े सामने आने के बाद सदन में चर्चा तेज हो गई। वहीं सरकार ने बताया कि अधिकांश मामलों में चालान अदालत में पेश किए जा चुके हैं और पीड़ितों को मुआवजा देने की प्रक्रिया भी चल रही है।


SC ST Act Cases: विधानसभा में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

SC ST Act Cases को लेकर यह जानकारी विधानसभा के प्रश्नकाल में सामने आई। भारतीय जनता पार्टी के विधायक पुन्नूलाल मोहले ने सरकार से पूछा कि वर्ष 2023 से फरवरी 2026 तक इस कानून के तहत कितने मामले दर्ज हुए।

इस पर गृह विभाग का जिम्मा संभाल रहे उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस अवधि में कुल 2455 मामले दर्ज किए गए। इनमें 1013 मामले दुष्कर्म के हैं, जो कुल मामलों का लगभग 41 प्रतिशत है।

इसके अलावा 73 हत्या के मामले, 380 मारपीट के मामले, 60 गंभीर चोट के मामले और 30 अपहरण के मामले दर्ज किए गए।

जिला स्तर पर देखें तो जांजगीर-चांपा में सबसे अधिक 168 मामले दर्ज हुए। इसके बाद बलरामपुर में 165 मामले सामने आए।

सरकार ने बताया कि राज्य के 33 जिलों में से 8 जिलों में 100 से ज्यादा मामले दर्ज हुए हैं।

उपमुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि 2269 मामलों में अदालत में चालान पेश किया जा चुका है। वहीं 166 मामलों में जांच अभी जारी है।

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कानून से जुड़ी विस्तृत जानकारी यहां पढ़ सकते हैं:
https://socialjustice.gov.in

क्या है अत्याचार निवारण अधिनियम

SC ST Act Cases से जुड़ा यह कानून वर्ष 1989 में लागू किया गया था। इसका उद्देश्य अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों के खिलाफ होने वाले अत्याचार को रोकना है।

इस कानून के तहत यदि किसी व्यक्ति पर जातिगत आधार पर हमला, अपमान या हिंसा होती है, तो आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है।

इसके अलावा इस अधिनियम में पीड़ितों को आर्थिक सहायता और सुरक्षा देने का भी प्रावधान है।

छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में जहां बड़ी संख्या में अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति समुदाय रहते हैं, वहां यह कानून सामाजिक न्याय के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

सरकार के अनुसार इस कानून के तहत दर्ज मामलों में पीड़ितों को समय पर न्याय और मुआवजा देने की कोशिश की जा रही है।

अधिक जानकारी के लिए देखें:
https://tribal.nic.in


Key Facts

  • 2023 से फरवरी 2026 तक 2455 मामले दर्ज
  • कुल मामलों में 1013 दुष्कर्म और 73 हत्या के केस
  • 2269 मामलों में अदालत में चालान पेश
  • 166 मामलों में जांच अभी जारी
  • 1647 मामलों में 28 करोड़ रुपये से अधिक मुआवजा दिया गया

पीड़ितों को मिला मुआवजा, कई मामलों में प्रक्रिया जारी

SC ST Act Cases के संदर्भ में विधायक पुन्नूलाल मोहले ने यह भी पूछा कि पीड़ितों को मुआवजा देने का क्या प्रावधान है।

इस पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि कानून के तहत पीड़ितों को आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था है।

सरकार के अनुसार 16 फरवरी तक 1647 मामलों में मुआवजा दिया जा चुका है। इस पर कुल 28 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च हुई है।

हालांकि 670 मामलों में मुआवजा अभी लंबित है। इन मामलों में राशि जारी करने के लिए जनजातीय विकास समिति से मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है।

सरकार का कहना है कि मंजूरी मिलते ही बाकी पीड़ितों को भी जल्द मुआवजा दिया जाएगा।


कुल मिलाकर SC ST Act Cases के आंकड़े यह दिखाते हैं कि छत्तीसगढ़ में इस कानून के तहत बड़ी संख्या में मामले दर्ज हो रहे हैं। हालांकि सरकार का दावा है कि अधिकांश मामलों में चालान पेश कर दिए गए हैं और पीड़ितों को मुआवजा भी दिया जा रहा है। फिर भी विशेषज्ञ मानते हैं कि SC ST Act Cases के आंकड़े समाज में जागरूकता और सख्त कानून की जरूरत को लगातार याद दिलाते हैं।

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