RTE Reimbursement: 1 बड़ा विवाद, कड़ा ऐलान

RTE Reimbursement को लेकर छत्तीसगढ़ में निजी स्कूलों ने बड़ा कदम उठाया है। लंबे समय से लंबित मांगों पर सरकार की चुप्पी से नाराज़ स्कूल संचालकों ने गैर-सहयोग आंदोलन की घोषणा की है। उनका कहना है कि गरीब बच्चों को पढ़ाने का खर्च बढ़ रहा है, लेकिन प्रतिपूर्ति राशि वर्षों से नहीं बढ़ाई गई। ऐसे में अब स्कूल शिक्षा विभाग के कामों में सहयोग नहीं किया जाएगा। यह फैसला नए सत्र की प्रवेश प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकता है।


RTE Reimbursement पर गैर-सहयोग का ऐलान

Chhattisgarh Private School Management Association के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने स्पष्ट कहा कि RTE Reimbursement बढ़ाए बिना सहयोग संभव नहीं। उन्होंने बताया कि गैर-सहयोग का मतलब है कि निजी स्कूल अब स्कूल शिक्षा विभाग के किसी पत्र, नोटिस या आदेश का जवाब नहीं देंगे।

उन्होंने कहा कि विभाग अक्सर आरटीई के तहत दाखिला लेने वाले छात्रों की प्रगति रिपोर्ट और ऑडिट से जुड़ी जानकारी मांगता है। अब स्कूल यह जानकारी नहीं देंगे। साथ ही, सरकारी आयोजनों में स्कूल बसें भी उपलब्ध नहीं कराई जाएंगी।

आरटीई प्रावधानों के अनुसार, निजी स्कूलों में प्रवेश स्तर की 25 प्रतिशत सीटें कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए आरक्षित होती हैं। लेकिन स्कूल संचालकों का कहना है कि प्रतिपूर्ति राशि 2012 से संशोधित नहीं हुई।

जगदलपुर इकाई के उपाध्यक्ष नीलोत्पल दत्ता ने कहा कि प्राथमिक कक्षाओं के लिए 7,000 रुपये से बढ़ाकर 18,000 रुपये, माध्यमिक के लिए 11,500 से 22,000 और उच्चतर माध्यमिक के लिए 15,000 से 25,000 रुपये प्रति छात्र प्रति वर्ष किया जाए।

आरटीई कानून की जानकारी के लिए भारत सरकार की आधिकारिक वेबसाइट https://education.gov.in देखी जा सकती है।


यह भी पढ़ें: Rajya Sabha Candidate: 1 दमदार नाम, बड़ी रणनीति


पृष्ठभूमि: क्यों बढ़ी नाराज़गी

छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में 6,844 निजी स्कूल संचालित हैं। इन स्कूलों में प्रवेश स्तर पर 19,886 सीटें आरटीई के तहत आरक्षित हैं। हर वर्ष फरवरी से मार्च तक पंजीयन और नोडल सत्यापन की प्रक्रिया चलती है।

इस वर्ष 16 फरवरी से 31 मार्च तक पंजीयन प्रक्रिया जारी है। इसके बाद लॉटरी और स्कूल आवंटन की प्रक्रिया होगी। यदि RTE Reimbursement पर विवाद जारी रहा, तो अगस्त में शुरू होने वाला प्रवेश सत्र प्रभावित हो सकता है।

स्कूल संचालकों का तर्क है कि अन्य राज्यों ने प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाई है। उन्होंने दिल्ली का उदाहरण दिया, जहां प्राथमिक स्तर पर 25,000 रुपये दिए जा रहे हैं।

इस बीच स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।


RTE Reimbursement: मुख्य तथ्य

  • 2012 से प्रतिपूर्ति राशि में संशोधन नहीं हुआ।
  • प्राथमिक स्तर पर 7,000 से 18,000 रुपये की मांग।
  • राज्य में 6,844 निजी स्कूल संचालित।
  • 19,886 सीटें प्रवेश स्तर पर आरक्षित।
  • गैर-सहयोग से प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

असर और संभावित परिणाम

इस आंदोलन का सबसे बड़ा असर गरीब छात्रों पर पड़ सकता है। यदि स्कूल विभागीय प्रक्रिया में सहयोग नहीं करते, तो दाखिला और सत्यापन में देरी होगी।

राजीव गुप्ता ने कहा कि सरकार कहती है उसके पास धन नहीं है। लेकिन इसी अवधि में विधायकों और अधिकारियों के वेतन बढ़े हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि सरकार अन्य वेतन वृद्धि रोके, तो स्कूल भी आंदोलन वापस ले सकते हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि RTE Reimbursement विवाद का समाधान संवाद से ही संभव है। शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में टकराव से बच्चों का भविष्य प्रभावित हो सकता है।

आरटीई अधिनियम 2009 की विस्तृत जानकारी के लिए https://legislative.gov.in पर विवरण उपलब्ध है।


निष्कर्ष

RTE Reimbursement को लेकर छत्तीसगढ़ में स्थिति गंभीर मोड़ पर है। निजी स्कूल गैर-सहयोग के रास्ते पर हैं और सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो नए शैक्षणिक सत्र पर असर पड़ सकता है। इसलिए आवश्यक है कि सरकार और स्कूल प्रबंधन आपसी संवाद से RTE Reimbursement विवाद का सकारात्मक हल निकालें, ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *